आंध्र प्रदेश सरकार को अब सलाह देने लगे KCR, जानिए क्या कुछ कहा

CM KCR Fires on Andhra Pradesh Government Over Irrigation Project Issue - Sakshi Samachar

केसीआर के पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश पर बदलते तेवर

केसीआर ने जल बंटवारे पर लगाये हैं आरोप

हैदराबाद : अपनी योजनाओं पर ध्यान न देकर तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर आंध्र प्रदेश की जनप्रिय योजनाओं पर टिप्पणी कर रहे हैं। उन्होंने सोमवार को आंध्र प्रदेश की सिंचाई परियोजना पर बयान दिया है। तेलंगाना की परियोजनाओं की बात न करके केसीआर अब आंध्र प्रदेश की योजनाओं की चर्चा कर रहे हैं, जिसको पूरे देश में सराहा जा रहा है।

केसीआर ने कहा, "मैंने स्वयं आंध्र प्रदेश सरकार के बढ़ों को घर पर आमंत्रित किया और पीढ़ा (तेलुगू-पीटा) डालकर खाना खिलाया।" इस दौरान सिंचाई क्षेत्र से संबंधित मामलों पर चर्चा की। दोनों राज्यों के किसान के हितों की रक्षा के लिए परियोजनाओं का निर्माण करने की सलाह दी। समुद्र में बेकार बह जा रहे नदी जल का सदुपयोग करने के लिए कार्य योजना बनाने की सलाह भी दी। तेलंगाना सरकार की ओर से इस प्रकार सकारात्मक रुख प्रकट करने के बावजूद एपी सरकार जानबूझकर सिंचाई परिणामों को लेकर विवाद खड़ा कर रही है। तेलंगाना की परियोजनाओं के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगा रही है। एपेक्स काउंसिल की बैठक के दौरान एपी सरकार को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने सोमवार को प्रगति भवन में उच्च स्तरीय बैठक में एपेक्स काउंसिल में अपनाई जाने वाली राज्य सरकार की रणनीति पर सिंचाई अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की। बैठक के दौरान केसीआर ने राज्य में निर्माणाधीन परियोजनाओं से संबंधित मामलों का गहन अध्ययन किया। केंद्र और एपी सरकार उनके रुख पर भी चर्चा की। केसीआर ने कहा कि तेलंगाना की परियोजनाओं को लेकर केंद्र सरकार का रवैया भी गलत है। तेलंगाना सरकार न्यायिक हिस्से के अनुसार ही परियोजना का निर्माण कर रही है।

मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने केंद्र सरकार और पड़ोसी आंध्र प्रदेश सरकार पर कहा कि तेलंगाना में निर्माणाधीन परियोजनाओं को लेकर एपी सरकार अर्थहीन, बेबुनियाद और अनावश्यक हंगामा खड़ा कर रही है। साथ ही कहा कि जल विवाद पर केंद्र सरकार की नीति भी गलत है। उन्होंने तेलंगाना की परियोजना के खिलाफ एपी सरकार द्वारा शिकायत किए जाने पर टिप्पणी व्यक्त करते हुए कहा कि शीघ्र ही होने वाली एपेक्स काउंसिल की बैठक में तेलंगाना का पक्ष मजबूती से रखने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और एपी सरकार को भी इस मामले में मजबूत जवाब देने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि एपेक्स काउंसिल की बैठक में सिंचाई परियोजना के निर्माण से संबंधित तथ्य और संपूर्ण जानकारी पेश की जाएगी।

उन्होंने कहा कि तेलंगाना गठन के बाद जल आवंटन की अनुमति प्राप्त होने के बाद निर्माण शुरू किए गया। अब आपत्तियां जताना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि श्रीशैलम से नागार्जुन सागर को पानी छोड़ने को लेकर भी केंद्र सरकार अनावश्यक आपत्ति जता रही है। वास्तव में देखा जाए तो पहले नागार्जुन सागर जलाशय को पानी से भरने के बाद ही अन्य परियोजनाओं को पानी देना चाहिए। श्रीशैलम सिंचाई परियोजना नहीं है, बल्कि जल विद्युत परियोजना है। केंद्र सरकार भी सभी तथ्यों को भूलकर आपत्तियां जता रही है। केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के अधिकारियों का हनन कर रही है।

