शहर में कोरोना की वजह से दहशत का माहौल, सिर्फ 11 दिनों में दर्ज हुए 13,233 मामले

hyderabad health department negligence coronavirus patients - Sakshi Samachar

कोरोना मामलों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई

130 दिनों में 25,193 कोरोना पॉजिटिव मामले

वर्तमान में होम आइसोलेशन में 10,518 लोग हैं  

हैदराबाद : महानगर में कोरोना वायरस का तांडव साफ देखा जा सकता है। पिछले चार महीनों की तुलना में इस समय कोरोना की रॉकेट जैसी तेज गति से फैल रहा है। मार्च से जून के अंत तक 12,696 कोरोना पॉजिटिव मामले दर्ज किए गए। जबकि सिर्फ जुलाई के इन 11 दिनों में में 50 प्रतिशत (13,233) से अधिक मामले दर्ज किए गए जो कि चिंता का विषय है।   एक ओर, कोरोना पॉजिटिव मामलों का प्रतिशत दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है तो दूसरी ओर हैदराबाद जिला चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी नियंत्रण उपायों को लेकर ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे उनको इसकी पड़ी ही नहीं है। 

अब तो जब पीड़ित खुद अधिकारियों को फोन करके कह रहे हैं कि वे कोरोना पॉजिटिव हैं तब भी अधिनकारी ट्रेसिंग के लिए नहीं जा रहे। न ही परिवार व रिश्तेदारों को क्वारेंटाइन ही कर रहे हैं। 

देखा जाए तो जिन कोरोना पीड़ितों के लक्षण न हो या फिर कम लक्षण हो उन्हें इन अधिकारियों द्वारा घर जाकर दिशानिर्देश देने चाहिए, कोरोना किट देनी चाहिए और बताना चाहिए कि वे कैसे होम आइसोलेशन में रहे, पर ऐसा 
हो नहीं रहा। 

दो-तीन दिन किसी के न आने पर कोरोना मरीज को खुद स्वास्थ्य केंद्र जाकर अपना आइसोलेशन किट लेना पड़ रहा है। वर्तमान में शहर में 10,518 होम आइसोलेशन में हैं। उनमें से ज्यादातर को आइसोलेशन किट नहीं मिले। वे स्वयं मेडिकल की दुकानों में जाकर पेरासिटामॉल और मल्टी-विटामिन की गोलियां ले रहे हैं।

83 प्रतिशत तो असिम्टोमैटिक हैं 

पहले से ही 60 प्रतिशत पीड़ित पूरी तरह से वायरस से ठीक हो चुके हैं और वर्तमान में सिर्फ 39 प्रतिशत का ही इलाज चल रहा है। इनमें से 83% असिम्टोमैटिक हैं। तेरह प्रतिशत मध्यम लक्षणों वाले (आइसोलेट चिकित्सा की आवश्यकता) के शिकार हैं।

केवल 4 प्रतिशत को ही आईसीयू उपचार की आवश्यकता है। चिकित्सा स्वास्थ्य के आंकड़े बताते हैं कि केवल एक प्रतिशत लोग ही कोरोना से मर रहे हैं।

वास्तव में क्षेत्र स्तर पर स्थितियां इसके विपरीत हैं। हालांकि कई लोग संदेह होने पर परीक्षण करवाने जा रहे हैं पर परीक्षण के बाद भी रिपोर्ट आने में देर हो रही है जिससे कई लोगों की हालत बिगड़ रही है, सांस लेने में दिक्कत हो रही है और ये घर में ही मरने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे घर में होने वाली मौतों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है और यही चिंता का सबसे बड़ा कारण है और इसका हल निकालने पर स्वास्थ्य विभाग भी ध्यान नहीं दे रहा।  

Advertisement
Back to Top