इन चर्चित किस्सों के लिए हमेशा याद किए जाते रहेंगे YS राजशेखर रेड्डी

Why Everybody Remembering Dr YS Rajshekhara Reddy - Sakshi Samachar

वाईएसआर के लहू के कण-कण में इंसानियत समायी हुयी थी

प्रजा दरबार में मुख्यमंत्री वाईएसआर लोगों को कभी निराश नहीं करते थे

दिवंगत मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस राजशेखर रेड्डी (वाईएसआर) केवल एक नेता नहीं बल्कि वे एक अच्छे भी इंसान थे।  उनके लहू के कण-कण में इंसानियत समायी हुयी थी। वाईएसआर के शासनकाल में हर दिन सुबह कैंप कार्यालय में प्रजा दरबार हुआ करता था। इस दरबार में वह स्वयं लोगों की शिकायतें सुनते और उसका निवारण करते थे। ऐसा एक व्यक्ति भी नहीं मिलेगा जो प्रजा दरबार से निराश होकर लौट गया हो। हर कोई कुछ न कुछ लेकर ही जाता था। प्रजा दरबार से बाहर निकलने वाले हर व्यक्ति को आप उनके समय में मुस्कुराते हुए जाते देखा होगा।  

प्रजा दरबार

मुख्य रूप से किसी की बेटी शादी पक्की हो गई हो या खर्च के लिए पैसे नहीं हो तो केवल प्रजा दरबार में आने की देरी थी। मुख्यमंत्री वाईएसआर ऐसे लोगों को कभी निराश नहीं करते। उनकी फरियाद सुनते ही आवश्यक रकम का एक चेक दे देते थे। केवल शादी ही नहीं, रोजगार, कर्ज, भूमि विवाद, बीमारी का इलाज, कर्मचारियों की समस्याएं ऐसे अनगिनत मुद्दों का समाधान चुटकी में प्रजा दरबार में करते थे।

कहा जाता था कि उनके जमाने में मुख्यमंत्री राहत कोष का सबसे अधिक पैसा प्रजा दरबार में खर्च किया गया। देश के किसी भी मुख्यमंत्री राहत कोष से इतनी बड़ी रकम अब तक खर्च नहीं की गई, जितनी मुख्यमंत्री वाईएसआर के शासनकाल में किया गया। प्रजा दरबार का लाभ उठा चुके लोग आज भी वाईएसआर को याद करते हैं और कहते हैं कि 'नेता हो तो ऐसा' ।

विरोधी दल के नेता हों या कार्यकर्ता जो भी उनसे मिलता था वो सबकी सुनते थे और हर संभव मदद करते थे। यहां तक की उनकी पर्सनल समस्याओं में भी सभी तरह की मदद करके हल कराने की कोशिश करते थे।

उच्चशिक्षा की सराहनीय योजना

वाईएसआर के शासनकाल में जितनी भी योजनाएं लागू की गई, वे प्रदेश के सब गांवों और घरों तक पहुंची। कमिशनखोरी व बिचौलियों को उससे दूर रखा गया। मुख्य रूप से उच्च शिक्षा में इनकी पहल अहम रही है। उच्च शिक्षा हासिल करना गरीब और मध्यम तबकों के लिए काफी मुश्किल था। उस जमाने में अमीरों के बच्चे ही इंजीनियरिंग, डॉक्टर, एमबीए जैसी पढ़ाई कर पाते थे। वाईएसआर खुद एक डॉक्टर थे। गांव के लोगों की हर समस्याओं को अच्छी तरह से जानते थे। सत्ता में आते ही उच्च शिक्षा के लिए दी जानी वाली फीस
पुनर्भुगतान की सीमा को 30 हजार से बढ़ाकर एक लाख कर दिया, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चे भी इंजीनियरिंग, डॉक्टर, एमबीए जैसी उच्च शिक्षा हासिल कर सकें। वाईएसआर के इस योजना से प्रदेश के अनेक बच्चे इंजीनियरिंग और डॉक्टर बने हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उनकी योजना का लाभ उठा चुके अनेक लोग मकानों में सबसे पहले वाईएसआर की फोटो (तस्वीर) को पूजते हैं।

