नई दिल्ली: तकनीकी तौर पर इंसान ने बड़ी प्रगति की है। इसी सिलसिले में मील का पत्थर साबित होगा ब्रेन रीडिंग कम्प्यूटर इंटरफेस। जी हां अत्याधुनिक ये डिवाइस ये जानने में सक्षम होगा कि आप सोच क्या रहे हैं।

बता दें कि सोशल मीडिया कंपनी Facebook ब्रेन रीडिंग कंप्यूटर इंटरफेस की परियोजना पर का कर रहा है। FACEBOOK और युनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रैंसिस्को (UCSF) के वैज्ञानिक दिन रात एक कर इस डिवाइस को तैयार करने में जुटे हैं।

इस डिवाइस को लेकर बुद्धिजीवियों और वैज्ञानिकों में काफी कौतूहल है। साथ ही इसके काम करने के तरीके का कई बार डिमॉन्सट्रेशन भी किया जा चुका है।

पहली बार इस तरह का आइडिया 2017 में एक डेवलपर कंपनी ने रखा था। हालांकि आइडिया देने वाली कंपनी इस पर आर्थिक अभाव के चलते काम शुरू नहीं किया। जबकि Facebook ने बीड़ा उठाया है कि इस ब्रेन रीडिंग मशीन को बाजार में उतारा जाय।

लोगों की मानें तो इस तरह के डिवाइस अपने आप में क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगा। अपराधियों से कई बातें उगलवाना पुलिस के लिए आसान होगा।

ब्रेन रीडिंग कम्प्यूटर का नुकसान

इस तरह के डिवाइस के जहां कई फायदे हो सकते हैं। वहीं इसके नुकसान से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। ब्रेन रीडिंग मशीन के जरिए हम दूसरों की उन भावनाओं से अवगत हो पाएंगे, जो किसी की पूरी तरह निजी है। ऐसे में रिश्तों में दरार की भी गुंजाइश हो सकती है।