दुब्बाका उपचुनाव : जानिए भाजपा की जीत का प्लान, जिसके जरिए देना चाहती है TRS को मात

 BJP Plan for Victory in Dubbaka By Election against TRS - Sakshi Samachar

टीआरएस बनाम भाजपा....

हिन्दुओं के प्रति केसीआर की अनदेखी...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का असर...

सिद्दीपेट : 2023 के आम चुनाव में तेलंगाना में सत्ता हासिल करने का सपना लेकर चल रही भारतीय जनता पार्टी के लिए दुब्बाका उपचुनाव किसी परीक्षा से कम नहीं है। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी के चार सांसदों के जीत को अन्य राजनीतिक दल यह कहकर उसे हल्के में ले रहे हैं  कि भाजपा को संयोग से चार सीटें मिली हैं। 

ऐसे में टीआरएस और कांग्रेस पार्टी की आलोचना का मुंहतोड़ जवाब देना है तो भाजपा के लिए दुब्बाका उपचुनाव जीतना अनिवार्य है। हालांकि भाजपा नेताओं को दुब्बाका में जीत की उम्मीद है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मानें तो 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत आसान नहीं होने, कांग्रेस के चुनावी रेस से दूर रहने तथा 2023 के चुनाव में तेलंगाना में टीआरएस का विकल्प बनने जैसी बातें साबित करने और नेतृत्व परिवर्तन का असर दिखाने के लिए दुब्बाका उपचुनाव में पार्टी की जीत अतिआवश्यक है।

टीआरएस बनाम भाजपा....

छह-सात महीने का कार्यकाल बचे होने के बावजूद विभिन्न कारणों से विधानसभा को भंग कर दिसंबर 2018 में चुनाव करा चुके तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने 80 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की थी, परंतु उसके बाद हुए आम चुनाव में 16 लोकसभा सीटें जीतने का दावा कर चुकी टीआरएस को भाजपा ने करारा झटका दिया। 2018 में सिर्फ एक विधानसभा सीट जीतने वाली भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में एक साथ चार सीटों पर जीत दर्ज की। इसका मतलब 30 से अधिक विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी का असर दिखा। ऐसा लगता है कि लोकसभा चुनाव के बाद से भाजपा राज्य में टीआरएस का विकल्प बनकर उभर रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में टीआरएस बनाम कांग्रेस था, लेकिन इस बार टीआरएस बनाम भाजपा में तब्दील करने के लिए पार्टी के नेता भरसक प्रयास कर हैं।

हिन्दुओं के प्रति केसीआर की अनदेखी...

पिछले दिनों तेलंगाना भाजपा नेतृत्व में बदलाव, पार्टी का कमान जोशीले नेताओं के हाथ में होने जैसे कई कारण हैं। सबसे महत्वपूर्ण तेलंगाना में हिन्दुओं व हिन्दू त्योहारों के प्रति केसीआर सरकार पर उदासीन रुख अपने का आरोप लगाते हुए तेलंगाना के भाजपा अध्यक्ष बंडी संजय, सांसद धर्मपुरी अरविंद, विधायक राजा सिंह और दुब्बाका से पार्टी के उम्मीदवार रघुनंदन राव  इस मुद्दे को लोगों के बीच ले जाने का हर संभाव प्रयास कर रहे हैं।  सोशल मीडिया के जरिए भी स्थानीय कैडर इन मुद्दों को लोगों के बीच पहुंचा रहा है। तेलंगाना में वोट बैंक में तब्दील हुए अन्य वर्गों के मुकाबले हिन्दू वोट बैंक को संगठित करने के उद्देश्य यहां के भाजपा नेताओं में साफ देखने को मिल रहा है।

