नई दिल्ली : भारत की स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधु ने मंगलवार को यहां कहा कि विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद प्रतिद्वंद्वियों की नजरें अब उन पर हैं और इसलिए अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन में दबदबा बनाए रखने के लिए उन्हें अपने खेल में लगातार नयापन लाना होगा।

ओलंपिक रजत पदक विजेता सिंधु पिछले महीने स्विट्जरलैंड के बासेल में जापान की नोजोमी ओकुहारा को एकतरफा फाइनल में 21-7 21-7 से हराकर विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनी।

भविष्य की चुनौतियों के बारे में पूछने पर विश्व चैंपियनशिप में दो रजत और दो कांस्य पदक भी जीत चुकी सिंधु ने कहा, ‘‘अब दबाव और जिम्मेदारी अधिक होगी। मुझे पता है कि विश्व चैंपियनशिप के बाद सभी की नजरें मेरे खेल पर होंगी।''

सिंधु ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुझे अब बेहद कड़ी मेहनत करनी होगी और कुछ चीजों को बदलना होगा और अपने खेल में नई चीजें लानी होंगी क्योंकि सभी मेरा खेल देख सकते हैं और उन्हें पता है कि मैं कैसा खेल रही हूं। इसलिए कोर्ट पर उतरते हुए मुझे हर बार नई रणनीति के साथ जाना होगा।''

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हैदराबाद की 24 साल की सिंधु ने कहा कि विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीतने में उन्हें काफी समय लगा और यह कड़ी मेहनत के अलावा उस त्याग का नतीजा है जो वर्षों से उनके माता-पिता ने किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं पिछले पांच साल से स्वर्ण पदक का इंतजार कर रही थी। मैं हर बार हार रही थी। मैं भी बुरा महसूस करती थी लेकिन मैं हमेशा वापसी और कड़ी मेहनत करती रही। मेरे माता-पिता ने मेरे लिए काफी त्याग किए हैं।''

सिंधु अब चांगझू में 17 से 22 सितंबर तक चीन ओपन विश्व टूर सुपर 1000 टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगी जबकि इसके बाद इंचियोन में 24 से 29 सितंबर तक कोरिया ओपन विश्व टूर सुपर 500 टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगी।

सिंधू ने यहां जूनियर बैडमिंटन चैंपयनिशप के इतर कहा, ‘‘मैं चीन और कोरिया ओपन की तैयारी कर रही हूं, मैं कुछ दिनों में रवाना हो जाऊंगी। मुझे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की उम्मीद है।''

उन्होंने कहा, ‘‘इस स्वर्ण पदक से मनोबल बढ़ेगा और मैं इस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ूंगी। ओलंपिक से पहले काफी प्रतियोगिताएं होनी हैं इसलिए दबाव लेने की जगह मैं अपना शत प्रतिशत प्रयास करूंगी।''

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राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद ने हाल में कहा था कि भारत ने कोचों में पर्याप्त निवेश नहीं किया है। इस मुद्दे पर राय मांगने पर सिंधू ने कहा, ‘‘शीर्ष स्तर के कोचों की जरूरत है जिन्हें बैडमिंटन के बारे में सभी तरह की जानकारी हो जिससे कि चैंपियन तैयार किए जा सकें।''

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय कोचों का स्तर ओर बेहतर करने की जरूरत है और तभी वे अधिक खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे पाएंगे और वे चैंपियन बनेंगे।'' कोरिया की विदेशी कोच किम जी ह्युन की भूमिका के बारे में सिंधू ने कहा, ‘‘पिछले कुछ महीनों से मैं गोपी सर के मार्गदर्शन में किम के साथ ट्रेनिंग कर रही हूं। प्रत्येक स्ट्रोक महत्वपूर्ण है और हमें प्रत्येक स्ट्रोक को परफेक्ट करना होगा।'' उन्होंने कहा, ‘‘हम डिफेंस और फ्रंट तथा बैक कोर्ट पर काम कर रहे हैं और इससे काफी मदद मिली।''