हैदराबाद: इस बार नहीं सजेंगे दुर्गा पूजा पंडाल, पूजा समितियों की ऐसी है तैयारी

Hyderabad Durga Puja in Virtual Mode amid Coronavirus threat  - Sakshi Samachar

इस बार नहीं सजेंगे दुर्गा पूजा पंडाल

वर्चुअल मोड में मां के दर्शन का कार्यक्रम

जानिए आयोजकों की पूजा को लेकर तैयारी

हैदराबाद: हैदराबाद में इस बार कोरोना संक्रमण और सरकार की सख्त हिदायतों के बीच दुर्गा पूजा का उत्साह फीका पड़ने वाला है। साक्षी समाचार ने शहर के जाने माने पूजा समितियों से बात की। जिन्होंने कहा कि पूजा तो होनी ही है, लेकिन इसका स्वरूप इस बार बिल्कुल भिन्न होगा। आम लोगों के हिसाब से बात की जाय तो मेले या मजमे की इस बार कोई गुंजाइश नहीं है। लिहाजा दुर्गा पूजा का मेला देखने निकलना बेकार की मशक्क्त होगी। हां व्यक्तिगत आराधना और पूजा के लिए आयोजकों ने कुछ इंतजाम जरूर किये हैं। 

नहीं सजेगा इस बार दुर्गा पूजा पंडाल

महानगर में बंगाली, राजस्थानी, गुजराती और बिहारी समाज के अलावा तेलुगू समाज की ओर से कई भव्य पूजा पंडाल बनते रहे हैं। इन तमाम समितियों ने एक सुर में कहा कि इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए सार्वजनिक पंडालों और सजावट का कोई इंतजाम नहीं होगा। यहां तक कि आम लोगों को पूजा स्थल के बारे में जानकारी तक नहीं दी जाएगी। ये जरूर है कि पूजा होगी, लेकिन कहां? इस बारे में खुलासा नहीं किया जाएगा। शहर में सीबीए दुर्गा पूजा समिति की तरफ से राजदीप ने बताया कि उन्हें डर है कि अगर वेन्यू का खुलासा कर दिया गया तो लोगों का हुजूम उमड़ पड़ेगा। ऐसे में सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन कराना संभव नहीं होगा। लिहाजा सबकुछ गुपचुप तरीके से ही आयोजित होगा। 

कैसे होंगे मां के दर्शन

हालांकि आयोजकों ने वर्चुअल मोड पर आम लोगों के लिए दर्शन के इंतजाम किये हैं। लोग यू ट्यूब फेसबुक या फिर व्हाट्सऐप लिंक के जरिए माता के दर्शन कर सकते हैं। उत्सव कल्चरल दुर्गा पूजा एसोसिएशन के कृष्णेंदू बताते हैं कि इस बार पंडाल में पचास से अधिक लोगों के जाने की इजाजत नहीं होगी। इनमें अधिकांश लोग आयोजक परिवार या फिर स्पॉन्सर्स के परिचित ही शामिल होंगे। हालांकि पूजा कार्यक्रम का लाईव टेलीकास्ट का इंतजाम किया गया है। चुनिंदा लोग अगर पंडाल आना भी चाहें तो उन्हें पहले से स्लॉट बुक कराना होगा। इसके अलावा क्यू आर कोड भी जारी किये जाएंगे। जिसके माध्यम से निर्धारित समय पर ही लोग पूजा कर सकेंगे। 

ऑनलाइन पूजा और प्रसाद की व्यवस्था

इस बार कई समितियों ने ऑनलाइन पूजा की व्यवस्था की है। इसके लिए आयोजकों से पहले ही संपर्क करना होगा। श्रद्धालु ऑनलाइन ही अपना गोत्र व बाकी जानकारी पंडित को बताएंगे और उनके नाम से पूजा करवा दी जाएगी। इसके अलावा पोस्ट के जरिए घर पर ही प्रसाद भिजवा दिया जाएगा। उत्सव कल्चरल दुर्गा पूजा एसोसिएशन के कृष्णेंदू ने बताया कि हर साल उनके आयोजन में रोजाना करीब पचास हजार लोग आते थे। मां की पूजा में कोई कोताही तो नहीं होगी। हां साज सज्जा पर असर जरूर पड़ेगा। 

कल्चरल प्रोग्राम इस तरह होंगे आयोजित

दुर्गा पूजा के मौके पर हर साल की तरह सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखे गए हैं। जिसके लिए कलाकारों को भी बुलाया गया है। हालांकि दर्शकों के लिए कोई इंतजाम नहीं होगा और पूरे कल्चरल प्रोग्राम का लाइव टेलीकास्ट ही किया जाएगा। लोग घर बैठे मां की भक्ति में शामिल हो सकेंगे। इस दौरान प्री रिकॉर्डेड वीडियो भी चलाए जाएंगे जिसका मजा लोग घर बैठे ले सकते हैं। 

50 लोगों से अधिक की नहीं जुटेगी भीड़

हालांकि सरकार ने पंडालों और आयोजन के दौरान 100 लोगों की भीड़ जुटाने की परमिशन दी है। बावजूद इसके उतरन बांगिया समिति के साइकट बताते हैं कि उनकी तरफ से 50 लोगों को ही इजाजत होगी। बाकी के साज सज्जा, पुरोहित और लाइटिंग स्टाफ जैसे लोग शामिल हो सकते हैं। साइकट ने बताया कि इस बार अन्नदानम का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। उन्होंने मायूसी जताते हुए कहा कि पूजा में सबसे बड़ा आकर्षण अन्नदानम ही होता है। जब अमीर गरीब सभी एक पंगत में बैठकर मां का प्रसाद ग्रहण करते हैं, लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी नहीं हो सकेगा। 

वर्चुअल मोड में ही माता के दर्शन

कोरोन काल में अधिकांश चीजें वर्चुअल मोड में ही हो रहे हैं। तो मेला घूमने का कार्यक्रम भी आप घर बैठे ही बना सकते हैं। इस पूरी कवायद में सबसे अधिक निराशा बच्चों को हो रही है। जिनमें मेला घूमने का उत्साह सबसे अधिक होता है। 

नहीं होगा छोटे वेंडरों का रोजगार

हर साल मेले के बहाने छोटे मोटे वेंडरों को रोजगार मिल जाता था। बांसुरी, फूल, चूड़ियां, माला और न जाने कितनी ही चीजें मेले में बिक जाया करती थी। लोग न चाहते हुए भी बच्चों की जिद के आगे गुब्बारे खरीद ही लिया करते थे। छोटे व्यापारियों का त्यौहार इस बार निराशा लेकर आया है। सड़क किनारे बिजनेस करने वाले लोगों को मंदी की मार झेलनी पड़ रही है। 
 

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