इन पांच कारणों से GHMC इलाके में धुंआधार तरीके से बढ़ रहा कोरोना, सरकार से ज्यादा उम्मीद कर रहे लोग

this are five reasons why corona cases are increasing rapidly in Hyderabad - Sakshi Samachar

तेलंगाना में कोरोना वायरस का उग्र रूप दिख रहा है 

हर दिन बढ़ रही है कोरोना के नए मामलों की संख्या

हैदराबाद में कोरोना बढ़ने के ये है पांच कारण 

हैदराबाद :  कोरोना वायरस का कहर जहां पूरे देश में है वहीं कुछ ऐसे राज्य भी है जहां शुरुआती दौर में कोरोना केस बेहद कम थे, एक समय तो ऐसा भी आया था जब लग रहा था कि अब बस राज्य कोरोना मुक्त होने को है और फिर वक्त के साथ ये बढ़ते गए और अब तो चिंता का कारण बन गए हैं।  

ऐसे राज्य में तेलंगाना का नाम आता है और राजधानी हैदराबाद तो जैसे अब कोरोना का गढ़ ही बन गई है। एक ऐसा भी समय था जब तेलंगाना में कोरोना का आंकड़ा 10 को छू भी नहीं रहा था और अब ऐसा समय आ गया है जहां यह हर दिन बढ़ रहा है और अब तो 800 -900 से ज्यादा केस हर दिन आ रहे हैं। 

वहीं राज्य भर में सबसे ज्यादा केस हैदराबाद से ही आ रहे हैं और अब तो हैदराबादी इतने डर गए हैं कोरोना से कि स्वेच्छा से लॉकडाउन भी कर रहे हैं ताकि कोरोना के संक्रमण पर लगाम लगाई जा सके। 

अब शहर के कई बड़े मार्केट स्वेच्छा से लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं जिनमें बेगम बाजार का किराना मार्केट, उस्मान गंज मार्केट, प्लास्टिक मार्केट, तुरुप बाजार, सिकंदराबाद का जनरल बाजार, चारमीनार, पत्थरगट्टी, लाड बाजार आदि शामिल है। 

ऐसे में यहां सवाल यह उठता है कि आखिर हैदराबाद में कोरोना पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है? क्यों कोरोना हैदराबाद में इतनी तेजी से फैल रहा है? आखिर वो क्या कारण है जिनकी वजह से कोरोना इतनी तेजी से फल-फूल रहा है ? 

तो आइये यहां यही पड़ताल करते हैं कि कोरोना हैदराबाद में क्यों विकराल रूप धारण कर रहा है ........

1. सबसे बड़ा कारण है कम परीक्षण 

कोरोना के कम परीक्षण की जब बात की जाए तो तेलंगाना का नाम जरूर लिया जाता है। विपक्ष भी राज्य सरकार पर आरोप लगाता रहा है कि यहां छोटे से छोटे राज्य से भी कम परीक्षण किए जा रहे हैं और इसीलिए यह फैल रहा है।  वहीं राज्य सरकार हमेशा से यही कह रही है कि वह ICMR के दिशानिर्देशों का पालन कर रही है और आवश्यकता अनुसार परीक्षण किए जा रहे हैं। 

देखा जाए तो तेलंगाना में कोरोना की परीक्षण संख्या पर काफी दिनों तक गोपनीयता बनाए रखने के बाद, राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने कई दिनों बाद इससे जुड़ी जानकारी साझा की।  अप्रैल तक तो स्थिति यह थी कि तेलंगाना में लगभग प्रति दिन 200 से कुछ ही अधिक परीक्षण हो रहे थे, जो दक्षिणी भारत के राज्यों में सबसे कम है।  मई के पहले दो हफ्तों में यहां लगभग 3,500 परीक्षण किए गए, वह भी तब, जब राजधानी हैदराबाद को केंद्र ने कोरोना वायरस हॉटस्पॉट घोषित कर दिया था। 

इसके विपरीत पड़ोसी आंध्र प्रदेश में 12,000 से अधिक व्यक्ति / दिन परीक्षण कर रहे हैं और निम्न मृत्यु दर को बनाए रखने के लिए रैंप-अप परीक्षण भी कर रहे हैं। जबकि हैदराबाद में ऐसा कुछ नहीं हो रहा।  देखा जाए तो दक्षिण के राज्यों में सबसे कम परीक्षण करने वाला राज्य तेलंगाना ही है जिसकी राजधानी में कोरोना का उग्र रूप साफ देखा जा सकता है। 

2. लॉकडाउन के दौरान भी हुआ नियमों का उल्लंघन 

लॉकडाउन के दौरान जहां सख्ती की जानी चाहिए थी वहीं ढील दी गई, लोग आराम से यहां-वहां आ-जा रहे थे। पुराने शहर के कई इलाकों में तो आलम यह था कि लोग ही अपने मोहल्लों को बंद कर रहे थे पर प्रशासन की ओर से सख्ती की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही थी। 

कई मोहल्लों को देखकर लग ही नहीं रहा था कि लॉकडाउन लगा हुआ है। ऐसे में भी जमकर कोरोना का प्रसार हुआ और अब आलम यह है कि इस पर काबू पाना सरकार के बस की बात भी नहीं रही। अगर लॉकडाउन के समय सख्ती की जाती तो शायद आज हालात कुछ और होते। 

