नई दिल्ली : अलग-अलग मुद्दों पर हंगामे के कारण संसद के सदनों की कार्यवाही नहीं चलने और लगातार गतिरोध बने रहने पर अफसोस जाहिर करते हुए राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने सदन में कहा कि ‘‘यही स्थिति रही तो संसद मजाक का विषय बन जाएगी।''

उच्च सदन आज भी हंगामे और गतिरोध का गवाह बना और बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। सोमवार की सुबह, उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति नायडू ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके बाद उन्होंने शून्यकाल शुरू करते हुए सदस्यों से लोक महत्व से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए कहा।

इसी बीच अन्नाद्रमुक, द्रमुक, तेदेपा आदि के सदस्य आसन के समक्ष आ गए। अन्नाद्रमुक और द्रमुक के सदस्य जहां कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग कर रहे थे वहीं तेदेपा के सदस्य कड़प्पा में स्टील प्लांट लगाने की मांग कर रहे थे। वाईएसआर कांग्रेस के विजय साई रेड्डी और कांग्रेस सदस्य केवीपी रामचंद्र राव आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे थे।

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सभापति ने हंगामा कर रहे सदस्यों से सदन की कार्यवाही चलने देने का अनुरोध करते हुए कहा ‘‘ऐसा मत कीजिये, आप जो कर रहे हैं, वह सब लोग देख रहे हैं। इसी तरह की स्थिति रहने पर संसद मजाक का विषय बन जाएगी। ऐसा मत कीजिये। इस तरह कार्यवाही हर दिन बाधित करना संसद के, लोकतंत्र के और देश के हित में नहीं है।''

नायडू ने कहा ‘‘मैं सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हूं। सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा कराने के लिए तैयार है। फिर इस तरह कार्यवाही बाधित करने का कारण समझ नहीं आता।''

सभापति ने कहा ‘‘मैं आप सबसे अपील करता हूं कि अपने स्थानों पर जाएं और सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से चलने दें। अब तक हंगामे की वजह से कोई कामकाज नहीं हो पाया है। आखिर कब तक ऐसे चलेगा। लोग तो अब आलोचना भी करने लगे हैं।''

बहरहाल, सदन में व्यवस्था न बनते देख उन्होंने 11 बजकर करीब दस मिनट के अंदर ही बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया। उच्च सदन में आज भी शून्यकाल और प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ़ गए। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में अब तक उच्च सदन में एक भी दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो पाए हैं और न ही कोई कामकाज हो पाया है।