हैदराबाद : लोकसभा चुनाव में तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को मिली महत्वपूर्ण बढ़त से राज्य में दोनों दलों में नयी जान आ गयी है। पिछले साल प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में दोनों दलों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था।

सत्तारुढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने पिछले साल दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में 119 सीटों में से 88 पर जीत दर्ज की थी। इस साल लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद कई एक्जिट पोल में यह अनुमान लगाया गया था कि टीआरएस आम चुनाव में भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 13-16 सीटें जीत सकती है। हालांकि चंद्रशेखर राव की पार्टी ने राज्य की 17 में 16 लोकसभा सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा था। लेकिन पार्टी केवल नौ सीट ही अपने कब्जे में कर पाई।

भाजपा ने चार जबकि कांग्रेस ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। सोलहवीं लोकसभा के लिए 2014 चुनाव में भाजपा को राज्य की केवल एक लोकसभा सीट पर सफलता मिली थी। पार्टी की योजना अब राज्य में अपनी स्थिति को मजबूत करते हुए खुद को टीआरएस के विकल्प के रूप में पेश करने की है। भाजपा की राज्य इकाई के प्रमुख के. लक्ष्मण ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''यह तेलंगाना में भाजपा के युग की शुरुआत है। अब टीआरएस का पतन शुरू हो गया है। तेलंगाना में लोगों का मानना है कि भाजपा अपने दम पर टीआरएस से मुकाबले में सक्षम है।'' उन्होंने कहा कि पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक प्रकार की लहर है और तेलंगाना इससे अछूता नहीं है।

कांग्रेस ने भी इस चुनाव में राज्य में अच्छा प्रदर्शन किया है। वर्ष 2014 में पार्टी के दो उम्मीदवार लोकसभा पहुंचे थे। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एन उत्तम कुमार रेड्डी और कार्यकारी अध्यक्ष ए रेवंत रेड्डी ने जीत हासिल की है। उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव में करारी हार और 19 नवनिर्वाचित विधायकों में से 11 के टीआरएस के पक्ष में चले जाने के कारण राज्य में कांग्रेस असहज स्थिति में थी।

राज्य कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष पी प्रभाकर ने दावा किया कि उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव में कुछ और सीटों पर जीत दर्ज की कर सकती थी। भाजपा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि 'मोदी लहर' और हिन्दुओं को लेकर मुख्यमंत्री राव के बयान से भगवा पार्टी को फायदा पहुंचा। प्रभाकर ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''कांग्रेस अब भी वहां है।

विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार 103 सीटों पर अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। मोदी लहर और केसीआर के बयान के कारण भाजपा की जीत हुई। इस बात की गारंटी नहीं है कि यही स्थिति (2023 में) भी जारी रहेगी।''

इसे भी पढ़ें :

TRS के लिए चिंताजनक है तेलंगाना में भाजपा का उदय

टीआरएस के विधान पार्षद पी राजेश्वर रेड्डी ने कहा कि सत्तारूढ़ दल 'अति आत्म विश्वास' और मतदाताओं द्वारा मोदी को प्राथमिकता दिये जाने से कुछ सीटें हार गयी। उन्होंने कहा कि कुछ सीटों पर टीआरएस को बहुत कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा। उल्लेखनीय है कि निजामाबाद से टीआरएस की मौजूदा सांसद और मुख्यमंत्री के बेटी के कविता की स्तब्धकारी हार से सत्तारूढ़ दल सकते में है।