339वें दिन की पदयात्रा डायरी, बागवानी के लिए दिये गये आश्वासन की नहीं हो रही अमलवारी

डिजाइन फोटो - Sakshi Samachar

अब तक 3,628.2 किलो मीटर पदयात्रा पूरी

07.01.2019, सोमवार

जगति, श्रीकाकुलम जिला

आज मेरी प्रजा संकल्प यात्रा माणिक्यापुरम, बल्लिपुट्टुगा, वरका, बोरिवंका, जगति गांव से होते हुए गुजरी। सुबह दिव्यांग अधिकार संघ के नेता आकर मुझसे मिले। नेताओं ने बताया कि चंद्रबाबू के शासनकाल में एक नौकरी की भी भर्ती नहीं की गई है। जबकि पिताजी ने दिव्यांग परिवार के लिए भार न पड़े इस बात को ध्यान में रखते हुए अनेक कल्याण कार्यक्रमों की अमलावरी की थी। मगर अब वह मौका नहीं है।

आज सुबह भीवरम से आई निर्मला कुमारी और विमला कुमारी बहनों ने भी नौकरी नहीं मिलने की बात बताई। इन बहनों ने यह भी बताया कि इनकी पैदाईश से ही गूंगी और बहरी है। पिताजी के शासनकाल में इस दिव्यांग बहन को नौकरी मिली। उसके जीवन का सहारा बन गया। उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार पिता के प्रति आभारी है। यह सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा।

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डायरी की बनी पुस्तक...

इन बहनों ने मेरी पदयात्रा के दौरान लिखी गई डायरी की सभी कटिंगों की एक पुस्तक बनाकर मुझे भेंट स्वरूप दिया। तेराह जिलों में चली प्रजा संकल्प यात्रा पर एक कविता लिखी। वह कविता भी मुझे गाकर सुनाई। मुझे मिलने के दौरान वे भावुक हो गये। उनको आंखों में खुशी के आंसू निकल पड़े।

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नारियल बागवानी...

आज की पदयात्रा चली उस प्रदेश में अधिकतर नारियाल के ही पेड़ थे। ऊंचे-ऊंचे नारियल के पेड़ इस प्रांत की विशेषता है। इन नारियलों की उत्तर भारत को निर्यात किया जाता है। मगर तितली तूफान के कारण नारियल फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। जिधर देखो उधर पूरी तरह से सूखे और गिरे हुए नारियल पेड़ ही दिखाई देते है। प्रसिद्ध नारियल बागवानी अब अंतिम सांस गिन रही है। नारियल बागवानी एक जमाने तटीय इलाकों की शान थी। मगर आज श्मशान वाटिका बनती जा रही है।

पलायन...

तीस-चालीस साल के ये नारियल पेड़ तूफान के कारण जमीन पर गिर गये। अब इन नारियल पेड़ के भरोसे पर जीने वालों की जिंदगी अंधकार में बदल गई। यहां के नारियल पेड़ का मतलब है घर का बड़ा बेटा। यदि अब नारियल पेड़ लगाये तो फल आने के लिए दस साल का समय लगेगा। किसानों ने रोते हुए बताया कि अब हमारे सामने पलायन करने के सिवा कोई और मार्ग नहीं है।

संकल्प को बल मिला...

यह सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ कि कलिंगपट्टणम, इद्दिवानिपालेम और अन्य गांवों के सभी पुरुष पलायन कर चुके है। कुसुमपुरम के सड़क किनारे पेद्दाम्मा माता का मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण केवल पयायन किसानों ने बनाया है। यह पूरा इलाका पलायन को प्रतिबिंबित करता है। यह सब देखकर मुझे इनके लिए कुछ करने के मेरे संकल्प को और बल मिला है।

सर्वशिक्षा अभियान...

सर्वशिक्षा अभियान में काम करने वाले कंचिली और कविटी मंडलों में काम करने वाले कर्मचारी मिले। कर्मचारियों ने बताया कि उनके साथ बंधुआ मजदूरी करवाकर वेतनों में भी कटौती कर रहे है। बाबू ने उनकी सेवाओं को स्थायी करने का आश्वासन देकर उनधोखा दिया है।

एसटी प्रमाणपत्र...

आज जिन गांवों में से मेरी पदयात्रा चली उन गांवों में अधिकतर बेमतो ओरिया समूह के लोग थे। पिछले दिनों इस समूह को एसटी प्रमाणपत्र दिया गया। मगर अब इस समूह को एसटी प्रमाणपत्र नहीं दिया गया। मजे की बात यह है कि माता-पिता को एसटी प्रमाणपत्र है। लेकिन इनके बच्चों को यह प्रमाणपत्र नहीं दिया जा रहा है। अभिभावकों ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि सालों से निवास और जाति प्रमाणपत्र नहीं मिलने के कारण उनके बच्चों का भविष्य कैसे होगा?

मुख्यंत्री से मेरा एक सवाल...

इस बागवान क्षेत्र को नारियल अनुसंधान केंद्र और कोकोनट फुड पार्क स्थापित करने का आश्वासन दिया था। इस आश्वासन का क्या हुआ? अनेक किसान कह रहे है कि नारियल बागवान पुरी तरह से बर्बाद हो गये। मगर मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। बिना चलने वाले चेक दिकर धोखा दिया जा रहा है। इन किसानों को क्या जवाब दोगे? तीन साल में ही फल देने वाले नारियल पौधों की आपूर्ति कार्यक्रम की घोषणा की थी। इस कार्यक्रम का क्या हुआ?

-वाईएस जगन

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