हैदराबाद : तेलंगाना हाईकोर्ट ने तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) में शामिल हुए कांग्रेस के विधायकों और एमएलसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट में मंगलवार को कांग्रेस के विधायक और एमएलसी के टीआरएस में शामिल होने को लेकर दायर याचिका पर सुनावाई हुई।

गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी के भट्टी विक्रमार्क, उत्तम कुमार रेड्डी और शब्बीर अली ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। दायर याचिका में आरोप लगाया है कि सत्तापक्ष की ओर से कांग्रेस के सीएलपी को टीआरएस में विलय करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 10 विधायक के साथ-साथ विधानसभा के अध्यक्ष, विधान परिषद के अध्यक्ष और निर्वाचन आयोग को भी नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने विधायक सुधीर रेड्डी, लिंगयया, हरिप्रिया, उपेंदर रेड्डी, सबिता इंद्रा रेड्डी, रेगा कांता राव, आत्रम सक्कु, हर्षवर्धन, वनमा वेंकटेश्वर राव और जूजुला सुरेंदर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

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इसके अलावा कांग्रेस के एमएलसी एमएस प्रभाकर राव, दामोदर रेड्डी, संतोष कुमार और आकुला ललिता को भी हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। याचिका की सुनवाई के बाद मामले को चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है।

आपको बता दें कि हाल ही में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीतने वाले सभी विधायक एक के बाद एक पार्टी छोड़ रहे हैं। अब कांग्रेस विधायक दल (काविद) का टीआरएस में विलय करने की मांग करते हुए कांग्रेस छोड़ चुके 12 विधायकों ने गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष पोचारम श्रीनिवास रेड्डी से मिले।

इस संबंध में 12 विधायकों ने अपने हस्ताक्षरों के साथ एक ज्ञापन विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा। स्पीकर से मिलने वालों में सबिता इंद्रारेड्डी, गंड्रा वेंकट रमणा रेड्डी, आत्रम सक्कू, हरिप्रिया, जाजुला सुरेंदर, बीरम हर्षवर्दन रेड्डी, सुधीर रेड्डी, वनमा वेंकटेश्वर राव, रेगा कांताराव, पायलट रोहित रेड्डी, कंदाला उपेंदर रेड्डी, चिरुमर्ति लिंगय्या शामिल है।

उन्होंने बताया कि वे सभी मुख्यमंत्री केसीआर के नेतृत्व में काम करने के लिए तैयार हैं और अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के विकास के लिए ही उन्होंने यह निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनके इस निर्णय को लोगों का समर्थन प्राप्त है।

पिछले वर्ष हुए तेलंगाना विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के 19 विधायक चुने गए थे, लेकिन उनमें से 12 विधायक टीआरएस में शामिल हो चुके हैं। इनसबके आधिकारिक रूप से टीआरएस में शामिल नहीं होने के बावजूद उनका कांग्रेस के साथ अब कोई संबंध नहीं रहा है।