हैदराबाद : तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने जिलाधीशों को आदेश दिया कि जंगलों के विकास के लिए कार्य योजना बनाकर यथाशीघ्र इसकी अमलवारी शुरू कर दें। उन्होंने कहा कि जंगलों के विकास से आवासीय इलाकों में तापमान कम होगा। साथ ही जंगलों को विकसित करने से मौसम में परिवर्तन आएगा। इसके अलावा अच्छी वर्षा होने और जैविक संपदा बनाए रखने में जंगल सहायक होंगे।

केसीआर ने जिलाधीशों के साथ दूसरे दिन की बैठक के अंतर्गत केसीआर ने 33 जिलों के जिलाधीश व अन्य उच्चाधिकारी गजवेल निर्वाचन क्षेत्र स्थित वन क्षेत्र का दौरा किया। इस अवसर पर केसीआर ने निर्वाचन क्षेत्र में सिंगाईपल्ली, नेनुटुरू कोमटी बंडा आदि क्षेत्रों में विकसित किए गए जंगलों के विकास कार्यों की जानकारी दी।

केसीआर ने जिलाधीशों से कहा कि तेलंगाना राज्य का गठन होने के बाद यह निर्वाचन क्षेत्र बिना पेड़ पौधों का था। बिल्कुल रेगिस्तान की तरह दिखाई दे रही थी। इसे देखकर आंखों में आंखों में आंसू निकल आ जाते थे। इसी वजह से यहां जंगलों कों को विकसित करने का निर्णय लिया। पिछले तीन साल पूर्व आरंभ किये कार्य के परिणाम को देखकर आज खुशी की अनुभूति होती है।

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मुख्यमंत्री आगे की अब यह क्षेत्र हरा भरा है। अच्छी वर्षा हो रही है। 27 किस्म के फलों के पेड़ जंगल में रहने से यह वन क्षेत्र 'मंकी फूड कोर्ट' बन गया है। मुख्यमंत्री ने जिलाधीश से कहा कि गजवेल की प्रेरणा लेकर अपने-अपने जिलों में जंगलों के विकास में जुट जाये। तेलंगाना में 66.48 लाख करोड़ एकड़ वन क्षेत्र है। इस दौरान राज्य वन विभाग की प्रमुख आर शोभा और अतिरिक्त प्रमुख आरएम डोब्रियाल ने भी जिला देशों जंगलों के विकास के लिए आवश्यक कदम उठाने की जानकारी दी।

इसके बाद केसीआर ने जिलाधीशों को कोमटी बंडा में मिशन भगीरथ प्लांट दिखाया। इसके बाद आयोजित बैठक में पंचायतराज कानून, नये मुंसील कानून की अमलावरी तथा नए राजस्व कानून पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का उन्मूलन करने के साथ-साथ किसानों और आम जनता को फायदा पहुंचाने जैसा राजस्व कानून बनाया जाए।

केसीआर ने जिलाधीश को निर्देश दिया कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में हरियाली और स्वच्छता हमेशा दिखनी चाहिए। इसके लिए 60 दिनों की कार्य योजना तैयार कर इसे लागू करने के भी निर्देश दिये।