202वें दिन की डायरी : ‘झूठे आश्वासनों से गुमराह करने वाले नेता कभी महान नहीं हो सकते’ 

डिजाइन फोटो  - Sakshi Samachar

01.07.2018, रविवार

कोमगिरी, पूर्वी गोदावरी जिला

काले बादलों के छट जाने के बाद भी चंद्रबाबू नायडू के शासन को लेकर यहां के लोगों का गुस्सा दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। बारिश की परवाह किए बिना भीगते हुए अपनी समस्याएं सुनाने लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। मुम्मिडीवरम में शुरू हुई आज की पदयात्रा वृद्ध गौतमी पर बने राघवेंद्र पुल के रास्ते गुजरी। पदयात्रा शुरू होने के कुछ ही देर बाद बारिश की बूंदें पड़ने लगीं। मेरे साथ यात्रा में शामिल सभी लोग भीग गए।

आश्चर्य की बात ये रही कि बारिश के बावजूद यात्रा में शामिल लोगों की संख्या कतई नहीं घटी। आरती करने पहुंचने वाली बहनें, सीटी बजाने वाले युवा, आखिर में अपनी परेशानियां लेकर पहुंचने वाले वृद्ध दंपत्ति भी बारिश के पानी में भीगते सड़क किनारे मेरे आने का इंतजार करते दिखे। ये देख मुझे लगा कि बारिश से ज्यादा उन लोगों का विश्वास और प्यार ने मुझे और ज्यादा भिगो दिया है। मुझे लगा कि लोगों से मिले आदर और सम्मान का मुझे आभार व्यक्त करना चाहिए।

राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस पर याद किए गए जेसी राय

चिकित्सा क्षेत्र का मान बढ़ाने वाले और राजनीतिक क्षेत्र में अपना लोहा मना चुके भारतरत्न डॉक्टर बी.सी. रॉय की जयंती को राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस के रूप में मनाना हमसबके लिए गर्व की बात है। उन्हीं की तर्ज पर डॉक्टरी से अपना करियर की शुरूआत कर लोकप्रिया नेता बनने के साथ ही करोड़ों लोगों के दिलों में बसे पिताजी को मैंने एक बार याद किया।

आज डॉक्टर्स डे पर कुछ लोग डाक्टरी के कारण पिताजी के साथ उनके रिश्तों को याद करते दिखें तो कुछ देश के लिए आदर्श साबित हुईं स्वास्थ्य संबंधी योजनाएं और पिताजी की सेवाओं को याद कहते दिखे। डॉक्टर्स डे पर लोगों को शुभकामनाएं देने से मैंने खुद को गर्वान्वित महसूस किया।

खुद के लिये प्रयास करने वाला सामान्य व्यक्त होता है, जबकि दूसरों के लिये मेहनत करने वाले को महा पुरुष कहा जाता है। ऐसे महापुरुषों को लोग सदैव याद करते हैं। सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण कर कोनसीमा की रूपरेखा बदलने वाले सर कॉटन को अपने दिलों में रखकर पूजते हैं यहां के लोग। वृद्ध गौतमी नदी पर पुल का निर्माण करने के द्वारा आईपोलवरम को बहारी दुनिया से जोड़ने के लिए भरसक प्रयास कर चुके जिलाधीश राघवेंद्र राव का नाम इस पुल को रखा गया है। आज लोग, अधिकारी, सरकार सभी आपसी सहयोग से बहुत कम समय में वृद्ध गौतमी पर बने पुल ने इतिहास रचा था। आज पिताजी का नाम फिर से लोगों की जुबान पर न आए, इसके लिए करीब 30 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुके जीमूलपोलम-गोल्लगरुवु पुल को मौजूदा शासकों ने अभी तक पूरा नहीं किया है।

मछुआरों को नहीं मिल रहा सही दाम

गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कार्पोरेशन की ड्रिलिंग के कारण नुकसान झेलने वाले मछुआरों ने बताया कि छह महीने के अथक संघर्ष कर उन्होंने मुआवजा हासिल किया था, लेकिन बाबू सरकार के आने के बाद से उन्हें मुआवजा नहीं मिल रहा है और इसकी मुख्य वजह इन शासकों की लालच की राजनीति है। सत्तारूढ़ दल के नेता निजी स्वार्थ के लिये हजारों मत्स्य परिवारों के हितों को तेल कंपनी के प्रबंधनों के पास गिरवी रख दिया है।

झींगों के निर्यातक सिंडीकेट बनकार हाथ आई फसलों के दाम अचानक घटाते हुए मछुआरों की रोजीरोटी छीन रहे हैं। दोपहर में मिले एक्वा किसान और संकट से गुजर रहे एक्वा किसानों की मदद के लिए प्रति यूनिट बिजली 1.50 रुपये देने के मेरे आश्वासन के तुरंत बाद चार साल तक चुप्पी साधे रहे मुख्यमंत्री चंद्रबाबू ने 2 रुपये प्रति यूनिट बिजली देने की घोषणा की। परंतु अभी भी पुराने दर के आधार पर ही बिजली के बिल मिल रहे हैं। इसके अलावा बैक बिलिंग और एडिशनल चार्ज के नाम पर बिजली के बिल थमाते हुए एक तरह से मछुआरों के कमर तोड़ने पर तुली है बाबू सरकार।

झींगों के दाम गिर जाने से परेशान मछुआरों ने बाबू से झींगों के दाम बढ़ाने की अपील की थी और बाबू ने अतिरिक्त 30 रुपये बढ़ाने का आदेश भी दिया था। इसके बावजूद झींगों के दाम में कोई फर्क नहीं आया और उन्हें कम दाम पर ही अपने झींगे बेचने पड़ रहे हैं।

लोगों का जीवनस्तर बेहतर करने के बजाय केवल राजनीतिक हितों के लिए चुनाव के वक्त फर्जी आश्वासन देकर लोगों को गुमराह करने वाले नेता कभी लोकप्रिय नहीं बन सकते।

मुख्यमंत्रीजी मेरा एक सवाल... मछुआरों के बच्चों को विशेष रेसिडेंशियल स्कूल, मछुआरों को कोब्सिडी पर संस्थागत ऋण सुविधा, 50 प्रतिशत सब्सिडी पर डीजल, तटीय क्षेत्र में जमीन आवंटन, मछुआरों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने, केजी से पीजी तक मुफ्त पढ़ाई.... इस तरह के कई आश्वासन आपके घोषणा पत्र में शामिल थे।

अगले कुछ ही महीनों में अपका कार्यकाल खत्म होने को है। क्या आपने अभी तक एक भी आश्वासन को पूरा किया है ? किसी आश्वासन को पूरा करना तो दूर, तेल कंपनियों से मछुआरों के परिवारों को मिलने वाले हितों को भी क्या आपने अपने निजी स्वार्थ के लिए गिरवी नहीं रखा है ?

वाईएस जगन

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