दूसरी तरफ, दुब्बाका सीट से दो बार चुनाव हार चुके भाजपा नेता रघुनंदन राव इस बार उपचुनाव में फायदा उठाने की हर संभव कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि टीआरएस का गढ़ रहे तुब्बाका में जीतने पर उसका असर राज्यभर में दिखेगा। आमतौर पर भाजपा में उम्मीदवार की चयन प्रक्रिया काफी पेचीदा होती है। पार्टी चुनाव कमेटी की बैठक में सिर्फ तीन नेताओं के नाम चुनाकर राष्ट्रीय नेतृत्व के पास भेजा जाता है, जहां विस्तृत चर्चा के बाद किसी एक नेता को उम्मीदवार चुना जाता है, परंतु यहां स्थिति कुछ अलग है। टीआरएस नेता रामलिंगा रेड्डी से लगातार दो बार हार चुके रघुनंदन राव को फिर से टिकट दिया गया है। यही वजह है कि चुनाव से पहले दुब्बाका निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा मजबूत होती आ रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का असर...

उधर, विगत चुनाव में यहां से टीआरएस के टिकट पर जीतने वाले सोलीपेटा रामरिंगा रेड्डी की अकाल मृत्यु के कारण यहां उपचुनाव कराए जा रहे हैं। सत्ता के साथ टीआरएस को सहानुभूति मिलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन भाजपा नेताओं का कहना है कि नारायण खेड़ जैसे उपचुनाव में वोटरों पर सहानुभूति का कोई असर नहीं पड़ा था। अगर यही बात सही है तो दो बार चुनाव लड़कर हारने वाले रघुनंदन राव भाजपा के उम्मीदवार होंगे तो उनके लिए भी यह नियम लागू होता है। 

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भाजपा नेताओं का कहना है कि सहानुभूति का दौर खत्म हो चुका है और वोटर जागरूक हो गया है। कोरोना नियंत्रण में फेल और दुब्बाका के लोगों को पिछले छह साल में पहली बार पेंशन भुगतान, भूमि मुआवजा जैसे मुद्दों के साथ रघुनंदन राव के चुनाव मैदान में उतरने पर भाजपा की जीत आसान हो जाएगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन भी फायदा मिलेगा।

आंध्रा का उदाहरण देकर...

मुख्य रूप से कोरोना मामलों को नियंत्रित करने में केसीआर सरकार के विफल होने की खबरें हैं। विपक्षी दल आंध्र प्रदेश को उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए टीआरएस के शासन पर आग उगल रहे हैं। हैदराबाद एक फार्म हब होने के बावजूद तेलंगाना में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ने के पीछे केसीआर सरकार की विफलता बताई जा रही है। इसका पूरे तेलंगाना पर असर देखा जा रहा है और दुब्बाका चुनाव में स्थानीय समस्याओं की बदौलत भाजपा के जीतने के दावा किए जा रहे हैं। यही नहीं, प्रोजेक्ट्स के लिए अधिग्रहित जमीनों का दुब्बाका के किसानों को कम मुआवजा देने के भी आरोप लगे थे।

भाजपा नेताओं ने लगाया जोर...
भाजपा नेताओं का कहना है कि पड़ोसी सिद्दीपेट और गजवेल निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को प्रति एकड़ 30 से 50 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया, जबकि दुब्बाका में 15 लाख से कम मुआवजा दिया गया है। इसको लेकर यहां के लोगों में सरकार के प्रति खासी नाराजगी है। इसके अलावा सोलीपेट परिवार के खिलाफ जारी विरोधी लहर जैसे मुद्दे भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होंगे। 
उसी तरह, दूसरी बार केंद्र में लौटने के बाद से लिए गए अनेक फैसले भी भाजपा के लिए वोट बटोर सकते हैं। कुल मिलाकर दुब्बाका जैसी जगहों पर जीत के जरिए इधर टीआरएस और उधर कांग्रेस का विकल्प बनने के लिए प्लान तैयार कर रहे भाजपा नेता, चार संसदीय सीट जीतकर अपना दबदबा बना चुके भाजपा नेता, उसे आगे भी बनाए रखना चाहते हैं।

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