हिंदी दिवस विषयक कादंबिनी क्लब की 338वीं मासिक गोष्ठी संपन्न

338th monthly seminar of kadambini club concluded - Sakshi Samachar

एक दूसरे की अंतर की भाषा से अभिभूत

हिंदी भाषा प्यारी है यह सबसे न्यारी है

हैदराबाद : कादंबिनी क्लब हैदराबाद की ओर से अवधेश कुमार सिन्हा (नई दिल्ली) की अध्यक्षता में वर्चुअल मासिक गोष्ठी का सफल आयोजन हुआ। प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए क्लब अध्यक्षा डॉ अहिल्या मिश्र एवं कार्यकारी संयोजिका मीना मुथा ने आगे बताया कि क़ोरोना के संकट काल में क्लब ने विगत 6 माह से आभासी तकनीक के माध्यम से अपने गोष्ठियों को निरंतर जारी रखा है। शुभ्रा महंतो द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। डॉ अहिल्या मिश्र ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि ऑनलाइन के माध्यम से हम एक दूसरे को देख पा रहे हैं, एक दूसरे की अंतर की भाषा से अभिभूत हो रहे हैं, यह सुकून की बात है।  

उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी दिवस केवल एक दिन नहीं बल्कि पूरे 365 दिवस मनाया जाए। हिंदी स्वतंत्रता प्राप्ति का माध्यम रही है। यह हमारी अस्मिता और शान है। तत्पश्चात डॉ रुद्रनाथ मिश्र (राजभाषा अधिकारी एनएमडीसी) ने हिंदी दिवस पर अपने वक्तव्य में कहा कि सरकारी कार्यालयों में राजभाषा का काम निरंतर जारी रहता है। 1953 से हिंदी दिवस मनाया जा रहा है।

हिंदी में बहुत अच्छा साहित्य उपलब्ध है पर तकनीकी लेखन का प्रमाण अल्प है। तकनीकी साहित्य को बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी बनती है। सरकारी उपक्रमों में एनएमडीसी को कई पुरस्कार मिले हैं। कई प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। जरूरत है कि तकनीकी ज्ञान का प्रचार प्रसार हिंदी में किया जाए। सोशल मीडिया फेसबुक ट्विटर पर हिंदी में संदेश प्रसारित हो रहे हैं। अब राजभाषा का प्रचार साहित्य तक ही सीमित नहीं रहा है। 

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हिंदी भाषा प्यारी

तत्पश्चात कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रवीण प्रणव के संचालन में ही दूसरा सत्र भी विभिन्न कवियों के साथ हिंदी दिवस की महत्ता और अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए, विभिन्न रचनाओं को श्रवण करते हुए आयोजित किया गया। भावना पुरोहित ने ‘कविता क्या है कवि ह्रदय के शब्द गुथन’, दर्शन सिंग ने ‘दूर से खड़कने की आवाज आई’, ज्योति नारायण ने ‘छू लिया है जिसने हिमालय उस हिमालय का है ताज हिंदी’, डॉ गीता जांगिड़ ने ‘कुछ गीत जिन्हें हम चुनते हैं’, उषा शर्मा ने ‘हिंदी भाषा प्यारी है यह सबसे न्यारी है’, सुहास भटनागर ने मैं एक कहानी वाला हूं हिंदी मेरी किरदार’, प्रदीप भट्ट ने ‘तू जितने चाहे सपने बुन पहले मेरी बातें सुन’ आदि रचनाओं प्रस्तुति दी गई। 

