ब्रह्मर्षि सेवा समाज ने मनाई दिनकर जी की जयंती, पौत्री और पौत्रदामाद भी हुए शामिल

Brahmarshi Seva Samaj Celebrated Dinkarji's Birth Anniversary - Sakshi Samachar

ब्रह्मर्षि सेवा समाज द्वारा आयोजित दिनकर जी की 112वीं जयंती

दिनकर जी ने घटनाओँ का जिक्र अपनी डायरी में उल्लेख किया है

हैदराबाद : ब्रह्मर्षि सेवा समाज द्वारा आयोजित दिनकर जी की 112वीं जयंती आभासी रूप से बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस ऑनलाइन समारोह में रामधारी सिंह दिनकर की पौत्री श्रीमती कल्याणी राय और पौत्रदामाद श्री शशिकांत राय ने लुधियाना से विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम से जुड़े। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि हैदराबाद जैसे अहिंदी क्षेत्र में दिनकर जी पर ऐसा कार्यक्रम देखकर अभिभूत हूँ। उनकी पौत्री श्रीमती कल्याणी राय ने इस कार्यक्रम से जुड़ने पर हर्ष प्रकट किया। 

समाज के महासचिव श्री इंद्रदेव सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि कि कार्यक्रम 23 सितम्बर, बुधवार को आभासी रूप से सम्पन्न हुआ। जिसमें न सिर्फ़ हैदराबाद बल्कि राँची, सिमरिया, बेंगलोर, धनबाद, कोटा, लुधियाना आदि शहरों से ब्रह्मर्षियों ने भाग लिया। एक ओर जहाँ दिनकर जी के परिवार के सदस्यों ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई वही इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ उषा रानी राव (विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग, बॉल्ड्विन महिला महाविद्यालय बंगलोर, लेखिका, कवयित्री) अपने सुंदर शब्द एवं परिमार्जित भाषा में दिनकर के साहित्य की वैचारिकता पर संशोधित रूप से प्रकाश डाला। 

अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि कवि अन्वेषी होता है और दिनकर की कविताओं में शंख और बिगुल की ध्वनि गूंजती है। दिनकर जी ने कवि की उपयोगिता को अपने विचारों के माध्यम से व्यक्त किया है। मुख्य अतिथि ने कुरुक्षेत्र को एक चिंता प्रधान काव्य बताते हुए कहा कि कवि इसमें अपने काल खंड में हिंसा के प्रति चिंतित नज़र आते हैं। प्रमुख वक्ता के रूप में लेखक एवं कवि तथा माइक्रसॉफ़्ट डायरेक्टर श्री प्रवीण प्रणव ने दिनकर जी की आत्मकथा न लिखने का कारण तथा उनके व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी बातें एवं घटनाओं का ज़िक्र किया जो दिनकर जी ने अपनी डायरी और ख़तों में उल्लेख किया है। 

उन्होंने कहा कि उनके ख़त एवं डायरी उनके व्यक्तिगत जीवन के दस्तावेज है जिसमें उन्होंने निराला जी, बच्चन जी, सुमित्रानंदन पंत आदि समकालीन व्यक्तित्वों के साथ उनके सम्बन्धों की जानकारी मिलती है और इसे पढ़कर उनके आत्मकथा के क़रीब होने का एहसास मिल जाता है। दिनकर जी के अनछुये पहलुओं को छूते हुए कहा कि कि दिनकर जी ने तीन बार आत्मकथा लिखने की बात सोची परंतु कई दुविधाओं की वजह से नहीं लिख पाए। 

                               श्री शशिकांत राय .. दिनकर जी के पौत्रदामाद

कार्यक्रम की अध्यक्षता करने हेतु श्रीमती डॉ अहिल्या मिश्र ने मंच की शोभा बढ़ाई और सभी प्रतिभागियों की प्रस्तुति के लिए उनकी भूरि भूरि प्रशंसा की। उन्होंने नई पीढ़ी की सहभागिता और जोश को देखते हुए कहा कि दिनकर आज यहाँ अलग अलग पीढ़ियों में बसे हैं और हिंदी का भविष्य उज्जवल है। दिनकर की बात करते हुए उन्होंने कहा कि समरशेष की पंक्ति से आज भी उद्वेलित होना दिनकर की कालजयिता सिद्ध करती है। 

महासचिव ने कार्यक्रम का ब्योरा देते हुए बताया कि लगभग चार घंटे तक चले इस कार्यक्रम में सभी सदस्य दिनकर जी को याद कर भाव विभोर होते रहें। श्रीमती प्रियंका सिंह के सुंदर संचालन में कार्यक्रम की शुरुआत की गई। समाज के अध्यक्ष श्री सुजीत ठाकुर ने दिनकर जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण की और दीप प्रज्वलन किया तथा उपस्थित सदस्यों एवं अतिथियों के स्वागत में शब्द सुमन अर्पित किए। 

