हमारे देश में भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक त्यौहार रक्षाबंधन की तरह ही भैया दूज का एक विशेष महत्व है। देशभर में भाई-बहन के परस्पर प्रेम और स्नेह का प्रतीक भैया दूज का पर्व दिवाली के बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह त्यौहार 9 नवंबर को मनाया जाएगा।

भैया दूज के दिन बहनें अपनी भाइयों के रोली और अक्षत से तिलक करके उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं और भाई बहन को प्यार से तोहफे देते हैं।

अबकी साल भैया दूज को मनाने का सबसे शुभ मुहूर्त 2 घंटे 17 मिनट तक का है। बताया जा रहा है कि अगर भाई दूज की रस्में इस समय में निभाई जाएंगी तो सबसे शुभकारी व लाभकारी होगी...

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आरंभ काल : दोपहर 1 बजकर 10 मिनट

मुहूर्त समाप्ति- दोपहर 3 बजकर 27 मिनट

ऐसे करें तैयारी

  • बहनों को चाहिए कि सबसे पहले चावल के आटे से चौक तैयार करें।
  • तैयार किए गए चौक पर भाई को बैठाएं फिर उनके हाथों की पूजा करें।
  • कहीं कहीं भाई की हथेली पर चावल का घोल लगाने की परंपरा है।
  • इसके बाद हाथ में रोली लगाकर फूल, पान, सुपारी, मुद्रा आदि हाथों पर रख कर जल छिड़कें।
  • जल छोड़ते हुए मंत्र भी बोले जा सकते हैं।
  • बहनें अपने भाइयों की आरती भी उतार सकती हैं।
  • इसके पश्चात भाई की हथेली में कलावा बांधा करती हैं।
  • अंत में भाई को मिष्ठान्न खिलाया जाय। कहीं-कहीं भाइयों को मिश्री खिलाने की परंपरा है।

इसके अलावा शाम के समय बहन यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर एक दिया रखती है, जिसका मुख दक्षिण दिशा की ओर होता है।