हिंदी मां हमारी

इसी क्रम में रमाकांत श्रीवास्तव ने छत्तीसगढ़ी रचना प्रस्तुत की। सुनीता लुल्ला ने ‘है बहुत उपलब्धियाँ अब दूर कितना आ गए’, सत्यनारायण काकड़ा ने ‘एक दिन मैं अपनी पत्नी को बाइक पर बिठाकर मायके छोड़ने जा रहा था’, गजानंद पांडे ने ‘पेट का सब खेल है’, चंद्रप्रकाश दायमा ने ‘डर जिसके लंबे लंबे दांत हैं’, भंवरलाल उपाध्याय ने ‘सुकरात कब विचलित हुए थे विष पान से’, संतोष कुमार राजा ने ‘सुनो हिंदुस्तान वालों ये हिंदी मां हमारी है’, संदीप ने ‘पत्ता सोचता है हमेशा मैं क्यों नहीं हूं फूल’, रुचि जैन ने मां सरस्वती पर रचना सुनाई। मीना मुथा ने हाईकु, प्रवीण प्रणव ने ‘हां मेरी आंखों में अंधेरा है पर मेरे सपनों में नहीं’, डॉ अहिल्या मिश्र ने ‘हिंदी वही सदा हिंदी भारत के भाल की’, रचनाओं की प्रस्तुति दीं। 

हिंदी दिवस

अवधेश कुमार सिन्हा ने अध्यक्षीय टिप्पणी में कहा कि प्रथम सत्र में डॉ रुद्रनाथ ने हिंदी के तकनीकी साहित्य को लेकर कुछ चिंता व्यक्त की है। हिंदी दिवस एक दिन का उत्सव नहीं होना चाहिए। सरकारी कार्यालयों में एक ही अंग्रेजी शब्द के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हिंदी शब्द है। इसका मानक भी निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की कवि गोष्ठी में विभिन्न रचनाओं का पाठ हुआ है। सभी सदस्यों ने अपने भाव प्रकट करने का सफल प्रयास किया है। 

डॉ अहिल्या मिश्र प्रेरणा स्तंभ की तरह संस्था को निरंतर आगे ले जाने का सफल प्रयास कर रही हैं। कोई भी व्यवधान पर वह रास्ता निकाल लेती हैं। प्रवीण प्रणव भी तकनीकी माध्यम से हम सभी को प्रतिमाह जोड़े रख रहे हैं। उन्होंने सुंदर संचालन के लिए बधाई दी। अवधेश कुमार सिन्हा ने ‘मार्केट वाला लड़का’ लघुकथा प्रस्तुत किया। 

श्रद्धांजलि

वर्तमान हालातों को दर्शाते इस कथा से सभी अत्यंत भावुक हो गए। अति शिघ्र, जीवन सुस्थिर हो जाए इसकी सभी ने कामना की। अवसर पर स्वर्गीय अमी आधार निडर, ए जी आई चैप्टर आगरा के संयोजक व कार्यकर्ता एवं रवि वैद्य जी के पिताजी के दुखद निधन पर क्लब की ओर से श्रद्धांजलि व्यक्त की गई । मदन देवी पोकरणा ने कहा कि संस्था की गतिविधियों से जुड़े रहना मुझे अच्छा लगता है ।

शिल्पी भटनागर की उपस्थिति भी रही। प्रविणजी ने कहा कि इस आभासी तकनीक के जरिये हमें आगे भी कुछ समय जुड़े रहना आवश्यक है। कलब की निरंतरता में सभी सदस्यों की भागीदारी है। लॉकडाउन के समय में भी कई रचनाकार गतिशील हैं। संपादक नीरज कुमार सिन्हा द्वारा संपादित ‘साहित्य वंदन’ के साझा संकलन हेतु भी क्लब की ओर से बधाई दी गई। इसमें सम्मिलित रचनाकार डॉ दया कृष्ण गोयल, भावना मयूर पुरोहित, दर्शन सिंग, रेणु अग्रवाल, संतोष रजा गाजीपुरी को क्लब की ओर से बधाई दी गई। मीना मुथा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अवधेश सिन्हा, प्रवीण प्रणव, डॉ रुद्रनाथ मिश्र, डॉ अहिल्या मिश्र व ऑनलाइन पर उपस्थिति दे रहे सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। 

 

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