आदिवासियों के प्रति टीडीपी सरकार का उदासीन रवैया क्यों है? आखिर यह भेदभाव क्यों ? साढ़े चार साल तक बिना आदिवासी नेता का प्रतिनिधित्व नहीं रहने वाला मंत्रिमंडल शायद ही राज्य के इतिहास में होगा? इतनी बड़ी उपलब्धि चंद्रबाबू नायडू की ही हो सकती है।