हैदराबाद : तेलंगाना के सर्वदलीय व विभिन्न जन संगठनों के नेताओं ने नए सचिवालय और नई विधानसभा के निर्माण के लिए वर्तमान सचिवालय तथा एर्रममंजिल भवनों को नहीं ढहाने का निर्देश मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव को देने का राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन आग्रह किया है।

तेलंगाना के सर्वदलीय व विभिन्न जन संगठनों के नेताओं ने सोमवार को राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात करके एक ज्ञापन सौंपा। राज्यपाल से भेंट करने वालों में कांग्रेस के सांसद रेवंत रेड्डी, कांग्रेस विधायक दल के नेता पूर्व नेता जाना रेड्डी, शब्बीर अली, एमएलसी जीवन रेड्डी, पूर्व सांसद पूनम प्रभाकर विवेक, तेलुगू देशम पार्टी के पूर्व सांसद एलएम रमणा, रावुला चंद्रशेखर रेड्डी, बीजेपी के नेता डीके अरूणा, चिंतल रामचंद्र रेड्डी, तेलंगाना जन समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर कोदंडराम, सीपीआई के चाडा वेंकट रेड्डी और जन संगठन के नेता संध्या, आचार्य पीएल विश्व्शेश्वर राव शामिल थे।

राज्यपाल से भेंट करने के बाद नेताओं ने मीडिया से कहा कि भवन के निर्माण की आड़ में मुख्यमंत्री केसीआर राजकोष का दुरुपयोग कर रहे हैं। संविधान के सेक्शन 8 और 80 तथा जीएचएमसी रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट के मुताबिक सभी हेरिटेज भवनों के राज्यपाल संरक्षक होते हैं। इसलिए सचिवालय के भवन और मंजिल भवनों का संरक्षण की जिम्मेदारी राज्यपाल की है। उन्होंने ने बताया कि इसी विषय की याद दिलाते हुए राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया है।

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नए विधानसभा और सचिवालय निर्माण के विरोध में सभी दल हुए एक, किया यह आह्वान

आपको बता दें किहाल ही में नया विधानसभा भवन और सचिवालय के निर्माण के विरोध में सभी विपक्षी दल एक हुए है। नेताओं की राय है कि सचिवालय और विधानसभा काफी मजबूत है। उनका मानना है कि गिराने और नया बनवाने की कोई आवश्यकता नहीं है।

पूर्व सांसद जी विवेक के नेतृत्व में गोलमेज बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में तेलंगाना कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष उत्तम कुमार रेड्डी, तेलंगाना जन सेना समिति के अध्यक्ष प्रो कोदंडराम, बीजेपी अध्यक्ष डॉ के लक्ष्मण, तेलंगाना टीडीपी के रमणा, बीसी कल्याण संघ के अध्यक्ष आर कृष्णय्या और नेताओं ने भाग लिया।

इस अवसर पर नेताओँ ने कहा कि वर्तमान सचिवालय और विधानसभा के भवन काफी मजबूत है और यह कई दशकों से अच्छी तरह से काम कर रहे हैं और आगे भी काम आएंगे। इस बात को ध्यान में रखते हुए वर्तमान सचिवालय को गिराया जाना ठीक नहीं है और न ही नए सचिवालय बनाने की कोई जरूरत नहीं है।

नेताओं ने आगे कहा कि हम पहले से ही नहीं सचिवालय और विधानसभा के निर्माण करने के सरकार फैसला का विरोध कर रही है। क्योंकि इसके निर्माण से करोड़ों रुपए बर्बाद होगा। उन्होंने कहा कि विधानसभा के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं। अन्य राज्यों के विधानसभा भवनों को भी उन्होंने देखा है। सच में देखा जाए तो राज्य विधानसभा सत्रों के आयोजन के लिए काफी अनुकूल है। इसमें कई प्रकार की सुविधाएं हैं।

इससे पहले विधानसभा में 294 विधायक बैठते थे। राज्य के विभाजन के बाद अब तेलंगाना के लिए भवन काफी अनुकूल है। इस प्रका से सोचा जाये तो नई विधानसभा भवन के निर्माण करने का फैसला ही गलत है।

नेताओं ने सवाल किया कि सरकार ने अब तक किराये जाने के कारणों को नहीं बताया है। उन्होंने कहा कि सचिवालय में जितने भी ब्लाक है वे सभी काफी मजबूत है। सचिवालय के सभी ब्लॉक अगले 60-70 साल तक अच्छी तरह से काम आएंगे।

नेताओं ने आरोप लगाया है कि केसीआर की फैसले बदलने की आदत है। उन्होंने पिछले दिनों में विधानसभा के सामने से मेट्रो रेल मार्ग के निर्माण का कड़ा विरोध किया और सीएम बनने के बाद अपने निर्णय को बदल दिया। उन्होंने याद दिलाया कि बैसान पोलो मैदान में सचिवालय निर्माण करने के प्रस्ताव लाने पर केसीआर ने कुछ और कहानी सुनाई थी।

नेताओं ने सचिवालय और विधानसभा के नाम पर बड़े पैमाने पर धन का दुरुपयोग होने से रोकने के लिए न्यायालय को हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। साथ ही नये सचिवालय और विधानसभा का निर्माण करने संबंधी सरकार के फैसले के खिलाफ जनता में जागरूकता लाने के लिए आगे आने का आह्वान किया।