‘रियल एस्टेट क्षेत्र का कारोबार 2020 तक पार करेगा 180 अरब डॉलर

कांसेप्ट इमेज - Sakshi Samachar

नई दिल्ली : भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र का बाजार साल 2020 तक 180 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है, जबकि 2015 में यह 126 अरब डॉलर का था। इसके साथ ही साल 2020 तक रियल एस्टेट क्षेत्र का देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में योगदान बढ़कर 11 फीसदी हो जाएगा। फर्स्ट कंस्ट्रक्शन काउंसिल द्वारा यहां आयोजित कंस्ट्रक्शन वर्ल्ड आर्किटेक्ट एंड बिल्डर अवार्ड्स (सीडब्ल्यूएबी) समारोह में यह जानकारी दी गई।

कंपनी ने शनिवार को एक बयान में कहा कि इस आयोजन में आर्किटेक्स, बिल्डर्स और इंटीनीयर डिजानर्स ने भाग लिया और देश के उत्तरी क्षेत्र के बिल्डिंग उद्योग में प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए 13 वें सीडब्ल्यूएबी पुरस्कार 2018 के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की गई।

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फस्र्ट कंस्ट्रक्शन काउंसिल के संस्थापक प्रताप पडोडे ने गोलमेज सम्मेलन की शुरुआत करते हुए कहा, "भारत के उत्तरी क्षेत्र में स्मार्ट शहरों के संदर्भ में रियल एस्टेट क्षेत्र में आवश्यक तेजी दर्ज नहीं की गई है। हालांकि, बुनियादी ढांचे के विकास से, विशेष रूप से मेट्रो रेल परियोजनाओं के कारण शहरों में रियल एस्टेट बाजार के विकास में तेजी आई है। स्मार्ट शहरों में शामिल होने की होड़ में जीतने के लिए शहरों को साफ-सफाई, कम अपराध दर, पानी की उपलब्धता, यात्रा की सुविधा आदि पर ध्यान देना होगा। इसी तरह 'किफायती आवास परियोजनाएं' रियल एस्टेट के क्षेत्र में तेजी लाएगी।"

उत्तर भारत के जिन शहरों को स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल किया गया है, उनमें अरुणाचल प्रदेश का पासीघाट और ईटानगर, असम का गुवाहाटी, चंडीगढ़, हरियाणा का फरीदाबाद और करनाड, हिमाचल प्रदेश का शिमला और धर्मशाला, जम्मू और कश्मीर का श्रीनगर और जम्मू, मणिपुर का इम्फाल, मिजोरम का आइजॉल, नागालैंड का कोहिमा, नई दिल्ली, पंजाब का लुधियाना, अमृतसर और जालंघर, सिक्किम का नामची और गंगटोक, उत्तर प्रदेश का लखनऊ, आगरा, कानपुर, वाराणसी, झांसी, इलाहाबाद, अलीगढ़, सहारनपुर, मुरादाबाद और बरेली तथा उत्तराकंड का देहरादून शामिल है।

इस सम्मेलन में एक रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र का बाजार साल 2020 तक 180 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है, जबकि 2015 में यह 126 अरब डॉलर का था। इसके साथ ही साल 2020 तक रियल एस्टेट क्षेत्र का देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में योगदान बढ़कर 11 फीसदी हो जाएगा।

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