नई दिल्ली : एमएलसी रामुलु नायक को विधान परिषद सदस्यता अयोग्यता के उच्च न्यायालय के निर्णय पर सर्वोच्च न्यायालय से राहत मिली। तेलंगाना सरकार ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान रामुलु नायक टीआरएस से कांग्रेस में शामिल हुये। इस पर विधान परिषद के चेयरमैन ने उन्हें अयोग्य घोषित करने का आदेश जारी किया।

रामुलु नायक चेयरमैन के आदेश पर रामुलु नायक ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अपनी याचिका में बताया कि उनका चयन राज्यपाल कोटा के अंतर्गत किया गया। इस मामले की सुनवाई में उच्च न्यायालय ने कहा कि विधान परिषद द्वारा जारी आदेश कानून के खिलाफ नहीं है।

एमएलसी रामुलु नायक ने उच्च न्यायालय के फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इस याचिका पर शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने रामुलु की ओर से पीठ के समक्ष दलीलें दीं।

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अदालत ने उनके तर्कों से सहमति जताई और अंतिम फैसले तक तेलंगाना सरकार और विधान परिषद के अध्यक्ष को एमएलसी चुनाव नहीं कराने का नोटीस जारी किया। सर्वोच्च न्यायालय की इस सुनवाई से एमएलसी रामुलु नायक को राहत मिली।