अब तक 3,648 किलोमीटर पदयात्रा पूर्ण

09.01.2018, बुधवार

इच्चापुरम, श्रीकाकुलम जिला

यदि हमारा संकल्प अच्छा हो तो भगवान का समर्थन भी मिलता है। 14 महीने पहले इडुपुलपाया में पिताजी के चरणों के पास से आरंभ हुई प्रजा संकल्प यात्रा..इच्चापुरम में विजय संकल्प स्तूप तक पहुंची। 341 दिनों तक 13 जिलों में 3648 किलोमीटर तक पदयात्रा चली..आज समाप्त हो गई। पिताजी वाईएसआर, बहन शर्मिला और मैं..इस तरह हम तीनों की पदयात्रा इच्चापुरम में समाप्त होकर ऐतिहासिक घटना बन गई। इसकी याद में तीन स्तूप रहना एक अद्भुत घटना है।

एक परिवार के तीन लोग हजारों किलोमीटर पदयात्रा करना..करोड़ों लोगों से मिलना..दुनिया के इतिहास में ऐसा सौभाग्य किसी को नहीं मिला। यह भगवान की देन है। यह लोगों का आशीर्वाद है। करोड़ों लोगों की दिल की आवाज सुनने का मौका मिलना..मेरे जिंदगी की बड़ी अनुभूति रही है। मुझे लोगों की समस्याओं को सुनने का अच्छा मौका मिला।

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समस्याएं...

लोगों की छोटी-छोटी समस्याओं का हल नहीं हुआ..इसके लिए उनके द्वारा किया जा रहा संघर्ष की बातें सुनकर बहुत दुख हुआ। यह सुनकर आश्चर्य हुआ कि अधिकतर समस्याएं सत्तासीन नेताओं के कारण उत्पन्न हुए। दिल को छूने वाली अनेक दयनीय गाथा सुनने को मिले।

आत्महत्या...

उदयगिरी में अंकम्माराव नामक कमजोर तबके के इंजनीयरिंग छात्र ने फीस पुनर्भुतान नहीं मिलने और फीस बांधने के लिए पिताजी के कष्टों को देखकर आत्महत्या कर ली। यह सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ। कर्ज चुकाने के लिए एक किसान ने अपनी किडनी बेच दी..जिंदगी गुजारने के लिए गुंटूर जिले में एक होटल में काम करने की बात सुनकर बहुत तकलीफ हुई।

ऑटो बेचा...

इसी तरह कोंडाकेंगुवा गांव में 108 सेवा नहीं आने के कारण दंडसी मेरी नामक बहन को ऑटो में रक्तस्राव हो गया। इसके कारण पेट में पल रहे बच्चे को खो चुकी। यह सुनकर बहुत दुख हुआ। विजयावाडा निवासी 30 साल की एक मुस्लिम बहन किडनी पीड़ित है। उसे आरोग्यश्री नहीं मिला। मुख्यमंत्री सहायता निधि से किसी प्रकार सहायता नहीं मिली। उसके पति ने उसके किडनी इलाज के लिए ऑटो को बेच दिया है। अब दाताओं से मदद की आस लगाये बैठा है। उसकी दयनीय हालत देखकर मुझे बहुत दुख हुआ।

ड्वाक्रा...

इसके अलावा दलितवाडा ड्वाक्रा संघ की बहनें मिली। बहनों ने बताया कि बाबू के कर्ज माफी के आश्वासन पर भरोसा किया। मगर कर्ज माफ नहीं हुआ। इसके लिए अदालत का दरवाजा खटखटना पड़ा है। इन बहनों की तकलीफों को नजदीकी से देख पाया हूं।

जीवित को मृत...

पदयात्रा के दौरान के मैंने पाया कि 90 साल से अधिक आयु के बूढ़ें, पति को खो चुके अनेक विधवाएं, सौ प्रतिशत दिव्यांग, सत्तापक्ष के नेताओं ने लगभग 900 लोगों पेंशन बंद किया है। अम्मण्णम्मा नामक महिला को मर चुकी कहकर पेंशन को रोक दिया है। बाद में उसने बाबू मैं जीवित हूं कहकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

पति को बताओ...

इसी तरह मेट्टु लक्ष्मी का पति चल बसा है। वह इसी दुख में से उभर ही नहीं पाई। अधिकारियों ने उसका पेंशन रोक दिया। कारण पूछने पर बताया गया वह विधवा नहीं है। लक्ष्मी ने अधिकारियों से पूछा कि ठीक मुझे पेंशन मत दो, मेरा पति कहां पर बताओ। मेरे पति को लाकर दो। लक्ष्मी ने न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इतना नहीं, पिठापुरम में सुमंगल महिलाओं के पति के जीवित रहते हुए मर चुके कहकर प्रमाणपत्र जारी करके पेंशन डकार जाने की अनेक घटनाएं सामने आये। सत्तापक्ष और अधिकारियों की घिनौनी हरकतों के जीते जागते उदाहरण देखने को मिले है।

अन्नपूर्णा...

गोदावरी को अन्नपूर्णा कहा जाता है। बाबू के शासनकाल में इस जिले के गोल्लाप्रोलु मंडल में सात किसान आत्महत्या कर चुके हैं। सरकार की सहायता नहीं मिलने.. प्रकाशम जिले के फ्लोराइड पीड़ित.. बागवानी किडनी पीड़ितों के गाथाओं को सुनकर मेरी आंखों में आंसू आ गये है। मुख्यमंत्री ने तूफान प्रभावितों को बिना चलने वाले चेक दिये। संसाधन पूरे लूट ले गये। जन्मभूमि कमेटियों की प्रताड़ना जारी है। हर वर्ग को लोगों की परेशान है। इस प्रकार लोगों की अनेक समस्याओं को पदयात्रा के दौरान देख पाया हूं।

आशीर्वाद...

इन लोगों की गाथाएं सुनने वाला कोई नहीं है। समस्याओं को हल भी दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे करोड़ों लोग मेरे कदमों में कदम मिलाया। साथ चले। इनका प्यार और आशीर्वाद ही मुझे आगे क ओर चलाया है। प्रजा संकल्प ही देश की राजनीति में बहुत बड़ा परिवर्तन ले आने का आदर्श बना है। सत्तापक्ष पार्टी के अवसरवाद पर पर्दा उठाया है। नेताओं के षड्यंत्र के कारण ही मेरे ऊपर जान लेवा हमला किया गया। मगर लोगों की आशीर्वाद ही मुझे बचा पाई है। लोगों के विश्वास ने मेरी जिम्मेदारी को और बढ़ाया है।

राजन्ना राज...

मेरे पिताजी कहा करते थे, "कितने साल जीये यह मुख्य नहीं है, कितने लोगों के दिलों में बसा है यह मुख्य है।" पिताजी के यह बात मेरे दिल में हमेशा हलचल करती रहती है। राजन्ना राज को स्थापना करने का दृढ़ संकल्प ही प्रजा संकल्प यात्रा ने मुझे संदेश दिया है।

मुख्यमंत्री से मेरा एक सवाल...

पिताजी की पदयात्रा से ही आरोग्यश्री, 108 सेवा और फीस पुनर्भुतान योजनाओँ का जन्म हुआ। आपकी पदयात्रा से एक योजना भी नहीं आई है। आपकी पदयात्रा में दिये गये आश्वास की अमलावरी नहीं हुई है। तत्कालीन समस्याएं और जटिल हो गई। आपकी असर्थता के कारण ही ये समस्याएं पैदा हुई है। लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। लोग गुस्से में है। लोगों को क्या जवाब दोगे?

-वाईएस जगन