अब तक 3,585 किलोमीटर पदयात्रा पूरी

01.01.2019, मंगलवार

हरिपुरम, श्रीकाकुलम जिला

आज सुबह शिविर के पास सैकड़ों लोग आये। नये साल की बधाई दी। इन लोगों के बीच पदयात्रा आरंभ हुई। साथ ङी शिविर के बाहर निकलते ही वंकुलुर गांव की अनेक बहनों ने अपनी पारंपारिक नृत के साथ मेरा स्वागत किया। नये साल का केक काटने लगाया।

एक जमाने में इस गांव में विकास का नामो निशान नहीं था। ज्यादातर इस गांव में मछली पकड़ने वाले रहते हैं। आज यह एक आदर्श गांव बन गया। सरकार ने इस गांव के विकास के लिए कुछ भी नहीं किया। मछली और रोजगार के अवसर मिलना मुश्किल हो गया।

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प्रेरणा...

नेक लोग गांव छोड़कर पलायन कर गये। दूसरी जगह जाकर रहने लगे। उन्होंने अपनी गांव की हालत पर विचार किया। सभी ने मिलकर गांव को दत्तक लिया। हर दिन एक व्यक्ति गांव के विकास में अपना सहयोग दे रहा है। इस प्रकार पलायन कर चुके लोगों ने मिलकर इस गांव का विकास कर दिखाया। यह देखकर और सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा। इनकी स्फूर्ति सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

तितली ...

तितली प्रभावितों के प्रति सरकार का उदासीन रवैया गांवों में स्पष्ट दिखाई देता है। श्रीरामनगर गांवों वालों ने बताया कि तूफान प्रभावितों को मिलने वाली सहायता को टीडीपी के नेता डकार रहे है। साथ ही योग्य लोगों को सहायता नहीं दिया गया। कुछ लोगों जो चेक दिये गये, मगर उसके पैसे अब तक नहीं मिले है।

सशस्त्र संघर्ष आंदोलन...

बाहडापल्ली गांव सशस्त्र संघर्ष आंदोलन के लिए प्रसिद्ध है। गांव के किसान संगठनों के प्रतिनिधि मुझसे मिले। तितली तूफान के बाद से इस गांव में किसी प्रकार की सहायता ही नहीं दी गई। इसके चलते जन संगठनों ने सरकार के रवैया का विरोध किया। साथ ही दान-दाताओं से चावल जमा करके लोगों में वितरित किया। इस प्रकार चावल वितरित करने वाले 16 लोगों के खिलाफ सरकार ने देशद्रोह का मामला दर्ज किया। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने बताया कि चंद्रबाबू की सरकार ने उन्हें बिना चलने वाले चेककर धोखा दिया है। ऐसे सरकार के खिलाफ हमे कितने मामले दर्ज करना चाहिए।

हाथों में छाले...

इसी गांव के काजू के कारखानों में काम करने वाली महिलाएं मिली। उनकी मुश्किलों को करीबी से देखने का मौका मिला। इन महिलाओं की हाथों में छाले पड़ गये। दिन भर खड़े रहकर काम करे तो 200 रुपये मजदूरी दी जाती है। महिलाओं ने दुख के साथ कहा कि इन पैसों में परिवार कैसे चलाये? इन महिलाओं की मुश्किलें सुनकर बहुत दुख हुआ। साथ ही इनके लिए कुछ करने के मेरे संकल्प को और बल मिला है।

कोवा...

मंदसा गांव दूध कोवा के लिए प्रसिद्ध है। आज इसी गांव से मेरी पदयात्रा चली। स्वच्छ दूध से बना कोवा के कारण इस गांव नाम मंदसा पड़ा है। आज नये साल में प्रदेश के सभी लोगों की मुश्किलें दूर हो। धोखेबाज सरकार से मुक्ति मिले। सभी लोग सुख और शांति से जीवन बिताये। यही मेरी कामना है।

मुख्यमंत्री से मेरा एक सवाल...

पिताजी ने 12.5 वैट को 4 प्रतिशत कम किया। साथ ही हर्टिकल्चर सब्सिडी को 40 प्रतिशत बढ़ाया। इसके अलावा 25 पैसे ब्याज पर ऋण दिया। इन कारखानों के विकास के लिए क्या आपने एक भी अच्छा काम किया है?

-वाईएस जगन