अंतरिक्ष की दुनिया में तेलंगाना रखने जा रहा बड़ा कदम, स्पेस प्रोग्राम का सपना होगा पूरा

Telangana Space Tech Policy - Sakshi Samachar

स्पेस टेक पॉलिसी की तैयार

बड़े स्पेस प्रोग्रामों का संचालन होगा संभव

कई बड़े स्टार्टअप कर रहे हैदराबाद में काम

हैदराबाद : देश का सबसे युवा राज्य कहा जाने वाला तेलंगाना (Telangana) अब अंतरिक्ष की दुनिया में अपनी धमक जमाने जा रहा है। आने वाले दिनों में राज्य की पहचान एक लॉन्च पैड की तरह होगी, जहां से बड़े से बड़े स्पेस प्रोग्रामों को हकीकत में बदलना संभव हो सकेगा। इसके लिए एक स्पेस टेक पॉलिसी (Space Tech Policy) तैयार की जा रही है।

स्पेस टेक पॉलिसी के जरिए राज्य को अंतरिक्ष से संबंधित उत्पादों और सेवाओं को उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया जाएगा, जो आने वाले दिनों में राज्य के भविष्य के लिए सबसे अच्छा साबित होगा। स्पेस टेक पॉलिसी के तहत लॉन्च व्हीकल के उत्पादन,  सेटेलाइट सिस्टम व सब सिस्टम, ग्राउंड इक्विपमेंट के निर्माण के साथ अन्य सुविधाओं को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

तेलंगाना ने स्पेसटेक के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र (इको सिस्टम) विकसित करने का फैसला किया है। हालांकि पहले से ही स्काईरूट, ध्रुवा और स्पेसटेक क्षेत्र की अन्य प्रमुख कंपनियों सहित कई बड़े स्टार्टअप हैदराबाद में काम कर रहे हैं। इन सबके अलावा डीआरडीओ, एनआरएससी, एडीआरआईएन, डीआरडीए, आरसीआई, बीडीएल, एमडीएन, आयुध निर्माण कंपनी, डीएमआरएल, एआरसीआई (मटेरियल) हैदराबाद के बाहर से अपने काम को अंजाम दे रहे हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव जयेश रंजन ने तेलंगाना के स्पेस-टेक पॉलिसी फ्रेमवर्क-2021 के लिए आवश्यक लोगों से मुकाकात की। इस बैठक का उद्देश्य राज्य की स्पेसटेक पॉलिसी की रूपरेखा तैयार करना था, जिसके लिए राज्य सरकार ने विभिन्न स्टेक होल्डर्स को आमंत्रित किया था। जिनमें हार्डवेयर स्टार्टअप, एनालिटिक्स स्टार्टअप और एकेडमिक स्टेक होल्डर्स शामिल थे।

सचिव जयेश रंजन ने कहा कि राज्य में एंड-टू-एंड स्पेसटेक पारिस्थितिकी तंत्र (इको सिस्टम) विकसित करने के लिए एक समग्र ढांचा तैयार किया जा रहा है। जिससे राज्य में अंतरिक्ष से संबंधित इन्वेस्टमेंट और इनोनेशन में उभरते वैश्विक अवसरों को हकीकत में बदला जा सके। 

भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग ने हाल ही में स्पेसकॉम नीति 2020 और स्पेसआरएस नीति 2020 का मसौदा जारी किया था। जिसके तहत राष्ट्रीय उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए देश को 'आत्मनिर्भर भारत' की तरफ ले जाया जा सके।

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