25.11.2018, रविवार

नडिमिकेल्ला, श्रीकाकुलम जिला

मेरी विजयनगरम जिले में पदयात्रा समाप्त हुई। इसके साथ ही 12 जिलों में प्रजा संकल्प यात्रा पूरी हो गई। विजयनगरम की पदयात्रा ने अनेक अनुभव और अनुभूतियों को छोडा है। इसी जिले में 3,000 पदयात्रा किलोमीटर और 300 दिन पूरे हुए है। पिछले साल 6 नवंबर को इडुपुलपाया से पदयात्रा शुरू की थी। इसी जिले में इस साल 6 नवंबर को पदयात्रा ने एक साल पूरा किया।

इतना नहीं सत्ता के लिए एक विपक्ष के नेता को भौतिक रूप से समाप्त करने का राजनीतिक षड्यंत्र भी इसी जिले में देखने को मिला है। यह सब एक ओर है तो दूसरी ओर सबसे पिछड़े जिले के लोगों ने जो प्यार दिखाया है, उस प्यार को कभी नहीं भूल पाऊंगा। लोगों में मेरे पिता के प्रति जो प्यार है वह कदम-कदम पर देखने को मिला।

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उदासीनता

इस जिले के लोगों ने सहकारिता शूगर फैक्ट्री को सहायता करने, सिंचाई परियोजनाओं को निर्मित किये जाने, सभी का कल्याण किये जाने के कारण पिताजी को कदम-कदम पर याद किया गया। अब फिर वर्ष 2003 की अकाल स्थिति आई है। एक जमाने में इस जिले की रीड़ की हड्डी समझे जाने वाले जूट मिल, शूगर फैक्ट्री और फेर्रा अलाय व अन्य कारखाने दीन अवस्था में है। इन फैक्ट्रियों में काम करने वाले अब घुट-घुटकर जी रहे है। जिन परियोजनाओं के काम अधूरे थे, वह अब भी वैसे ही हालत में है। सरकार की उदासीनता स्पष्ट झलक रही है। कदम-कदम पर एग्रीगोल्ड के पीड़ित मिले। विष ज्वर से प्रभावित लोग मिले। सरकार की विफलताओं को बताया। 15 साल पहले के हालत एक बार फिर दिखाई दे रहे हैं।

तितली पीड़ित

गिरिशिखर गांव के लोग मिले। तितली तूफान के कारण उनके मकान पूरी तरह से ध्वस्त हो गये। तूफान के दौरान बंद हुए आदिवासी छात्रावास में स्थापित राहत शिविर में ठहरे थे। लोगों ने बताया कि उस गांव के छात्रावास को बंद किये जाने का श्रेय भी बाबू को जाता है। गरुगुबिल्ली मंडल परिधि के अनेक गांवों के युवक मिले। युवकों ने बताया कि किसी भी गांव ग्रंथालय नहीं है। मगर सभी कर के साथ ग्रंथालय कर भी वसूल किया जा रहा है।

दिव्यांग

तुलसीवलसा गांव निवासी उषारानी की दयनीय हालत में जी रही है। यह दिव्यांग बहन बिना किसी सहायता के एक कदम भी नहीं चल सकती। उसका पिता शराब का आदी हो चुका है। साथ ही बीमारी है। वह कुछ भी काम करने की स्थिति में नहीं है। उसकी मां रोज मजदूरी करके पांच सदस्यों वाले परिवार को पालपोस रही है। उषारानी ने मां की मुश्किलों को देखकर कुछ मदद करने ठान ली। उसने सोचा कि एससी कार्पोरेशन से लोन लेकर किराणा दुकान लगाया जाए। उसने रोते हुए बताया कि पिछले चार सालों से लोन के लिए आवेदन किया। अधिकारियों से मिलकर लोन मंजूर कराने का आग्रह भी किया। मगर किसी ने उसकी बात नहीं सुनी है। दिव्यांग उषारानी लोन की हकदार है। मगर अधिकारियों को उस पर दया नहीं आई। दूसरी ओर मनमानी ढंग से लूटने वाले नेताओं को बिना किसी योग्यता को हजारों करोड़ों रुपये बैंक कर्ज मंजूर कर रही है। यह सोचने वाली बात है।

श्रीकाकुलम

आज श्रीकाकुलम जिले में कदम रखा हूं। 15 साल पहले पिताजी ने, पांच पहले मेरी बहन शर्मिला ने इस जिले में पदयात्रा की है। इसी जिले के वीरघट्टम मंडल से मेरी पदयात्रा शुरू हुई है। इस जिले का महान इतिहास है। यहां पर एक किला भी है। उसे आंदोलन का किला कहा जाता है। श्रीकाकुलम जिले के लोगों ने बहुत ही प्यार से मेरा स्वागत किया।

मुख्यमंत्री से मेरा एक सवाल...

आपने ड्वाक्रा महिला संघों की बहनों के साथ धोखा दिया है। बिना किसी गलती के ड्वाक्रा संघों की महिलाओं को अदालतों की सीढ़ी चढ़ा रहे हैं। फिर आपका अत्यंत करीबी बेनामी। जिसे सभी लोग अच्छी तरह से जानते है। आपने उसे केंद्रीय मंत्री भी बनाया है। उसने बैंकों से लगभग 6 हजार करोड़ रुपये लूट लिया है। क्या ऐसे व्यक्ति के बारे में क्या आपके पास कोई जवाब है?

-वाईएस जगन