सबसे अमीर तिरुपति बालाजी मंदिर में भी कर्म​चारियों की कर दी गयी छटनी, नहीं सुनी फरियाद

Tirupati Balaji is not Rich, took away the job of employees in bad times - Sakshi Samachar

मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष का बयान

पीड़ित श्रमिकों ने की TTD से अपील

ट्रेड यूनियन ने की आलोचना

3 मई के बाद भी बंद रहेगा मंदिर

तिरुमला : देश का सबसे अमीर मंदिर होने का दंभ भरने वाला आंध्र प्रदेश का तिरुपति बालाजी मंदिर आज सबसे गरीब नजर आ रहा है। कोरोना वायरस से जूझ रहे देशवासियों का हाल पहले ही बेहाल है। उस पर लॉकडाउन का दंश झेलने को मजबूर गरीब मजदूर और सफाई क​र्मचारियों की कहानी और भी दयनीय है। दैनिक भत्ते पर जीवन यापन करने वाला यह वर्ग पहले ही दाने—दाने को मोहताज है। ऐसे में जब हम सभी को आगे बढकर इनकी मदद करनी चाहिए, हम उनके साथ खडे होने को भी तैयार नहीं हैं।

इसका पहला सबूत देखने को मिला भारत के सबसे अमीर हिंदू तीर्थस्थलों में शामिल आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर की ताजा रिपोर्ट में। मंदिर ने 1300 संविदाकर्मियों को काम से निकाल दिया है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये सभी संविदाकर्मी मंदिर की साफ-सफाई का ध्यान रखते थे। कोरोना वायरस महामारी की वजह से इन सभी को 1 मई से काम पर नहीं आने के लिए कहा गया था।

मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष का बयान

मैन पावर की आपूर्ति करने वाली फर्म को सूचित किया गया था कि 30 अप्रैल को समाप्त होने वाले अनुबंध का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष वाई वी सुब्बा रेड्डी ने एक समाचार पत्र को बताया कि उनकी सेवाएं बंद कर दी गई हैं।  उन्होंने कहा, "इस मुद्दे को मेरे संज्ञान में लाया गया है। हम उनकी मदद करने की कोशिश करेंगे।" रेड्डी ने कहा कि लॉकडाउन की घोषणा के बाद तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के नियमित कर्मचारियों को भी कोई काम नहीं सौंपा है।

पीड़ित श्रमिकों ने की TTD से अपील

वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए टीटीडी का बजट 3,309 करोड़ रुपये है। फरवरी में तय किए गए प्रस्तावों को कोरोना वायरस संबंधी स्थिति के कारण समीक्षा से गुजरना पड़ सकता है। पीड़ित श्रमिकों ने टीटीडी प्रशासन से अपील की है कि वे कोरोना वायरस संकट के दौरान उन्हें अपना काम जारी रखने दें। हालांकि, TTD प्रशासन मौजूदा मैन पावर फर्म के साथ कॉन्ट्रैक्ट को रिन्यू करने के लिए तैयार नहीं है।

ट्रेड यूनियन ने की आलोचना
मंदिर ट्रस्ट द्वारा उठाए गए इस कदम की ट्रेड यूनियनों द्वारा भारी आलोचना की जा रही है। भारतीय व्यापार संघ (सीटू) द्वारा कहा गया, 'श्रमिक जिन्होंने हर वक्त मंदिर की स्वच्छता और रखरखाव का ध्यान रखा, तीर्थयात्रियों की सेवा के लिए अपना जीवन जोखिम में डाल दिया और संकट के वक्त उन्हें ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।'

बता दें कि कोरोना वायरस महामारी के दौर में 1300 श्रमिकों को निकाले जाने पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

3 मई के बाद भी बंद रहेगा मंदिर..?
कोरोना वायरस के प्रसार की जांच के उपायों के तहत 20 मार्च से प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर को बंद कर दिया गया था। हालांकि, मंदिर में दैनिक अनुष्ठान पुजारियों द्वारा किए जा रहे हैं। केवल भक्तों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं है। बोर्ड ने पहले 3 मई तक मंदिर के बंद होने की घोषणा की थी। अब जब केंद्र सरकार द्वारा लॉकडाउन की अवधि को 2 सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है, तो क्या मंदिर भी आगे बंद रहेगा, इस पर जल्द फैसला लिया जा सकता है।

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