कोरोना और बारिश ने दशहरे पर व्यापारियों की उम्मीदों पर फेरा पानी, सूनी पड़ी हैं दुकानें व शॉपिंग काम्प्लेक्स

Heavy rain and Covid-19 Impact on Dussehra Festive Season - Sakshi Samachar

मार्केट्स में छाया सन्नाटा

खाली पड़े हैं शॉपिंग माल्स

नहीं दिख रहा दशहरे का जोश

एक तरफ कोरोना महामारी और दूसरी तरफ प्रकृति ने तेलुगु भाषी राज्यों के लोगों को तबाह कर दिया है। त्योहारी मौसम तक सबकुछ सामान्य होने की उम्मीद लिए बैठे लोगों व व्यापारियों को फिर से निराशा हाथ लगी है। उधर, कोविड की पाबंदियां और इधर बारिश और बाढ़ के कारण लोग कुछ भी नहीं कर पाने की असहाय स्थिति में हैं। 

मुख्य रूप से हैदराबाद के लोग इस बात से आशंकित और डरे हुए हैं कि उनपर कब और कौन सा खतरा आ टपकेगा। पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश और बाढ़ की वजह से दशहरे में त्योहारी माहौल देखने को नहीं मिल रहा है।

सदियों से यह मान्यता रही है कि खुशी और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है विजयदशमी। हर साल इस त्योहार पर नए कपड़े, नए वाहन सहित कई उम्मीदों के साथ लोग खुशी से जश्न मनाते थे, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं। एक तरफ कोरोना और दूसरी तरफ प्रकृति ने भक्तों के दशहरा उत्सव पर पानी फेर दिया है।  यही नहीं, त्योहारी सीजन को लेकर काफी उम्मीद लिए बैठे व्यापारियों को भी खासा झटका लगा है।  त्योहारी सीजन में कोरोबार होने से थोड़ी-बहुत राहत मिलने की आस लगाए बैठे छोटे-बड़े व्यारियों के सपनों पर पानी फेर गया है।

तेलंगाना में दशहरा उत्सव के तहत 'बतुकम्मा' पर्व भी मनाया जाता है। रंग-बिरंगे फूलों से सजाना और उनकी पूजा करना इसकी खासियत है। विशेष तौर पर तेलंगाना की महिलाओं के फूलों का पर्व है बतुकम्मा। गेंदा, चमेली, सिंहपर्णी आदि रंग-बिरंगे फूलों से बतुकम्मा तैयार किया जाता है।

दशहरा 2020 देश में मुख्य रूप से तेलंगाना के लोगों के लिए कड़वा याद छोड़ रहा है। तेलंगाना की महिलाएं बतुकम्मा पर्वा का बेसबरी से इंतजार करती हैं। इन शरनवरात्रि में बतुकम्मा के गीतों का उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। परंतु इस बार ऐसा कोई जश्न देखने को नहीं मिल रहा है। महिलाएं एक जगह जमा होने की बजाय अपने-अपने घरों पर बतुकम्मा खेलते हुए देवी गौरम्मा से कम से कम अगले साल तो अपनी परेशानियों को दूर करने की मन्नत मांग रही हैं।

नहीं दिख रहा दशहरे का जोश

सात महीने तक सबकुछ बंद रहने और लॉकडाउन की पाबंदियों में ढील के बाद कोई खास डिमांड नहीं होने से सूना पड़े व्यापरिक प्रतिष्ठानों को त्योहारी सीजन में कारोबार होने की उम्मीद थी। इसी के तहत व्यापारियों ने भारी डिस्काउंट, दाम में कटौती, फ्री ऑफर जैसे अलग-अलग नामों से कस्टमर्स को आकर्षित करने की तैयारी भी कर ली थी।

इसी के तहत बाजार में कुछ हरचल भी देखने को मिला। गांव-शहरों में नए कपड़ों की खरीददारी, अन्य इलेक्ट्रानिक घरेलू उपकरण, अन्य चीजों की खरीददारी भी बढ़ी, लेकिन इसी बच भारी बारिश ने सबकुछ तहस-नहस कर हालात बदल दिए। क्यूमो में निंबस बादलों ने नगरवासियों को हिलाकर रख दिया। इससे लोगों में शुरू में दिखा दशहरे का जोश बाद में अचानक ओझोल हो गया और व्यापारियों की उम्मीदों पर पानी फेर गया।

मार्केट्स में छाया सन्नाटा

दशहरा और बतुकम्मा फूलों का त्योहार होता है। मुख्य रूप से गेंदा, चमेली के साथ अन्य रंगीन फूलों की काफी डिमांड होती है। विजयदशमी के दिन लगभग सभी घर और कार्यालय में आयुध पूजा की परंपरा होती है और उन्हें फूलों से सजाया जाता है।

परंतु इस बार फूल, नींबू और खिलौना व्यापारियों के यहां ग्राहकों की भीड़ देखने को नहीं मिल रही है। विजयदशमी के दिन ही डिमांड बढ़ने की थोड़ी बहुत उम्मीद है। भारी बारिश और टूटे तालाबों की वजह से रिहाइशी इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से लोग दशहरा भी भूल गए हैं। जान हथेली पर लेकर बच्चों के साथ दयनीय स्थिति में समय बिताने को मजबूर हैं लोग। कब और कहां से खतरा आ टपकेगा इसको लेकर काफी डरे हुए हैं। इससे नगर के व्यापारियों पर अधिक निर्भर ग्रामीण विक्रेता और छोटे व्यापारियों की मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं।

खाली पड़े हैं शॉपिंग माल्स

त्योहारी सीजन में बच्चों में नए कपड़े खरीदने की होड़ लगी होती है। इससे दशहरा और दिवाली पर नगर के कई शॉपिंग माल्स में लोगों की भारी भीड़ हुआ करती थी। कभी-कभी तो मुख्य चौराहों पर ट्रैफिक जाम होने जैसा ग्राहकों की कतारें देखने को मिलती थीं, लेकिन इस बार दशहरे पर हालात बिल्कुल उल्टा देखने को मिल रहे हैं।

ग्राहक नहीं होने से अधिकांश शो रूम और शॉपिंग माल्स खाली-खाली हैं। जैसी की तेजी आएगी इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।  हालांकि बुराई पर अच्छाई की जीत और वनवास से पांडवों की वापसी की याद करते हुए लोग मन ही मन भगवान से अपने लिए भी अच्छे दिन प्रदान करने की मन्नत मांग रहे हैं।

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