हैदराबाद : एक समय में देश के सर्वश्रेष्ठ और सबसे बड़े स्टेडियम के रूप में मशहूर गच्चीबावली स्टेडियम की स्थिति आज कुछ अलग है। स्टेडियम में देश के अंतर्राष्ट्रीय एथलीट्स और खिलाड़ियों को तैयार किया जाता है। यही वजह है कि दुती चंद जैसे दिग्गज एथलीट भी इसी स्टेडियम में प्रैक्टिस करना पसंद करती हैं। यही नहीं, एफ्रो एशियाई गेम्स में यहां खेलने वाले विदेशी खिलाड़ी तक इस स्टेडियम और यहां के ट्रैक की तारीफ कर चुके हैं।

अब समय के साथ स्टेडियम की तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है। खराब ट्रैक की वजह से अगले कुछ ही महीनों में शुरू होने जा रहे टोकियो ओलंपिक में भारत की तरफ से शिरकत लेने जा रही दुती चंद को बिना ट्रेनिंग के वापस भुवनेश्वर लौटना पड़ा है। पूरे तेलंगाना में एथलीट्स की ट्रेनिंग के लिए केवल एक ही सिंथेटिक ट्रैक है और वह गच्चीबावली स्टेडियम में है। इस बार यहां के ट्रैक की हालत ठीक नहीं होने और जगह-जगह उबड़-खबड़ जैसी स्थिति होने से यहां कोई भी एथलीट्स ट्रेनिंग के लिए तैयार नहीं है।

ट्रैक की दुर्दशा के बारे में जब हमने एथलीट्स कोच नागपुरी रमेश से पूछा तो उन्होंने ट्रैक की बदहाली के कई कारण बताए। मुख्य रूप से कोई भी सिंथेटिक ट्रैक 8-10 साल में बदल दिया जाता है, लेकिन गच्चीबावली स्टेडियम में वर्ष 2002 में बिछाया गया ट्रैक यानि पिछले 17 वर्षों से नहीं बदला गया।

उन्होंने बताया कि स्टेडियम में कुल दो ट्रैक हैं, जिनमें एक मेन ट्रैक और दूसरा वार्मअप ट्रैक है। कोच रमेश ने बताया कि उनका काम एथलीट्स को ट्रेन कर चैंपियन तैयार करना होता है और इसके लिए बेहतर ट्रैक की जरूरत होती है। इससे पहले देश की नंबर एक धावक दुती चंद भी यहां ट्रेनिंग कर कई सफलताएं हासिल कर चुकी हैं। इसी वजह से टोकियो ओलंपिक के मद्देनजर दुती ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद आई थी, लेकिन यहां की ट्रैक की बदहाली देखकर वह इस आशंका से वापस लौट गई कि ओलंपिक के ठीक पहले इस तरह के ट्रैक पर ट्रेनिंग करने से उनके पैर और मांसपेशियों में मोच आने का खतरा है।

कोच रमेश ने कहा कि हैदराबाद फुटबॉल क्लब भी स्टेडियम में प्रैक्टिस करने के अलावा मैच चलते हैं। यही नहीं, हर साल आईएसएल के मैच भी खेले जाते हैं और ये मैच महीनों तक चलते हैं। ऐसे में उन्हें एथलीट्स को विश्वस्तरीय चैंपियन्स तैयार करने में मुश्किल हो रही है। उन्होंने बताया कि एक ट्रैक हैदराबाद फूटबाल क्लब और वार्मअप ट्रैक पर वह खिलाड़ियों को ट्रेन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अब गच्चीबावली स्टेडियम और आउटर रिंग रोड के करीब इंटरनेशनल स्कूल तथा गोपीचंद एकादमी में सिंथेटिक ट्रैक बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एथलीट्स को ट्रेन करने के मामले में गोपीचंद अकादमी से उन्हें अकसर सपोर्ट मिलता रहा है और इस मामले में गोपीचंद अकादमी काफी सपोर्टिव है। उन्होंने कहा कि अब खिलाड़ियों को इंटरनेशनल स्कूल और गोपीचंद एकादमी में ट्रेन किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि स्टेडियम के रखरखाव के लिए राजस्व बढ़ाने की इरादे से स्टेडियम को म्यूजिक कंसर्ट जैसे कार्यक्रमों के लिए दिए जा रहे हैं। इससे भी न केवल स्टेडियम बल्कि उसमें बने सिंथेटिक ट्रैक भी खराब हो जाता है। उन्होंने कहा कि स्टेडियम में म्यूजिक कंसर्ट सहित अन्य फिल्मी समारोह जैसे कार्यक्रमों के आयोजन से ट्रैक खराब होता है।

उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के लिए स्टेडियम में ट्रैक पर बड़े-बड़े वाहन, क्रेन आदि के चलने से ट्रैक बिगड़ जाता है। यही नहीं, पार्टियों में शराब, सिगरेट आदि का सेवन किया जाता है, जोकि स्टेडियम में ट्रेनिंग करने वाले एथलीट्स पर प्रभाव डालते हैं। उन्होंने कहा कि एनएएस पटियाला स्टेडियम के भीतर सिगरेट तक पीने की अनुमति नहीं है।

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उन्होंने कहा कि स्टेडियम के लिए राजस्व जुटाने के और भी तरीके हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आउटर रिंग रोड के आस-पास 150 से अधिक इंटरनेशनल स्कूल हैं और इन स्कूलों के बच्चों को ट्रेनिंग के लिए स्टेडियम किराए पर दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वह प्रति दिन सुबह 6 से 10 और शाम 4 बजे के बाद ट्रेनिंग कराते हैं। ऐसे में स्टेडियम सुबह 10 से शाम 4 बजे तक विभिन्न इंटरनेशनल स्कूल्स को बच्चों के ट्रेनिंग के लिए दिया जा सकता है।

कोच रमेश ने बताया कि उन्होंने स्टेडियम में ट्रैक बदलने के लिए नेशनल स्टोर्ट्स एथारिटी और राज्य सरकार को भी पत्र लिख चुके हैं। हालांकि अभी किसी प्रकार की सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।