लखनऊ : लोकसभा के उपचुनाव में दो सीटों पर जीत और राज्यसभा के चुनाव में नजदीकी अंतर से एक सीट गंवाने के बाद सपा-बसपा के नेता उत्तर प्रदेश विधानपरिषद की 13 सीटों के चुनाव के लिए नई रणनीति बनाने की कवायद में जुट गए हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा के अलावा विपक्ष के केवल दो कैंडीडेट जीत सकते हैं ऐसे में सपा-बसपा एक एक कैंडीडेट उतार सकती है।

वहीं अखिलेश यादव को लेकर अभी दुविधा बरकरार है कि वे विधान परिषद में फिर से जाएंगे या लोकसभा चुनाव में उतरेंगे। पार्टी के सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक अखिलेश यादव सपा के प्रदेश नरेश उत्तम या वरिष्ठ नेता राजेंद्र चौधरी को विधान परिषद में भेज सकते हैं। वहीं बसपा के राज्यसभा में हार चुके उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर या किसी बसपा के कद्दावर नेता को टिकट देने के मूड में है।

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एक कैंडीडेट को चाहिए 29 वोट

यूपी बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि एक प्रत्याशी को जीतने के लिए 29 पहली प्राथमिकता के वोट चाहिए होंगे। विधानसभा में गणित के आधार पर बीजेपी और उसके सहयोगी दल मौजूदा 13 सीटों में से 11 सीटें आसानी से जीत सकते हैं। इसके बाद भी उसके पास पांच अतिरिक्त वोट बच रहे हैं। वहीं समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता सुनील सिंह साजन के मुताबिक एसपी-बीएसपी गठबंधन आसानी से दो सीटें जीत जाएगा।

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कहा जा रहा है कि उत्त्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आगामी 5 मई को विधान परिषद से रिटायर हो रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। विधानपरिषद की 12 सीटें 5 मई को खाली हो रही हैं, जबकि एक सीट पहले से ही खाली है। ऐसी स्थिति में कुल 13 सीटों पर चुनाव होना है।

ये हैं रिटायर हो रहे विधान परिषद सदस्य

जो सदस्य विधान परिषद से रिटायर होने वाले हैं उनमें बीजेपी से महेंद्र कुमार सिंह और मोहसिन रजा, समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव, नरेश उत्तम, राजेंद्र चौधरी, मधु गुप्ता, रामसकल गुर्जर, विजय यादव, उमर अली खान, बहुजन समाज पार्टी से विजय प्रताप, सुनील कुमार चित्तौड़ तथा राष्ट्रीय लोकदल से चौधरी मुश्ताक शामिल हैं। वहीं खाली सीट अंबिका चौधरी की है, जिन्होंने सपा से बसपा में जाने के बाद इस्तीफा दे दिया था।