उन्होंने बताया कि गोदावरी और कृष्णा नदी परिवाहक क्षेतों में तेलंगाना सरकार राज्य के हक के अनुसार ही परियोजना का निर्माण किया जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग सहित अन्य संस्थाओं से अनुमति मिलने के बाद ही परियोजनाओं का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। अब तक लगभग तीन हजार करोड़ रुपये भी खर्च खर्च किए गए हैं। इन परियोजना के निर्माण के लिए 5 एकड़ भूमि का अधिग्रहण भी किया गया है। इतना काम होने के बाद अब इन परियोजनाओं को नई परियोजनाओं के रूप में बताने का कोई औचित्य नहीं है।

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि एकीकृत आंध्रप्रदेश में ही इन योजनाओं को अनुमति मिली थी। मगर निर्माण कार्यों को पूरा नहीं किया गया। कई परियोजनाओं के डिजाइन जरूरतों के अनुसार नहीं किया गया। इसी कारण तेलंगाना गठन होने के बाद अपने जरूरतों व जल आवंटन के अनुसार ही परियोजनाओं की रिडिजाइनिंग कर निर्माण किया जा रहा है। अब इस कार्यों को गलत ठहराने का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने बताया कि तेलंगाना के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ ही पृथक तेलंगाना आंदोलन आया था।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्राणहिता-चेवेल्ला परियोजना का रिडिजाइन कर कालेश्वरम, कंतनप्पल्ली परियोजना कारीडिजाइन कर सम्मक्का सागर, राजीव सागर, इंदिरा सागर का रीडिजाइन कर सीतारामा परियोजना, दुम्मुगुडेम परियोजना का रीडिजाइन कर, सीताम्मा सागर का निर्माण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पेनगंगा परियोजना को लेकर साल 1975 में ही समझौता हुआ और अवार्ड भी मिल चुकी है। उन्होंने इन सभी परियोजनाओं को कब मंजूरी मिली, कब अनुमति मिली, तेलंगाना गठन के समय से अब तक इन योजनाओं पर कितने रुपए खर्च किए, कितने एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया है, इन सभी सरकारी आदेशों के साथ एपेक्स काउंसिल में शिकायत करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देने का आदेश से अधिकारियों को दिया है।

एपेक्स काउंसिल की बैठक में सरकार ने लिया। एकीकृत आंध्रप्रदेश के दौरान जल आवंटन मांग करने के समय तेलंगाना क्षेत्र की जरूरत और जरूरतों को ध्यान में रख नहीं रखने की बात जानकर ट्रिब्यूनल ने ही तेलंगाना के लिए विशेष जल आवंटन किया तेलंगाना गठन के बाद एक ही खुद आंध्र प्रदेश में शुरू की गई जुराला मिट्टी में पाडु कलवाकूर्ति बीमा कोइल सागर आदि परियोजना को पूरा किया गया इसके अलावा करने के लिए अतिरिक्त निधियां खर्च का निर्माण किया गया

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के बाद जलआवंटन के अनुसार ही परियोजनाओं का निर्माण किया जा रहा है। वास्तव में देखा जाए, तो तेलंगाना को और जल की आवश्यकता है। गोदावरी बचत जल में से तेलंगाना को एक हजार टीएमसी मिलना चाहिए। गोदावरी नदी का परिवाहन क्षेत्र तेलंगाना में अधिक है। गोदावरी नदी का अधिक बहाव भी तेलंगाना में होता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए समुद्र में बहने वाले दो हजार टीएमसी जल में से तेलंगाना को एक टीएमसी जल का आवंटन किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।

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