323वें दिन की पदयात्रा डायरी: जनहित से ज्यादा सियासी फायदे को तरजीह देते हैं चंद्रबाबू नायडू 

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अब तक 3470.3 किलोमीटर पदयात्रा

17.12.2018, सोमवार

लिंगालावलस, श्रीकाकुलम जिला

आज बहन शर्मिला का जन्म दिवस है। पिछले दिनों में शर्मिला ने जिस मार्ग से पदयात्रा की उसी रास्ते से मेरी भी पदयात्रा जारी रहना खास बात है। आज टेक्कलीपाडु और लिंगालवलसा किसान आकर मुझसे मिले और पिताजी को याद किया। किसानों ने बताया कि आज उनके गांवों को सिंचाई जल मिल रहा है तो वो पिताजी द्वारा बनाये गये टेक्कलीपाडु और लिंगालवसा के लिफ्ट सिंचाई परियोजना के आशीर्वाद से। ऐसा लगा सिंचाई की आवश्यकता पूरी करे तो किसान नेताओं को अपने दिलों में बिठा लेते हैं।

वेटर्नरी पॉलिटेक्निक उत्तीर्ण युवक आकर मुझसे मिले। यवकों ने बताया कि प्रदेश में 1200 से अधिक पद खाली है। मगर सरकार उन पदों की भर्ती नहीं कर रही है। उत्तीर्ण युवकों ने आगे बताया, "एग्रीकल्चर डिप्लोमा कर चुके छात्रों को एजी बीएससी करने के लिए अनुमति दे रहे है। पॉलिटेक्निक कर चुके छात्रों को इंजीनियरिंग डिग्री कर रहे हैं। मगर वेटर्नी डिप्लोमा कर चुके हमें मात्र वेटर्नरी साइंस डिग्री करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। एक ओर नौकरियों की अपेक्षाएं नहीं है। दूसरी ओर हम आगे की पढ़ाई भी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे हालत में हमारी डिप्लोमा किस काम की है?" इतना ही नहीं अधिक फीस वाले सरकारी कॉलेजों की भरमार होती जा रही है। सोचने की बात है कि ये सभी निजी कॉलेज टीडीपी नेताओं की हैं।

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बेरोजगार

कल मिल चुके कृषि छात्र हो या आज मिले वेटर्नरी छात्र हो, सब की एक ही परेशानी है। वो है नौकर नहीं मिलना। इन साड़े चार सालों में हजारों युवक पढ़ाई पूरी करके बाहर आ गये है। मगर एक युवक को भी नौकरी नहीं मिली है। मगर सत्तापक्ष के नेताओं की लाखों रुपये वसूल करने वाले निजी कॉलेज मात्र आ रहे हैं। यह अत्यंत चिंता का विषय है। शिक्षा को केवल व्यापार की नजरों से देखने वाले शासन में बेरोजगार की समस्या बढ़ेगी नहीं तो और क्या होगी?

पशु बाजार

नारायणवलसा गांव के रास्ते में पशु बाजार को देखा। गांव वालों ने बताया कि इस जिले में यह सबसे बड़े पशु बाजार है। इस बाजार का एक सौ साल से अधिक का इतिहास है। एक जमाने में यह बाजार पशु संपदा के लिये प्रसिद्ध रहा है। आज वह हालत नहीं है। उन दिनों किसान इस बाजार में आकर पशु को खरीदते थे। आज मात्र पशुओं को बेचने का केंद्र बन गया है। इस प्रकार बेचे जा रहे पशु को बुचड़खाने की ओर जा रहे हैं। यह सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ। मुझे बताया गया कि इन पशु उत्तर भारत और बांग्लादेश को आयात किया जा रहा है। यह सब सत्तापक्ष के नेताओं की देखरेख में हो रहा है। पहले ही किसानों को कृषि एक भार गया है। फसल को समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है। इसके कारण किसान पशुओं को बेचने पर मजबूर है। दूसरी ओर दलालों की लूट की बात सुनकर बहुत दुख हुआ।

पदयात्रा

आज सुबह से ही पेथाई तूफान के कारण बह रही ठंडी हवा और कभी-कभी हो रही बारिश में ही मेरी पदयात्रा जारी रही है। पिछली बार आये तूफान के दौरान सरकार द्वारा अपनाई गई रवैये की याद आई तो थोड़ी परेशानी महसूस हुई। पिछली बार की विफलता को देखकर इस बार तो भी सहयता के लिए आवश्यक कदम उठाया गया तो अच्छा होगा। दोपहर से पेथाई तूफान बारिश के कारण लोगों को मुश्कलें होगी कहकर पदयात्रा को बीच में ही स्थगित करना पड़ा।

मुख्यमंत्री से मेरा एक सवाल...

तूफान के कारण लोग जान हथेली पर लेकर भय में जीने पर मजबू हो गये। ऐसे हालत में लोगों की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाए आपको कांग्रेस मुख्यमंत्रियों की शपथ विधि कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए जाना क्या सही है? प्रदेश के लोगों से भी बढ़कर क्या आपको राजनीतिक लाभ मुख्य है?

-वाईएस जगन

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