विश्व मलेरिया दिवस पर विशेष : कोरोना के साथ क्यों जरूरी है मलेरिया की भी रोकथाम : WHO की रिपोर्ट

World Malaria Day: every two minutes a child dies of malaria - Sakshi Samachar

'विश्व मलेरिया दिवस 2020' का थीम

WHO ने मलेरिया को खत्म करने के किया पार्टनरशिप

कैसे शुरू हुआ 'विश्व मलेरिया दिवस'

हैदराबाद : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश के कई गाँवों के प्रधानों से बातचीत करते हुए इस ओर भी सबका ध्यान दिलाया कि कोरोना के साथ-साथ अब हमें कई मौसमी बीमारियों से भी बचने के तरीकों की ओर ध्यान देने की जरूरत है। इन्हीं में से एक बीमारी है - मलेरिया

बेशक, पूरी दुनिया आज कोविड-19 महामारी से लड़ रही है। इसके बावजूद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस ओर ध्यान दिलाने की कोशिश की है कि दुनिया के सभी देशों को आज मलेरिया जैसी अन्य जानलेवा बीमारियों को ध्यान में रखते हुए भी काम करने की जरूरत है।  कोरोना वायरस सहित मौसमी बीमारियों से भी निपटने के लिए हमें तैयार रहना है।

'विश्व मलेरिया दिवस 2020' का थीम
आज यानि 25 अप्रैल को पूरी दुनिया 'विश्व मलेरिया दिवस' के रूप में मनाती है। इसके अंतर्गत कई ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन किये जाते हैं जिनसे मलेरिया की रोकथाम, नियंत्रण और उन्मूलन की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाया जा सके। बता दें कि मलेरिया एक जानलेवा बीमारी है, जो प्लास्मोडियम परजीवी (Plasmodium Parasites) के कारण होती है। कोरोना महामारी के प्रकोप के बीच इस बार 'विश्व मलेरिया दिवस 2020' का थीम रखा गया है, "Zero malaria starts with me."

WHO ने मलेरिया को खत्म करने के किया पार्टनरशिप
मलेरिया को खत्म करने और "Zero malaria starts with me" की थीम को बढ़ावा देने के लिए WHO ने RBM (Roll Back Malaria) पार्टनरशिप को ज्वाइन किया है। यह मलेरिया को खत्म करने के उद्देश्य से जमीनी स्तर पर किया जा रहा एक अभियान है। इसके अंतर्गत मलेरिया से बचने के लिए अतिरिक्त संसाधनों को जुटाना, समुदायों को मलेरिया की रोकथाम और देखभाल के लिए सशक्त बनाना है, जैसी कई बातों पर ध्यान दिया जा रहा है।

क्या कहते हैं आंकड़े 
आपको यह जानकार हैरानी होगी कि WHO की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में हर 2 मिनट में एक बच्चे की मलेरिया से मौत हो जाती है। WHO के अनुसार, साल 2000 और 2014 के बीच, दुनिया भर में मलेरिया से संबंधित मौतों की संख्या में 40% की गिरावट आई थी। माना जा रहा है कि इसकी संख्या 7 लाख 43 हजार से लेकर 4 लाख 46 हजार तक हो सकती है। WHO की विश्व मलेरिया रिपोर्ट- 2019 में कहा गया है कि साल 2014-2018 की इस अवधि में नए संक्रमणों को कम करने में कोई वैश्विक लाभ नहीं हुआ। लगभग 2018 में भी इतने ही लोग मलेरिया से मरे हैं, जितने कि इससे एक साल पहले। 

क्या है मलेरिया
मलेरिया मादा मच्छर एनोफिलीज के काटने से फैलता है। इन मच्छरों में प्लास्मोडियम पैरासाइट पाया जाता है, जो आपके रक्त से होकर शरीर में फ़ैल जाता है। खासकर लिवर में पहुंचकर यह स्थायी हो जाता है। इसके बाद यह लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करने लगता है। इससे लाल रक्त कोशिकाओं के अंदर के परजीवी कई गुना बढ़ जाते हैं, जिससे संक्रमित कोशिकाएं फट जाती हैं। पैरासाइट लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करना जारी रखते हैं, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे लक्षण होते हैं, जो एक समय में दो से तीन दिन तक रहते हैं। 

मलेरिया इन चार तरह के पैरासाइट से फैलता है-
1. प्लासमोडियम वाइवेक्स (P. vivax) : भारत में लगभग 60 प्रतिशत मलेरिया के मामले प्लासमोडियम वाइवेक्स की वजह से सामने आते हैं। इसमें शरीर में बुखार, जुकाम, थकान और डायरिया जैसी मुश्किलें सामने आती हैं।

2. प्लासमोडियम ओवाले (P.ovale) : यह पैरासाइट ज्यादातर पश्चिमी अफ्रीका में पाया जाता है और इंसान को काटने के बाद भी काफी लंबे समय तक उसके शरीर में ज़िंदा बना रहता है।

3. प्लासमोडियम फेल्किपेरम (P. falciparum) : मलेरिया का यह पैरासाइट सबसे खतरनाक और जानलेवा होता है। इसमें उल्टी, बुखार, पीठ दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, चक्कर, बॉडी पेन, थकान लगना और पेट दर्द जैसे लक्षण होते हैं।

4. प्लासमोडियम मलेरिया (P. malaria) : इस पैरासाइट से पीड़ित मरीज में ठिठुरन के साथ तेज बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि यह जानलेवा नहीं होता।

कैसे शुरू हुआ 'विश्व मलेरिया दिवस'
विश्व मलेरिया दिवस को 'अफ्रीका मलेरिया दिवस' से विकसित किया गया, जो पहली बार 2008 में आयोजित किया गया था। यह मूल रूप से एक इवेंट है, जो 2001 के बाद से अफ्रीकी सरकारों द्वारा मनाया गया। उन्होंने प्रगति लक्ष्य की ओर काम किया, जिसका उद्देश्य मलेरिया को नियंत्रित करना था और अफ्रीकी देशों में इसकी मृत्यु दर को कम करना भी।

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क्यों महसूस हुई इसकी जरूरत
विश्व स्वास्थ्य सभा के 60वें सत्र में, 2007 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रायोजित एक बैठक में प्रस्तावित किया गया कि दुनिया भर के देशों में मलेरिया के अस्तित्व की पहचान करने और लोगों में जागरूकता लाने के लिए अफ्रीका मलेरिया दिवस को विश्व मलेरिया दिवस में बदल दिया जाए ताकि मलेरिया जैसे रोग से विश्व स्तर पर लड़ने का प्रयास किया जा सके। 

किस तरह से किया जाना चाहिए काम
विश्व मलेरिया दिवस नए डोनर्स को मलेरिया के खिलाफ एक वैश्विक साझेदारी में शामिल होने में सक्षम बनाता है। साथ ही अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों को इस बात के लिए तैयार करता है कि वह जनता की भलाई के लिए नए-नए शोधों के परिणामों को सामने लेकर आएं। यह दिन अंतरराष्ट्रीय साझेदारों, कंपनियों और फाउंडेशनों को अपने प्रयासों को प्रदर्शित करने का मौका देता है। साथ ही यह दर्शाता है कि ऐसी बीमारियों से निपटने के लिए किस तरह से काम किया जाना चाहिए।

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