श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया है। इस्तीफा देने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमने यहां की जनता को मुश्किल से निकालने के लिए बीजेपी से हाथ मिलाया था।

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में ताकत की राजनीति नहीं चल सकती है। कश्मीर में सख्ती की पॉलिसी नहीं चल सकती है। हमारी कोशिशों से ही घाटी में सीज फायर हुआ। पीडीपी ने 11 हजार युवाओं के ऊपर लगे केस वापस कराए। लेकिन भाजपा के आने से यहां के मुस्लिमों में डर था।

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर में बातचीत बहुत जरूरी है। फिर चाहे पाकिस्तान से ही बात करनी क्यों न पड़े। उन्होंने कहा कि हमने धारा 370 को लेकर लोगों के दिल से डर दूर किया।

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बता दें एक चकित करने वाले घटनाक्रम के तहत भाजपा ने राज्य सरकार में अपने सभी मंत्रियों को नई दिल्ली बुलाया और उसके बाद उसने घोषणा की कि पार्टी ने पीडीपी-भाजपा गठबंधन से बाहर होने का निर्णय लिया है। भाजपा नेता राम माधव ने कहा कि भाजपा के लिए सरकार में बने रहना कठिन हो गया था। उन्होंने कहा, "इसलिए हमने सरकार से अपना समर्थन वापस लेने का फैसला किया।"

उन्होंने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में सुरक्षा-व्यवस्था इतनी बुरी हो गई थी कि देश की अखंडता को ध्यान में रखते हुए हमें समर्थन खत्म करने का फैसला लेना पड़ा। वरिष्ठ भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता ने कहा कि भाजपा के सभी मंत्रियों का इस्तीफा मुख्यमंत्री को भेज दिया गया है।

गुप्ता ने कहा, "राज्यपाल को निर्णय के बारे में सूचित किया जा रहा है और अब राज्य में अगले संवैधानिक कदम पर निर्णय वही लेंगे।" 2014 के विधानसभा चुनाव बाद भाजपा से समर्थन मिलने के बाद पीडीपी ने गठबंधन सरकार बनाया था।