10.10.2018, बुधवार

गणपतिनगरम, विजयनगरम जिला

कल तक जो धूप और गर्मी थी, वह आज नहीं दिखाई नहीं दी। तितली तूफान के चलते मौसम ठंडा हुआ है। मगर लोगों के दिल तकलीफों की गर्मी से धधक ही रहे हैं। लोगों को उनके दुख और आंसुओं में से उभरे नहीं दे रही है।

वयोवृद्ध

आज अनेक वयोवृद्ध मिले। बराबर उनकी आंखों की रोशनी नहीं है। ज्यादातर वृद्धों की कमर झूकी हुई थी। ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे। फिर भी मुझसे मिलने आये और अपनी दुखभरी गाथाएं सुनाई। एक साल की वृद्ध मां ने रोते हुए बताया, "बच्चे नहीं देख रहे हैं। पेंशन भी नहीं मिल रहा है।" यह सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ। इस उम्र में उन्हें किसी का सहारा नहीं है। देखने वाले भी नहीं है। इस तरह की जिंदगी जीने वाले अनेक हैं। ऐसे लोगों को कम से कम पेंशन और राशन चावल मिल जाता तो उन्हें थोड़ी सी राहत मिल जाती।

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किसान

लिंगालावलसा के पास कुछ किसान मिले। किसानों ने बताया कि तोटापल्ली नहर का काम पूरा नहीं होने के कारण सिंचाई जल नहीं मिल रहा है। बचा हुआ काम पूरा नहीं कर पाना सरकार की उदासीनता रही है। यह उदासीनता ही किसानों के लिए अभिशाप बन गया है।

कर्जा

किसान बंगारू नायुडू ने बताया कि उसने पिछले बार चुनाव से पहले 53 हजार रुपए फसल के लिए कर्जा लिया था। मगर अब तक उसका कर्जा माफ नहीं हुआ है। चंद्रबाबू के कर्जा माफ करने की बात पर उसने भरोसा किया। अब उस कर्ज का ब्याज बेहिसाब बढ़ गया। इसके बाद आये हुद-हुद तूफान ने उसकी कमर तोड़कर ही रख दी। पांच एकड़ की मक्का फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। इसका मुआवजा भी नहीं मिला। यह किसान विरोधी शासन नहीं तो और क्या है? यह ग्रामीणस्तर की हालत है। मगर मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायुडू पुरस्कार लेकर प्रचार करने में आगे रहते है।

येडोंपुलागेड्डा नदी

रास्ते में येडोंपुलागेड्डा नदी को देखकर बहुत दुख हुआ। इस नदी में कहीं पर भी रेती दिखाई नहीं दे रही है। पूरी नदी गायब हो गई है। नदी में पूरे पत्थरे दिखाये दे रही है। रेत माफिया दिन-रात खुदवाई कर रहे हैं। इसके चलते भूगर्भ जलस्तर घटता गया। जल प्रवाह नहीं है। पूरी नदी रिगस्तान बन गई है। फार्मासिस्टों ने बताया कि रोजगार नहीं मिलने के कारण उनकी जिंदगी बर्बाद हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि वाईएसआर के शासनकाल में नियुक्त किया गया कहकर उन्हें अब नौकरियों में से निकाले जाने का षड्यंत्रा रचा जा रहा है।

आश्वासन

गणपतिनगरम में पतली गलियां, सड़कों पर खड्‍डे, ड्रेनिजों की खस्ता हालत और गंदगी के बारे में अनेक शिकायतें मिली थी। मगर आज शाम उस भयानक हालात को प्रत्यक्ष देख चुका हूं। बारिश हुई तो गंदा पानी उफान पर बहने लगता है। बीमारियों का तांडव मचा रहता है। चुनाव के दौरान आये नेताओं ने आश्वासन दिया था कि सत्ता में आते ही बायपास रोड का निर्माण और ड्रेनिज व्यवस्था ठीक किया जाएगा। मगर अब तक इस ओर किसी भी नेता ने ध्यान नहीं दिया है। एक बार फिर चुनाव आ रहे है। नेताओं की आश्वासनों के लिए एक बार फिर बलि होने को यहां के लोग तैयार है।

मुख्यमंत्री से मेरा एक सवाल...

आप सत्ता में आने से पहले तोटपल्ली परियोजना का काम 90 प्रतिशत पूरा नहीं हुआ था क्या यह सच नहीं है? बाकी बचा हुआ काम इन साढ़े चार सालों में भी नहीं करने के पीछे का क्या उद्देश्य है? इस परियोजना के तहत 1.35 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई जल दिया जाना था। मगर 80 हजार एकड़ को सिंचाई जल नहीं दिया जा रहा है। क्या यह पाप आपका नहीं है?

-वाईएस जगन