मुंबई : रीयल एस्टेट क्षेत्र ने भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों के मोर्चे पर यथास्थिति कायम रखने के फैसले का स्वागत किया है। रीयल एस्टेट क्षेत्र का कहना है कि इससे घर के खरीदारों का भरोसा कायम होगा और बिक्री में सुधार आएगा।

नाइट फ्रैंक के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजाल ने कहा, ‘‘यह फैसला हमारी उम्मीद के अनुरूप है। इससे रीयल एस्टेट क्षेत्र को राहत मिली है जो ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना को लेकर चिंतित था।''

जेएलएल इंडिया के कंट्री प्रमुख रमेश नायर ने कहा, ‘‘जनवरी-सितंबर की अवधि के दौरान बिक्री और नए घरों की पेशकश बढ़ी है। इस आवास क्षेत्र में निश्चित रूप से सुधार का संकेत दिख रहा है।''

नायर ने कहा कि जून और अगस्त में लगातार ब्याज दरों में वृद्धि से खरीदारों की धारणा प्रभावित हुई। अक्टूबर में ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया गया। इस बार भी ब्याज दरों को यथावत रखा गया है। इससे खरीदारों का भरोसा फिर कायम हो सकेगा।

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सीबीआरई के चेयरमैन (भारत और दक्षिण पूर्व एशिया) अंशुमान मैगजीन ने कहा कि एमपीसी के फैसले से रिजर्व बैंक अधिक लचीले तरीके से काम कर सकेगा, जिससे आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहन मिलेगा और बैंकों की ऋण की स्थिति बेहतर हो सकेगी।

एनारॉक प्रापर्टी के सलाहकार अनुज पुरी ने कहा कि राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो ब्याज दरों में वृद्धि मौजूदा सरकार की दृष्टि से अनुकूल नहीं होती क्योंकि लोकसभा चुनाव 2019 में हैं।

पुरी ने कहा कि आर्थिक दृष्टि से देखा जाए तो रेपो दर में बढ़ोतरी से आवास ऋण की दरों पर असर पड़ता। ऊंची आवास ऋण दर से घर के खरीदार विशेषरूप से सस्ता मकान खरीदने की इच्छा रखने वाले प्रभावित होते हैं।

प्रॉप टाइगर.कॉम के मुख्य निवेश अधिकारी अंकुर धवन ने कहा कि ब्याज दरों में वृद्धि से पूरा उद्योग प्रभावित होता। पहले से ही यह उद्योग कोष की कमी का सामना कर रहा है।

पैराडाइम रीयल्टी के प्रबंध निदेशक पार्थ मेहता ने कहा कि ब्याज दरों में वृद्धि नहीं किए जाने को अनुकूल बताते हुए कहा कि ब्याज दरों में जब भी वृद्धि होती है तो इससे आवास ऋण महंगा हो जाता है जिससे मांग प्रभावित होती है।

नाहर ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन मंजू याग्निक ने रिजर्व बैंक के कदम को एक सोच विचार कर उठाया गया कदम बताया।