बागियों के कारण ‘महाकूटमी’ की जीत की संभावनाएं प्रभावित नहीं होगी : खूंटिया

तेलंगाना प्रभारी आर. सी. खूंटिया (फाइल फोटो) - Sakshi Samachar

हैदराबाद : कांग्रेस ने रविवार को कहा कि ‘जन गठबंधन' (महाकूटमी) के साझेदारों के बीच कुछ सीटों पर ‘‘दोस्ताना मुकाबले'' से इस गठबंधन की चुनावी संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कोशिश की जा रही है कि ‘‘बागी'' उम्मीदवार मतदान से पहले खुद ही चुनावी रेस से बाहर हो जाएं।

आपको बता दें कि तेलंगाना के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस और तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) के बागी ऐसी सीटों से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं जिन्हें अन्य साझेदारों को आवंटित किया गया है। आगामी सात दिसंबर को तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

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अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के तेलंगाना प्रभारी आर. सी. खूंटिया ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘आप उन्हें बागी नहीं कह सकते। हम (गठबंधन साझेदार) अपने कुछ उम्मीदवारों को समझा नहीं सके, इसलिए उनकी भागीदारी दोस्ताना मुकाबला है।''

तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा), प्रोफेसर एम. कोडण्डराम की अगुवाई वाली टीजेएस और भाकपा कांग्रेस की अगुवाई वाले जन गठबंधन (महाकूटमी) का हिस्सा हैं। हालांकि कुछ सीटें ऐसी हैं जिन पर कांग्रेस के बागी उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।

वायरा और बेल्लमपल्ली ऐसी ही सीटों में शामिल है। भाकपा को दी गई वायरा और बेल्लमपल्ली सीट पर कांग्रेस के बागी उम्मीदवार रामुलू नाइक और जी. विनोद अपनी किस्मत आजमाने उतर पड़े हैं। विनोद पूर्व केंद्रीय मंत्री जी. वेंकटास्वामी के पुत्र हैं।

खूंटिया ने कहा, ‘‘इससे हमारी जीत की संभावना प्रभावित नहीं होगी। चुनावों से दो-तीन दिन पहले कुछ फैसले किए जा सकते हैं ताकि (बागी) उम्मीदवार मुकाबले से खुद बाहर हो जाएं।''

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘हमें 75-80 सीटें मिल जाएंगी।'' भाकपा महासचिव सुरावरम सुधाकर रेड्डी ने कहा कि मौजूदा रुझान को देखते हुए ऐसा लगता है कि कांग्रेस की अगुवाई वाले जन गठबंधन और टीआरएस के बीच कड़ी टक्कर है।

रेड्डी ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि आखिरकार विपक्षी मोर्चे को लाभ मिलेगा। मोर्चा लाभ की स्थिति में है, क्योंकि चार पार्टियां साथ हैं।''

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