तेलंगाना में कोरोना की चपेट में आए कई पुलिसकर्मी, परिजनों में भी बढ़ा संक्रमण का खतरा

coronavirus positive cases hyderabad police - Sakshi Samachar

पुलिस विभाग में कोरोना वायरस का कहर

चार दिन में सात कोरोना पॉजिटिव

गांधी अस्पताल से जुड़े हैं कोरोना के तार

हैदराबाद : तेलंगाना में वैसे तो कोरोना वायरस का कहर जारी ही है पर अब यह लगातार पुलिस विभाग को अपनी चपेट में ले रहा है। कोरोना अधिकारियों के साथ ही कर्मचारियों को अपनी चंगुल में ले रहा है, इस वजह से पूरे विभाग में एक अनजाने डर ने घर कर लिया है पर इसके बावजूद वे अपनी ड्यूटी निभाते नजर आ रहे हैं। वहीं पुलिस विभाग में भी अब तो लगातार कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आते जा रहे हैं। 

अब तक कोरोना वायरस से पुलिस विभाग के दस लोग संक्रमित हो चुके हैं और एक कांस्टेबल की मौत भी हो चुकी है। कोविड-19 के लक्षण वाले कई पुलिस कर्मचारी और उनके परिवारजनों की रिपोर्ट आनी बाकी है। 

शुक्रवार से सोमवार तक सात पुलिसकर्मियों के कोरोना पॉजिटिव होने की बात पता चली है। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के मामले में व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किटों की कमी और लक्षणों वाले लोगों के नमूनों का संग्रह करते समय संक्रमित होने की बात सामने आ रही है। 

जो पुलिसकर्मी मैदान में डटे हैं वे ही बने शिकार 

लॉकडाउन के समय से कई पुलिस अधिकारी व कर्मचारी रात-दिन ड्यूटी कर रहे हैं। वे लोग कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं और लोगों तक रोकथाम के क्षेत्रों में तो जरूरत की चीजें भी पहुंचा रहे हैं।

पुलिस विभाग में मुख्य रूप से दो प्रकार के अधिकारी और कर्मचारी होते हैं। जो लोग सड़कों पर आते हैं और फील्ड ड्यूटी करते हैं, साथ ही साथ जो लोग कार्यालय में काम करते हैं और देख-रेख करते हैं। अब तक कोरोना से संक्रमित वे ही अधिकारी और कर्मचारी हुए हैं जो फील्ड में है यानी मैदान पर डटे हैं। लॉकडाउन की निगरानी के लिए स्थापित की गई अधिकांश चौकियों में ड्यूटी निभा रहे पुलिस कर्मचारियों में भी कोरोना के लक्षण देखे गए। इनकी वजह से इनके परिवार के सदस्यों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ अधिकारी, उनके परिवार के सदस्य और कर्मचारियों के सहकर्मी भी इस समय होम क्वारंटाइन में है। 

जोखिम भरी है चेक पोस्ट की ड्यूटी 

लॉकडाउन के नियम लागू करने के लिए, वाहन यातायात नियमितीकरण और शाम में कर्फ्यू के कार्यान्वयन के लिए शहर में लगभग 200 चेकपोस्ट स्थापित किए गए हैं।

इनमें से, कम से कम दस लोगों ने दिन और रात के दौरान कर्तव्यों का पालन किया। इन पुलिस कर्मचारियों को लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने वाले और मास्क के बगैर बाहर आने वालों से नजदीक से बात करनी होती है। 
इस कारण से, कुछ लोगों के वायरस से संक्रमित होने का संदेह है। 
प्रवासी मजदूरों को भेजने का काम भी लॉकडाउन के मद्देनजर किया जा रहा है और पुलिस के लिए यह भी चिंता का विषय बन हुआ है क्योंकि कोरोना इस वजह से भी फैल रहा है। शहर में मर्कज के बाद प्रवासी मजदूरों के संपर्क में आने से उनके प्राइमरी और सेकेंडरी कॉंटैक्ट ज्यादा कोरोना से संक्रमित पाए जा रहे हैं। पुलिसकर्मियों को इन प्रवासी मजदूरों को भेजने के लिए उनका पंजीकरण करना पड़ रहा है, इन्हें भेजने का प्रबंध करना पड़ रहा है, और ये सब करते हुए ये लोग पीपीई किट भी नहीं पहन रहे और कोरोना इन्हें अपनी चपेट में आसानी से ले रहा है। 

बढ़ी परिजनों की चिंता 

पुलिस विभाग में कोरोना के केस बढ़ने से उनके परिवार के सदस्यों में चिंता पैदा हो गई है। वायरस के लक्षणों वाले लोगों से नमूने एकत्र करने के लिए गोशामहल के पुलिस स्टेडियम में एक विशेष लैबोरेटरी स्थापित की गई है।
पर डॉक्टरों के यहां नहीं आने और सैंपल एकत्र न करने से यह लैब उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर रहा। इसके अलावा जो पुलिस कर्मचारी गांधी अस्पताल में या फिर कंटेन्मेंट जोन में ड्यूटी कर रहे हैं, वे भी दहशत की स्थिति में काम कर रहे हैं। 

गांधी अस्पताल से जुड़े कोरोना के प्रसार के तार

पिछले महीने गांधी अस्पताल में इलाज करवा रहे कोरोना के मरीज के रिश्तेदारों ने डॉक्टर पर हमला किया था तभी से यहां की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। कुछ समय तक तो बाहर के अलावा अस्पताल के भीतर, वार्डों में भी पुलिस कर्मचारी ड्यूटी कर रहे थे। हर दिन लगभग 200 पुलिस कर्मचारी यहां तैनात थे। 

उन्हें सुरक्षात्मक उपकरण प्रदान करने में कठिनाइयाँ हुईं। पीपीई किट की कमी के कारण उन्हें इसकी आपूर्ति नहीं की जा सकी। किट केवल उन लोगों को दिए गए थे जो तब वार्डों में ड्यूटी पर थे। गांधी के अस्पताल के अन्य क्षेत्रों में, केवल जो ड्यूटी पर थे, उन्हें दस्ताने और कुछ मास्क और फेस कवर करने के लिए उपकरण दिए गए। नतीजतन, वहां काम करने वाले कई कर्मचारियों को कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया। 

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