                                             डॉ अहिल्या मिश्रा

डॉ आशा मिश्रा ने कार्यक्रम के आयोजन और उद्देश्य से सदस्यों को अवगत कराते हुए कहा  कि युवा पीढ़ी को अपने वंश गौरव से परिचय कराने का श्रेय समाज को जाता है। श्रीमती ममता ठाकुर (कोटा) ने सुरीले स्वर में माँ शारदे की वंदना प्रस्तुत कर उनका आवाहन किया। श्रीमती सुधा राय (उपाध्यक्ष) ने सुंदर शब्दों में मंच पर आसीन अतिथियों का परिचय दिया। श्री जगदीश सिंह (धनबाद) ने दिनकर जी की परिचय प्रस्तुत किया और उनके साहित्य से जुड़ी बातें साझा किया। दिनकर जी के वर्तमान पड़ोसी श्री कृष्ण नंदन सिंह ने विडीओ के माध्यम से सिमारिया में दिनकर जी की पुश्तैनी मकान और उनके स्कूल का सैर करवाया जिसे देख सभी सदस्य अभिभूत हो गए। 

कार्यक्रम की अगली कड़ी में समाज के सदस्यों ने दिनकर की रचनाओं का पाठ किया और आलेख प्रस्तुत किए। श्री तिरुपति राय ने ओजपूर्ण शब्दों में ‘आज यूँ कहने लगा मुझसे गगन का चाँद’ कविता का पाठ किया। एक ओर जहाँ मास्टर अचल ने ‘कलम आज उनकी जय बोल’, लविका ने ‘चूहे की दिल्ली यात्रा’, आन्या सिंह ने ‘कृष्ण की चेतावनी’, कुशाग्र ने ‘मिर्च का मज़ा’, लहर राय ने ‘जीयो जीयो ए हिंदुस्तान’, आद्विक़ व अविनाश ने ‘सबकी दुनियाँ एक है’, जागृति मेघवर्ण ने ‘शौर्य का आह्वान’, ख्याति आनंद ने ‘आग की भीख’, आराध्या मिश्रा ने ‘सूरज का ब्याह’ और मास्टर अभिराम शर्मा ने दिनकर की कविता का पाठ कर वाहवाही लूटी। 

                              कल्याणी राय - दिनकर जी की पौत्री

इसी क्रम में श्रीमती भारती सिंह ‘बालिका वधू’, प्रतिभा सिंह ‘कोई अर्थ नहीं’, डॉ किरण कुमारी (राँची) ‘परदेशी’, श्रीमती रूपम सिंह ‘वीर’, श्रीमती श्वेता राय ‘परशुराम की प्रतीक्षा’, श्रीमती रागिनी सिन्हा (महिला अध्यक्षा) ‘सिंहासन ख़ाली करो कि जनता आती है’, श्रीमती अनीता राय ‘उर्वशी का एक अंश’, और नीतू कुमार ने ‘समर शेष है’ कविता को स्वर देकर कार्यक्रम को दिनकरमयी बनाया और सराहना की पात्र बनीं और। श्री आर एस शर्मा ने ‘कुरुक्षेत्र आधुनिक गीता’ शीर्षक के अंतर्गत अपने विचार रखे और स्वाति (धनबाद) ने दिनकर के काव्यधारा पर वक्तव्य प्रस्तुत कीं। श्रीमती उषा शर्मा और वैष्णवी ने दिनकर पर स्वरचित काव्य प्रस्तुत किया। श्रीमती गीतू शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। 

अवसर पर समाज के वरिष्ठ सदस्या श्रीमती धर्मशीला सिंह के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्र्द्धांजलि भी अर्पित की गई। कोषाध्यक्ष श्री पंकज कुमार ने तकनीकी कार्य का दायित्व सम्भाला। श्री मनवेंद्र मिश्रा एवं गोविंद जी राय के साथ श्री सह सचिव श्री रंजीत शुक्ला श्रीमती विधात्री सिंह, श्री हरेन्द्र सिन्हा व श्वेता सिन्हा (बंगलोर), गोपेश कुमार (पटना) आदि ने कार्यक्रम से जुड़े प्रतिभागियों का हौसलाफ़जायी कर कार्यक्रम को सार्थक बनाया। इसके अतिरिक्त जे एन सिंह, अमृता सिंह, अभ्युदय, गीता शास्त्री, पिंकी कुमारी, डी के शर्मा, मानसी सिंह, सूर्यनारायण राय, संध्या राय, प्रेमशंकर सिंह, विजया पांडे, कृष्ण मंडन राय, गरिमा आनंद, निवेदिता , अंकिता राय, मीतू शर्मा, अर्चना कुमारी, नवीना कुमारी, अजीत कुमार, आर्यन, ए कुमार आदि कार्यक्रम से जुड़े और अंत तक बने रहकर इसे सफल बनाया। 

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