कम सुविधा व इन्फ्रास्ट्रक्चर में अच्छी सेवा देने के लिए जूझ रहे गांधी अस्पताल के डॉक्टर व अन्य स्टॉफ

Reality of Gandhi Hospital for treating corona patients in Hyderabad - Sakshi Samachar

गांधी अस्पताल में 3 मई तक 3,020 कोरोना मामले दर्ज

इस समय 1,365 मरीजों का इलाज जारी है 

अस्पताल में अब तक 99 लोगों की मौत हो गई  

 

हैदराबाद : तेलंगाना में कोरोना मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने के बाद से गांधी अस्पताल सुर्खियों में है। पहले कोरोना मरीज आते ही तुरंत 'गांधी अस्पताल' को भेज दिए जाते थे। अस्पताल के डॉक्टरों ने कोरोना गर्भवती महिला की सफलतापूर्वक प्रसूति करके वाह-वाही लूटी है। इतना ही नहीं प्लाज्मा थेरेपी से इलाज भी सफलता के साथ जारी है। हाल ही में अस्पताल के सभी कर्मचारियों पर सेना ने हेलीकॉप्टर के जरिए फूलों की बारिश की गयी। इतना ही नहीं, जब भी ये डॉक्टर्स और नर्स काम समाप्त कर अपने घर गये, तब स्थानीय लोगों ने ताली बजाकर फूलों से उनके स्वागत किये जाने के अनेक उदाहरण भी देखे गए । 

मगर अब गांधी अस्पताल के हालत पूरी तरह से बदल गई है। इस समय गांधी अस्पताल कोरोना संक्रमितों से पूरी तरह से भर गया है। डॉक्टर्स कम और पेशंट अधिक हो गये हैं। इसके चलते गांधी अस्पताल में परेशानी का माहौल है। डॉक्टर्स भी हर रोज कोरोना के बढ़ते मरीजों के कारण किसी भी मरीज का बहुत बेहतर तरीके से इलाज करने में खुद का अक्षम पा रहे हैं। इतना ही नहीं, मरीज अधिक होने से वह बहुत सारे काम चाह कर भी नहीं कर पा रहे हैं।  

बीमारी नहीं हो रही कम

ऐसा कहा जा रहा है कि बहुत सारे मरीज ऐसे हैं जिनमें 14 दिन बाद भी बीमारी कम होने का नाम नहीं ले रही है।  साथ ही पिछले एक सप्ताह से हर दिन औसतन 200 मरीज आ रहे हैं। इस तरह से तीन महीने बिना आराम किये रोगियों की सेवा करने वाले डॉक्टर्स और नर्स शारीरिक और मानसिक रूप से काफी दबाव में देखे जा रहे हैं। इस समय जिन कोरोना मरीजों का इलाज जारी है, उनमें अधिकतर हाइपरटेंशन, मधुमेह, कैंसर, किडनी, दिल के मरीज, लीवर से संबंधिक बीमारियों से ग्रस्त हैं। इनमें वृद्धों की संख्या भी अधिक हैं। चिंता का विषय यह है कि इनमें रोग निरोधक शक्ति कम होने कारण मौत के शिकार हो रहे हैं।  

मौलिक सुविधा का अभाव

वैसे तो गांधी अस्पताल की क्षमता 1,000 बेड्स की है। कोरोना की संक्रमण की संख्या बढ़ जाने के कारण इसकी क्षमता को 1,500 बेड्स कर दिया गया है। पिछले सप्ताह से 150 से लेकर 200 कोरोना के नये मामले आ रहे हैं। हर दिन अस्पाल में आने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही हैं। इस समय अस्पात के सभी बेड्स पर मरीज लेटे हैं। इसके चलते अस्पताल प्रबंधन 350 बेड्स और स्थापित करने का फैसला लिया है। अब आने वाले नये कोरोना मरीजों को कहां पर रखा जाये इस बात को लेकर अस्पताल प्रबंधन माथापच्ची कर रहा है।

कहा जा रहा है कि बेड्स के अनुपात में मौलिक सुविधा उपलब्ध नहीं है। पिछले कुछ सालों से डॉक्टर्स और नर्सों की भर्ती नहीं की गई। इसके इस समय जो डॉक्टर्स और नर्स  हैं वे केवल काम चलाने मात्र हैं। कोरोना के कारण उनके ऊपर काम का काफी दबाव बढ़ गया है, जिससे वे खुद को असहज महसूस कर रहे हैं

अस्पताल में कोरोना मरीजों की संख्या

3 मई तक 3,020 कोरोना पॉजिटिव मामले दर्ज किये गये हैं। इनमें से 1,556 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई हैं। इस समय 1,365 मरीजों का इलाज जारी हैं। 99 लोगों की मौत हो गई है। 

क्षमता व सुविधा की हालत

अस्पताल में 1,500 बेड्स की क्षमता है। अब 350 अधिक बेड्स को स्थापित किये जा रहे हैं। 350 डॉक्टर्स हैं। 450 पीजी, इंटर्न व हाउस सर्जन्स हैं। 150 नियमित कर्मचारी हैं। 200 कंट्रैक्ट पर काम करने वाली नर्सेस हैं। इनके अलावा सैनिटेशन, सुरक्षा और आउटसोर्सिंग पर काम करने वाले 2,000 स्टाफ है। साथ ही जनरल मेडिसिन, इमरजेंसी, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी और गाइनोकोलॉजी विभाग कोरोना मरीजों की सेवा में लगे हैं।

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