भुवनेश्वर : भारतीय हॉकी टीम ने विश्व कप टूर्नामेंट में ग्रुप-सी में चार अंकों के साथ सबसे ऊपर है लेकिन अगर उसे क्वार्टर फाइनल की राह तय करनी है, तो आज कनाडा के खिलाफ खेले जाने वाले आखिरी ग्रुप मैच में उसे जीत हासिल करनी होगी।

भारत ने इस टूर्नामेंट की शुरूआत अच्छी की थी। उसने दक्षिण अफ्रीका को पहले मैच में 5-0 से हराया था। हालांकि, बेल्जियम के खिलाफ उसका मैच 2-2 से ड्रॉ हुआ था।

ग्रुप-सी में शामिल कनाडा एक मैच में हार और एक मैच ड्रॉ होने के साथ तीसरे स्थान पर है, वहीं बेल्जियम भी चार अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है। भारतीय टीम गोल के आधार पर अपने ग्रुप में शीर्ष पर है। ऐसे में कनाडा के खिलाफ ड्रॉ मैच भी उसे क्वार्टर फानइल तक पहुंचा देगा। हालांकि भारतीय कोच हरेंद्र सिंह को जीत से कम कुछ मंजूर नहीं है।

कोच हरेंद्र की यह बात सही है कि अगर भारतीय टीम ने कनाडा के खिलाफ मैच में अधिक गोल खाए और हार का सामना किया, तो क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के उसके अवसर अन्य दो टीमों के मैच के परिणाम पर निर्भर करेंगे, जो हित में हो यह संभव नहीं। इसके लिए सबसे जरूरी है भारतीय टीम का पेनाल्टी कॉर्नर के अवसर का सही इस्तेमाल करना।

भारतीय टीम ने हॉकी विश्व कप के पिछले 13 संस्करणों में से केवल एक में खिताबी जीत हासिल की है। 1975 में पाकिस्तान को कड़े मुकाबले में 2-1 से हराकर उसने विश्व कप अपने नाम किया था और एक बार फिर इस पल को जीने के लिए और खिताब के करीब एक और कदम बढ़ाने के लिए वह कनाडा के खिलाफ हर हाल में जीत के इरादे से मैदान पर उतरेगी। भारतीय टीम ने ओडिशा हॉकी विश्व कप टूर्नामेंट में ग्रुप-सी में चार अंकों के साथ सबसे ऊपर है लेकिन अगर उसे क्वार्टर फाइनल की राह तय करनी है, तो आज कनाडा के खिलाफ खेले जाने वाले आखिरी ग्रुप मैच में उसे जीत हासिल करनी होगी

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भारत ने इस टूर्नामेंट की शुरूआत अच्छी की थी। उसने दक्षिण अफ्रीका को पहले मैच में 5-0 से हराया था। हालांकि, बेल्जियम के खिलाफ उसका मैच 2-2 से ड्रॉ हुआ था।

ग्रुप-सी में शामिल कनाडा एक मैच में हार और एक मैच ड्रॉ होने के साथ तीसरे स्थान पर है, वहीं बेल्जियम भी चार अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है। भारतीय टीम गोल के आधार पर अपने ग्रुप में शीर्ष पर है। ऐसे में कनाडा के खिलाफ ड्रॉ मैच भी उसे क्वार्टर फानइल तक पहुंचा देगा। हालांकि भारतीय कोच हरेंद्र सिंह को जीत से कम कुछ मंजूर नहीं है।

कोच हरेंद्र की यह बात सही है कि अगर भारतीय टीम ने कनाडा के खिलाफ मैच में अधिक गोल खाए और हार का सामना किया, तो क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के उसके अवसर अन्य दो टीमों के मैच के परिणाम पर निर्भर करेंगे, जो हित में हो यह संभव नहीं। इसके लिए सबसे जरूरी है भारतीय टीम का पेनाल्टी कॉर्नर के अवसर का सही इस्तेमाल करना।

भारतीय टीम ने हॉकी विश्व कप के पिछले 13 संस्करणों में से केवल एक में खिताबी जीत हासिल की है। 1975 में पाकिस्तान को कड़े मुकाबले में 2-1 से हराकर उसने विश्व कप अपने नाम किया था और एक बार फिर इस पल को जीने के लिए और खिताब के करीब एक और कदम बढ़ाने के लिए वह कनाडा के खिलाफ हर हाल में जीत के इरादे से मैदान पर उतरेगी।