नई दिल्ली : रियल्टी क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने रविवार को निमार्णाधीन आवासी संपत्तियों पर जीएसटी 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया। जीएसटी नई दरें एक अप्रैल से लागू होगी।

परिषद ने सस्ते आवासीय परियोजनाओं पर जीएसटी की दर आठ फीसदी से घटाकर बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट के एक फीसदी कर दी है। आकार और लागत दोनों मामले में सस्ते आवास की परिभाषा में भी बदलाव किया गया है।

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने एक ट्वीट के जरिए कहा, " सस्ते आवासों के लिए जीएसटी की दर आठ फीसदी से घटाकर एक फीसदी कर दी गई है और जो सस्ते आवास की श्रेणी में नहीं आते हैं उनके लिए जीएसटी की दर 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दी गई है।"

मेट्रो शहरों में 60 वर्गमीटर तक कारपेट एरिया वाले घरों और गैर-मेट्रो शहरों में 90 वर्गमीटर तक कारपेट एरिया वाले घरों को सस्ते आवास के तहत वर्गीकृत किया गया था। लागत के मामले में 45 लाख रुपये की संपत्ति को सस्ते आवास की श्रेणी में रखा गया है। परिषद में केंद्रीय वित्तमंत्री और राज्यों के वित्तमंत्री शामिल हैं।

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केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सभी आवासीय परियोजनाएं जो सस्ते आवास की श्रेणी में नहीं आती हैं उनपर जीएसटी की दर 12 फीसदी की जगह पांच फीसदी होगी। देश के सात बड़े नगरों में छह तकरीबन छह लाख निर्माणाधीन घर हैं। इस कदम से उनकी ब्रिकी बढ़ने की उम्मीद की जाती है।

जेटली ने कहा, "इससे रियल स्टेट क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा और मध्यम वर्ग को राहत मिलेगी।" बैठक में लॉटरी को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया क्योंकि कुछ प्रदेशों के प्रतिनिधि अनुपस्थित थे। वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने लॉटरी पर एकसमान 18 फीसदी या 28 फीसदी जीएसटी दर की सिफारिश की।

मत-भिन्नता के कारण लॉटरी पर जीएसटी की दर तय करने के प्रस्ताव को वापस मंत्रियों के समूह के पास भेज दिया गया है।