108 और 104 सेवा के साथ आरोग्य श्री

वाईएसआर यह भी जानते थे कि किसी भी वक्त इंसान के साथ कुछ भी हो सकता है। बीमारी या दुर्घटना बोलकर न ही आते हैं और न ही होते हैं। ऐसे वक्त में सभी के पैसा नहीं होता। बहुत से ऐसे लोग और परिवार हैं जो काम करे तो ही घरों में चूल्हा जलता है। ऐसे समय में कोई अनहोनी घटना हो जाये तो अस्पताल ले जाने के लिए वाईएसआर ने 108 और 104 सेवा आरंभ की, ताकि मरीज को फ्री में अस्पताल तक ले जा सके। यह स्कीम आज भी दोनों तेलुगु राज्यों में सफलता के साथ जारी है। उनके बेटे और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन ने दो कदम आगे बढ़ते हुए हाल ही में एंबुलेंस सेवा को और मजबूत किया है। जिसकी राष्ट्रीय स्तर पर तारीफ हो रही है। ग्रामीण तथा एजेन्सी क्षेत्रों में 676 मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) आपातकालीन में उपलब्ध रहेंगी। ऐसी सेवा देश में पहली बार उपलब्ध की गई है। इन एंबुलेंस वाहनों में ऑक्सिजन सिलेंडर और वेंटिलेटर होंगे। साथ ही इन्फ्यूजन पाइप और सुविधाजनक स्ट्रेचर उपलब्ध होंगे।

जलयज्ञम की दूरगामी सोच
 
वाईएसआर किसानों को देश की रीढ़ की हड्डी मानते थे। उनका मानना था कि कोई भी राज्य, देश और दुनिया तब ही सुख, शांति और प्रसन्न रह सकता है जब वहां का किसान सुखी और प्रसन्न रहता है। किसान तब ही प्रसन्न रहता है, जब उसे अच्छी फसल हो और अच्छा दाम मिले। इस बात को ध्यान में रखते हुए वाईएसआर ने किसानों के लिए जलयज्ञम की शुरुआत की।  ताकि पूरी प्रदेश में किसानों को सिंचाई और पेयजल मिल सके और किसानों की हर छोटी छोटी समस्याओं के तत्काल निराकरण के लिए अफसरों को फरमान सुना रखा था।

बिना भेदभाव के योजना का लाभ

उनके बारे में एक किस्सा मशहूर है कि.. एक पत्रकार के सवाल पर उन्होंने कहा था कि हमने तो एक ऐसी योजना शुरू की है, जिसका लाभ न चाहते हुए भी विरोधी दल के लोग ले रहे हैं और चाह करके भी इसका विरोध नहीं कर पा रहे हैं। जब देशभर में केन्द्र सरकार ने गैसे के दाम में पचास रुपये की बढ़ोत्तरी की थी तो उन्होंने पूरे राज्य में इसका दाम कम करवाकर राज्य सरकार की ओर से सब्सिडी देने का काम किया था।

बाप से बेटा दो कदम आगे

इस तरह दिवंगत मुख्यमंत्री वाईएसआर की हर योजना का लाभ हर वर्ग के लोगों ने उठाया है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और न ही उनके बाद कभी हुआ। अब उनके बेटे और एपी के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी पिता वाईएसआर से दो कदम आगे निकल गये हैं। जगन की योजनाओं की अन्य राज्य की सरकारें और विपक्ष के नेता भी तारीफ कर रहे हैं। वह न सिर्फ उनकी उपयोगी योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं बल्कि उसको और भी बड़े पैमाने पर लागू कर रहे हैं।

इस समय दिवंगत मुख्यमंत्री वाईएसआर के कार्यक्रम और योजनाओं के बारे में हर दिन कहीं न कहीं और किसी न किसी चौपाटी पर किस्से सुनाई देते हैं। उनके साथ अब उनके बेटे के बारे में भी गांवों में चर्चाएं हो रही हैं। वाईएस जगन ने चुनावी घोषणापत्र को भागवत गीता, कुरान और बाइबिल का नाम दिया था। ऐसा नाम अब तक देश ही दुनिया में भी किसी नेता नहीं दिया है।

के. राजन्ना, साक्षी समाचार

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