पेरेंट्स की जेब पर बढ़ने वाला है बोझ! हैदराबाद में प्राइवेट स्कूलों ने की सैनिटेशन फीस की मांग

private schools in Hyderabad to charge fees to students for sanitation - Sakshi Samachar

शिक्षा मंत्री के सामने रखा प्रस्ताव

अभिभावकों को प्राइवेट स्कूलों ने भेजा फीस अलर्ट

हैदराबाद : अब हैदराबाद (Hyderabad) में निजी स्कूलों के छात्रों को स्वच्छता यानी सैनिटेशन के लिए फीस देनी पड़ सकती है। 1 फरवरी से स्कूल (School) शुरू होने जा रहा है। स्कूल प्रबंधन ने कोविड-19 महामारी के दौरान स्कूलों में सैनेटाइजर देने और परिसर को नियमों के मुताबिक साफ रखने में असर्मथता व्यक्त की है। निजी स्कूलों के प्रबंधन विभाग छात्रों के अभिभावकों को सैनिटेशन शुल्क (Sanitation fee)  देने के लिए संदेश भेज रहे हैं। 
 
तेलंगाना के शिक्षा मंत्री पी सबिता इंद्रा रेड्डी ने हाल ही में बैठक बुलाई थी, जिसमें निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से छात्रों को सैनेटाइजर देने और स्कूल को साफ रखने के लिए उपयोग किए जाने वाले क्लीनिंग पदार्थों के लिए धन इकट्ठा करने की परमिशन मांगी थी। उन्होंने कथित तौर पर शिक्षा मंत्री को सूचित किया कि स्कूलों में सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने में भारी निवेश करना होगा और स्कूल अतिरिक्त बोझ सहन करने की स्थिति में नहीं हैं । 

हालांकि सरकार ने निजी स्कूल प्रबंधनों को शुल्क बढ़ाने की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन वे पहले से ही छात्रों पर बोझ डाल रहे हैं। शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, फीस में बढ़ोतरी के लिए स्कूलों को कोई अनुमति नहीं दी गई थी। प्रबंधन ने कहा कि पिछले 10 महीनों से स्कूल बंद थे। इसके कारण स्कूल में धूल की एक मोटी परत जम गई थी और कई जगहों पर फर्नीचर पर भी मिट्टी की गहरी पतली परत जम गई है।

परिसर को साफ करने और फिर मानक संचालन प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए बड़ी रकम खर्च होगी। “कई छात्रों ने अपनी फीस नहीं दी है। हैदराबाद में छोटे स्कूलों के लिए हैंड सैनिटाइजर और सामाजिक दूरी को बनाए रखना आसान नहीं है। हैदराबाद स्कूल पेरेंट्स एसोसिएशन (HSPA) से ये भी पता चला कि कुछ अभिभावकों को स्वच्छता के लिए अतिरिक्त शुल्क के साथ शुल्क अलर्ट के लिए एसएमएस संदेश प्राप्त हुए थे।

एचएसपीए के संयुक्त सचिव वेंकट साईनाथ ने कहा कि “हम जानते थे कि ये होगा। स्कूल किसी न किसी तरह से हमसे अतिरिक्त शुल्क लेंगे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, जीओ 46 का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि स्कूल अब पूरी फीस ट्यूशन फीस के रूप में जमा कर रहे हैं और अभिभावकों को इसका कोई विस्तृतित ब्योरा नहीं दे रहे हैं।

एचएसपीए के संयुक्त सचिव ने कहा कि, 'हमने शिक्षा मंत्री से GO-46 पर स्पष्टता देने का आग्रह किया जो केवल ट्यूशन फीस के इकट्ठा करने की अनुमति देता है। हमने उन्हें ये सुझाव भी दिया कि इसके बजाय, सरकार स्पष्ट रूप से स्कूल प्रबंधन से 50 प्रतिशत शुल्क कम करने के लिए कह सकती है, जब तक कि महामारी नहीं घटती है।

हालांकि, सरकार ने सैनिटेशन के लिए अतिरिक्त शुल्क जमा करने के लिए हरी झंडी नहीं दी है। अतिरिक्त मुख्य सचिव, शिक्षा, चित्रा रामचंद्रन ने कहा कि, 'हमने सैनिटेशन के लिए अतिरिक्त शुल्क लेने की अनुमित नहीं दी है।' 

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