सावधान : शहर में घूम रहे हैं कोरोना बम, घातक हो सकती है आपकी थोड़ी सी लापरवाही

Corona bombs roaming in the city little carelessness can be fatal - Sakshi Samachar

होम आइसोलेशन वालों पर नहीं रखी जा रही निगरानी

10,487 सक्रिय मामलों में 60% से अधिक होम आइसोलेशन में

बाहर सरेआम घूम रहे हैं कोरोना के मरीज   

हैदराबाद : शहर में सार्वजनिक और निजी अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड लगभग रोगियों से भरे हुए हैं। हर दिन जो कोरोना के नए केस आ रहे हैं उनके लिए अस्पतालों में बेड न होने की दुस्थिति हो गई है। ऐसी स्थिति हो गई है जहाँ सरकार भी कुछ नहीं कर पा रही है। कोरोना वायरस के गंभीर लक्षणों से पीड़ित मरीजों को ही अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है।

यह तो पता ही है कि जो मरीज कोरोना पॉजिटिव पाए जा रहे हैं पर उनमें बेहद कम व सामान्य लक्षण दिख रहे हैं उन्हें होम आइसोलेशन में रखा जा रहा है। 

वर्तमान में राज्य में 10,487 सक्रिय मामले हैं, जिनमें से 60% यानी 6,556 ऐसे करोना पीड़ित है जो होम आइसोलेशन में है। इनमें से 90% मामले ग्रेटर हैदराबाद के भीतर ही हैं।

सरकारी अस्पतालों में बेड कम होने से अधिक रोगियों को वहां नहीं रखा जा रहा और जो लोग होम आइसोलेशन में है उन लोगों के स्वास्थ्य पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी मोहल्ले के यानी बस्ती दवाखाना के डॉक्टरों को सौंपी गई है।

इन डॉक्टरों की ड्यूटी है कि ये लोग पीड़ित के घर जाएं और ICMR के नियमों के अनुसार घर में आइसोलेशन में रह रहे मरीज की सुविधा व सेहत की जांच करे। संतुष्ट होने के बाद, उन्हें आवश्यक मास्क के साथ-साथ सैनिटाइज़र और मल्टीविटामिन टैबलेट किट भी प्रदान किए जाने चाहिए।

पर देखा जा रहा है कि इन मरीजों की न सरकार को चिंता है और न ही मोहल्ले के डॉक्टरो को। इसीलिए पीड़ित खुद मेडिकल दुकानों में जाकर अपने लिए दवा खरीद रहे हैं, बाजारों मेंजाकर सब्जियां, फल और अन्य आवश्यकता चीजें खरीद रहे हैं। कोई इनकी सुध लेने वाला तक नहीं है। 

ऐसे मरीजों के हाथ पर किसी तरह का कोई स्टांप तक नहीं है तो कैसे पता चले किसी को कि ये लोग कोरोना के मरीज है। इन्हीं मरीजों से वायरस फैल रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यह हाल के मामलों में वृद्धि का एक बड़ा कारण है।

रोके गए परीक्षण 

मार्च से लेकर मई के अंत तक जीएचएमसी में 1,616 कोरोना पॉजिटिव मामले थे। जून में, 11, 080 पॉजिटिव मामले सामने आए थे। जुलाई में सिर्फ चार दिनों में, 5,109 पॉजिटिव मामले सामने आए। इनमें से 60 प्रतिशत से अधिक मामले होम आइसोलेशन के ही हैं। शेष मामले गांधी अस्पताल, किंग कोठी अस्पताल, चेस्ट अस्पताल, एर्रागड्डा, नेचर केयर और यूनानी सहित कई कॉर्पोरेट अस्पतालों के आइसोलेशन वार्डों में हैं।

वास्तव में, जब पहले कोई कोविड-19 के लक्षणों होने पर 104 पर फोन करता तो पुलिस और जीएचएमसी स्टाफ, जिसमें डॉक्टर भी शामिल थे, तुरंत उसके घर पहुंच जाते। लक्षणों वाले लोगों को स्वयं एक एम्बुलेंस में ले जाते और उसका परीक्षण करवाते। उन लोगों को क्वारेंटाइन में रखते जो पीड़ितों के करीब थे और पूरे मोहल्ले को सैनिटाइज करके आवाजाही बंद कर दी जाती।

सड़कों पर सोडियम हाइपोक्लोराइड का छिड़काव किया जाता। वहीं जैसे-जैसे मामलों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, वैसे ही कंटेन्मेंट जोन की सीमा भी सिकुड़ गई है और सोडियम हाइपोक्लोराइड के छिड़काव  को तो पूरी तरह से रोक दिया गया है।

इसके बाद, किसी व्यक्ति में कोरोना के लक्षण दिखते तो उसके घर को कंटेन्मेंट करके, उसके घर पर नोटिस लगा दी जाती थी।  वर्तमान में जीएचएमसी में प्रतिदिन औसतन 1500 से 1650 पॉजिटिव मामले आ रहे हैं। इसी समय, क्षेत्र के डॉक्टर, पुलिस और जीएचएमसी कर्मचारी भी वायरस से संक्रमित पाए जा रहे हैं, एक ही क्षेत्र में सौ से अधिक मामले दर्ज किए जाने से परीक्षण रोक दिया गया है।  लोग कह रहे हैं कि हम खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित हैं। हमारा परीक्षण करें! पर उन्हें कोई जवाब नहीं मिल रहा है। 

108 पर कॉल करने से कोई फायदा नहीं 

ग्रेटर हैदराबाद रेंज में 60 108 के वाहन हैं। शुरुआत में, इनमें से 40 वाहन कोविड मरीजों के लिए आरक्षित थे।
प्रत्येक वाहन में प्रतिदिन औसतन छह से सात मामलों को ले जाने में सक्षम है।

अब पॉजिटिव मामलों की संख्या वाहनों के अनुपात से अधिक होने के साथ ही रोगियों को अस्पताल ले जाने के मामले में उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। अब तो स्थिति यह है कि एमरजेंसी होने पर फोन किया जाए तो भी कोई जवाब नहीं मिलता। 

पीड़ित खुद अपने वाहनों में परीक्षण केंद्रों पर जा रहे हैं और परीक्षण के लिए अपने सैंपल दे रहे हैं। इस परीक्षण की रिपोर्ट तीन दिन होने पर भी आ नहीं रही है और तब तक ये लोग सामान्य नागरिकों की तरह ही बाहर घूम रहे हैं, जो खतरे की घंटी साबित हो रहा है। 

इन लोगों में से कई कोरोना पॉजिटिव हो सकते हैं, जो खुद भी नहीं जानते हैं और इस तरह यह वायरस दूसरों को फैलाते हैं। तो इसी तरह लगातार शहर में कोरोना फैलता जा रहा है और लगता है कि किसी को इसकी चिंता नहीं है। 

तो अब आप लापरवाही न करें और नियमों का पालन करें जिससे कि इस वायरस की चपेट में न आएं।

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