खतरनाक भी हो सकता है स्मार्टफोन, कोरोना से बचना है तो IIT हैदराबाद के वैज्ञानिकों की इस बात पर दें ध्यान

coronavirus survives longer time smart phone screens - Sakshi Samachar

IIT हैदराबाद के वैज्ञानिकों का खुलासा 

स्मार्टफोन की स्क्रीन पर ज्यादा समय तक रहता है कोरोना

हैदराबाद : कोरोना वायरस (Coronavirus) का कहर अब भी जारी है और कई जगहों पर कोविड-19 (Covid-19) के केस में लगातार बढ़ोतरी भी देखी जा रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर मुंह और नाक से छींक की बूंदों द्वारा बाहर आया कोरोना वायरस आखिर कब तक जीवित रह सकता है? यह थोड़ा कठिन सवाल है .... क्योंकि वायरस का अस्तित्व कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे कि तापमान, उत्सर्जित वायरस की संख्या, पित्त में नमी का प्रतिशत। परंतु IIT हैदराबाद (IIT Hyderabad) के वैज्ञानिकों का कहना है कि बूंदों के माध्यम से स्मार्टफोन स्क्रीन (Smartphone screen) में प्रवेश करने वाला वायरस अन्य सभी सतहों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रह सकता है।

साथ ही उनके द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि नाक से छींक द्वारा निकली बूंदों के सूखने के बाद वायरस के फैलने की संभावना कम होती है। अध्ययन में पाया गया कि स्मार्टफोन की स्क्रीन सामान्य कांच की सतहों की तुलना में सूखने में तीन गुना अधिक समय लेती है।

वैज्ञानिकों ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि उन्होंने विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में वायरस पैदा करने वाले कोरोना वायरस के अस्तित्व को समझने के लिए एक अध्ययन किया था। हालांकि पानी की बूंदें तेजी से सूखती हैं, लार जैसे अन्य पदार्थों को सूखने में अधिक समय लग सकता है।

वैज्ञानिक शरवणन बालुस्वामी, साइक बनर्जी और कीर्ति चंद्र साहू के अनुसार, बूंदें आमतौर पर कुछ ही समय में सूख जाती हैं लेकिन अगर हवा में नमी की मात्रा अधिक होती है तो इन्हें सूखने में एक घंटे से अधिक समय लग सकता है।

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वहीं पानी या फिर इन बूंदों के सूखने का समय उस सतह पर भी निर्भर करता है जिस पर ये बूंदें गिरती हैं। लार का एक नैनोलिटर एक मिनट से भी कम समय में सूख जाता है। हमने पाया कि नमी और तापमान कम होने पर बूंदों को सूखने में अधिक समय लगता है। वहीं अगर हवा में नमी कम हो जाती है और तापमान बढ़ जाता है, तो गीलापन या फिर पानी या छींक से निकली बूंदें तेजी से सूख जाती है। '
 

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