हैदराबाद : तेलंगाना राष्ट्र समिति ने विकास और कल्याणकारी योजनाओं को जनता के बीच तुरंत प्रचार और प्रसारित करने तथा विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ सोशल मीडिया के जरिए 'युद्ध' करने की रणनीति बनाई है। इसके लिए 'सोशल मीडिया सोल्जर्स' को मैदान में उतारने फैसला लिया है।सोशल मीडिया सोल्जर्स के सेनापति होंगे टीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष तारक रामाराव।

केटीआर टीआरएस की सररकार में पिछली बार आईटी में मंत्री रह चुके हैं। केटीआर के नेतृत्व इस समय हर विधानसभा क्षेत्र में करीब 200 पोलिंग बूथों में एक एक मुख्य कार्यकर्ता सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रशिक्षण दिये जाने का कार्य आरंभ हो चुका है।

टीआरएस के सूत्रों के अनुसार फेसबुक पर 11 से 12 लाख और ट्विटर पर करीब 3.25 लाख टीआरएस के फालोअर्स हैं। इनके अलावा व्हाट्सऐप आदि पर भी लाखों लोग जुड़े हुए हैं। इस संख्या को और बढ़ाने पर भी गंभीरता से काम किया जा रहा हैं।

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पता चला है कि टीआरएस ने लगभग 35 हजार सोशल मीडिया सोल्जर्स को तैयार कर रहने की योजना बनाई है। जो राज्य सरकार की नीतियों को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की आलोचना और हमले करने वाले और कर रहे विपक्षियों पर पलटवार करने का काम करेगी। टीआरएस को सोशल मीडिया की जरूरत क्यों महसूस हुई है इस सवाल के जवाब में सूत्रों ने कहा कि टीआरएस को बीजेपी का सोशल मीडिया नेटवर्क डराने और सताने लगा है।

इसीलिए टीआरएस ने मुख्यमंत्री के बयानों और कार्यों को जनता के बीच ले जाने की रणनीति अपनाई है। टीआरएस मान रही है कि सोशल मीडिया का उपयोग कर पाने के कारण ही हाल ही में हुए चुनाव में बीजेपी ने तेलंगाना में चार लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज कर पाई है। टीआरएस का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरी बार सत्ता में आने का राज भी सोशल मीडिया ही रहा है।