एक साथ लोकसभा-विधानसभा चुनाव के प्रस्ताव से तानाशाही की बू आ रही है : आप

अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो) - Sakshi Samachar

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के विचार को खारिज कर दिया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने रविवार को कहा कि इस तरह की प्रणाली से भारत एक 'प्रबंधित लोकतंत्र' (मैनेज्ड डेमोक्रेसी) में बदल जाएगा।

विधि आयोग के समक्ष पेश हुए आप नेता आशीष खेतान ने अपनी पार्टी के विचारों को बैठक में रखने के बाद कहा, "हम एक राष्ट्र, एक चुनाव के विचार के खिलाफ हैं, क्योंकि यह भारत के संघीय लोकतंत्र को प्रबंधित लोकतंत्र में बदल देगा।"

उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने के लिए 'भारतीय संविधान को विकृत कर पूरी तरीके से फिर से लिखा जाएगा।'

खेतान ने कहा, "जो भी बचेगा वह लोकतंत्र का दिखावा होगा। यह इस देश के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को कम करेगा। यह लोगों के वोट देने के आधिकार या सरकार को बेदखल करने के अधिकार को छीन लेगा। इस व्यवस्था से बल और धन शक्ति का प्रभुत्व होगा।"

विधि आयोग की बैठक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नदारद होने पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यह अजीब है कि जिस पार्टी ने विचार दिया वह खुद ही इस चर्चा से गायब है।

आप नेता ने जोर देकर कहा कि कैसे एक साथ चुनाव कराने से भारत का 'संपन्न, खुला और पारदर्शी लोकतंत्र', 'स्तालिनवादी लोकतंत्र' में बदल जाएगा, जहां लोगों को पांच साल में एक बार मतदान करने का अधिकार मिलेगा और अगर चयनित सरकार प्रभावित करने में विफल रहती है तो लोगों को सुधार का मौका नहीं मिलेगा।

खेतान ने तर्क देते हुए कहा, "आप लोगों से आत्म सुधार के अधिकार को छीन रहे हैं। अक्सर इस देश में हमने देखा है कि लोग संसदीय चुनावों में अलग तरीके से वोट करते हैं और छह महीने गुजरने के बाद लोग राज्यों के चुनावों में अलग तरीके से वोट देते हैं।" उन्होंने कहा, "इस प्रस्ताव में मूलरूप से तानाशाही मानसिकता की बू आ रही है।"

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