3. कंटेन्मेंट जोन में भी वैसी सख्ती नहीं थी, जैसी होनी चाहिए 

कोरोना केस जहां से अधिक दर्ज होते हैं उस जगह को कंटेन्मेंट जोन घोषित कर दिया जाता है और वहां आने-जाने की मनाही होती है। पूरे इलाके को सैनिटाइज करके बंद कर दिया जाता है। पर हैदराबाद के कंटेन्मेंट जोन में भी वैसी सख्ती नहीं की गई थी जैसी होनी चाहिए। तभी तो जियागुडा के कंटेन्मेंट जोन से एक कोरोना पॉजिटिव महिला चलकर पुराने पुल के स्टेट बैंक पहुंच गई और फिर बैंक कर्मचारियों तक कोरोना पहुंच गया। 

जियागुडा के कई इलाके कंटेन्मेंट घोषित किए गए थे तो सवाल यह उठता है कि वहां के लोग कैसे दूसरे इलाकों में आ-जा रहे थे? क्यों उनकी आवाजाही को नहीं रोका गया? कैसे जियागुडा के लोग पहाड़ी शरीफ के रिश्तेदार के यहां पार्टी में पहुंचे और फिर वहां कोरोना केस बढ़ गए। 

अगर कंटेन्मेंट जोन में उचित सख्ती बरती जाती तो क्या ऐसा हो पाता? बिलकुल नहीं, तो यह भी एक चूक है जिसकी वजह से  कोरोना इतना फैल गया।

4. लॉकडाउन के बाद तेजी से बढ़ने लगे केस 

लॉकडाउन में जैसे ही ढील दी गई वैसे ही कोरोना केस का ग्राफ भी ऊपर की ओर बढ़ने लगा। लोग समझने लगे जैसे अब सब कुछ ठीक है। इसके बाद शुरू हुआ एकदूसरे के यहां आना-जाना, फंक्शन, पार्टी, रिसेप्शन आदि और कोरोना केस में दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्की होने लगी।  हर कोई अपने रिश्ते-नाते निभाने में लग गया और कोरोना का प्रसार बढ़ता ही गया जो अब भी रुकने का नाम नहीं ले रहा। 

5. लोगों की लापरवाही बनी सबसे बड़ा कारण 

देश की तरह ही तेलंगाना राज्य में भी कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के पीछे मुख्य कारण लोगों की लापरवाही ही है। पिछले सौ दिनों के दौरान कोविड -19 मामलों की स्थिति पर एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण किया गया है। सर्वेक्षण में पता चला है कि लॉकडाउन उल्लंघन के कारण कोविड-19 के मामलों में वृद्धि हुई है।

जैसे-जैसे विभिन्न चरणों में लॉकडाउन में ढील दी गई वैसे-वैसे लोगों ने नियमों का उल्लंघन करना शुरू कर दिया। जहां लोग मास्क लगाकर बाहर नहीं निकल रहे, वहीं लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य नियमों की अनदेखी भी की। लोग बाजारों में भीड़ लगाते भी देखे गए।  लॉकडाउन के नियमों का पालन किए बिना लोगों के घूमने-फिरने से वायरस जंगल की आग की तरह फैल गया जिस पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है। 

चिकित्सा विशेषज्ञों ने उल्लेख किया है कि जिन शहरों में लॉकडाउन दिशानिर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया है, वहां कोरोना वायरस मामलों में वृद्धि देखी गई है और स्थिति खराब से बदतर होती जा रही है।

तेलंगाना में भी लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में कोरोना वायरस को नियंत्रित कर सकते थे लेकिन जैसे-जैसे चरणों में नियमों में ढील दी गई, वैसे-वैसे राज्य विशेषकर हैदराबाद में मामले बढ़ते गए।

शहर को जून के पहले सप्ताह में सामान्य जीवन के लिए बहाल किया गया था। सरकार और अधिकारियों ने भी इन दिनों निवारक उपायों और प्रतिबंधों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। पर इसके लिए भी अकेले सरकार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है क्योंकि जनता ने भी गैर जिम्मेदाराना व्यवहार किया है।

अब भी लोग मामलों में वृद्धि के बावजूद निवारक उपायों का पालन नहीं कर रहे हैं जिसका नतीजा सामने है। अब तो क्या आम क्या खास सब कोरोना की चपेट मे आने लगे हैं। तेलंगाना के कई विधायक व गृह मंत्री खुद कोरोना पॉजिटिव पाए गए। ऐसे में हम समझ सकते हैं कि स्थिति कितनी गंभीर है। 

 चिकित्सा विशेषज्ञों ने तो चेतावनी भी दी है कि यदि लोग मास्क का इस्तेमाल किए बिना यूं ही बाहर निकलते रहेंगे, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करेंगे तो स्थिति और भी खराब हो जाएगी। 

तो अब सरकार के साथ ही लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझकर नियमों का पालन करना चाहिए जिससे कि कोरोना के प्रसार पर रोक लग सके। 

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                                      ..............मीता,  सीनियर सब-एडिटर-सीनियर रिपोर्टर,  साक्षी समाचार

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