बॉक्सिंग से लेकर फिल्मों में एक्टिंग तक, स्टार्स से है अच्छी दोस्ती, जानिए कैसे हैं विजेंदर

Special Story On Vijender Singh Birthday  - Sakshi Samachar

विजेंदर सिंह का मुक्केबाजी का सफर

विजेंदर ने ऐसे रचा इतिहास

पेशेवर मुक्केबाजी की शुरूआत 

हैदराबाद : भारत को बॉक्सिंग में पहला ओलंपिक पदक दिलाने वाले विजेंदर सिंह आज अपना 35वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्हें किंग ऑफ द रिंग भी कहा जाता है। विजेंदर सिंह का जन्म 29 अक्टूबर 1985 को हरियाणा के भिवानी जिले में हुआ था। उनके पिता महिपाल सिंह बेनीवाल हरियाणा रोडवेज में बस ड्राइवर है और उनकी मां एक गृहणी हैं। विजेंदर सिंह को मुक्केबाजी करने की प्रेरणा अपने भाई से मिली। इन्होंने भिवानी बॉक्सिंग क्लब से मुक्केबाजी के गुर सीखे और लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए।

विजेंदर सिंह का मुक्केबाजी का सफर

विजेंदर सिंह ने अपनी शुरूआती शिक्षा अपने गांव कालूवास से की और सेकेंडरी शिक्षा के लिए जिला भिवानी के स्कूल में दाखिला लिया। इसके बाद उन्होंने बैचलर डिग्री पूरी की। साल 1990 में एक मुक्केबाज राज कुमार सांगवान ने अर्जुन अवार्ड जीता था। इसको देखकर विजेंदर और उनके भाई, मनोज ने निश्चित किया कि वे मुक्केबाजी सीखेंगे। विजेंदर की मुक्केबाजी में दिलचस्पी होने के कारण उन्होंने अपनी पढ़ाई को छोड़ दी और अपने करियर में मुक्केबाजी को जगह दे दी और इसमें वे माहिर होते चले गए।

विजेंदर ने ऐसे रचा इतिहास

2008 में बीजिंग ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने से पहले उनका इस महाकुंभ में खेलना मुश्किल लगा रहा था, क्योंकि वो कमर की चोट से जूझ रहे थे।  इसके लिए उन्होंने बड़ी मेहनत की और खुद को इस महासमर के लिए खुद को फिट कर लिया। इसके बाद बीजिंग में हुए ओलंपिक में विजेंदर ने मिडिलवेट वर्ग में भाग लिया और वहां उन्होंने कांस्य पदक जीता। जीते के बाद वह भारत के ऐसे पहले मुक्केबाज बने थे, जिन्होंने भारत के लिए ओलंपिक में पदक जीता हो। वह देश के पहले ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज हैं। 

प्रोफेशनल बॉक्सिंग में भी आजमा चुके हैं हाथ

10 अक्टूबर 2015 को सोनि व्हिटिंग के खिलाफ विजेंदर सिंह ने अपनी पहली प्रोफेशनल बॉक्सिंग फाइट लड़ी और TKO से उसमें जीत दर्ज की। विजेंदर सिंह प्रोफेशनल बॉक्सिंग में 10 मुकाबले लड़ चुके हैं और सभी में उन्होंने जीत दर्ज की। 7 मुकाबलों में उन्होंने नॉकआउट से जीत दर्ज की तो वहीं 3 मुकाबलों में निर्णय उनके पक्ष में रहे।

फिल्म में किया अभिनय, स्टार्स से अच्छी दोस्ती
विजेंदर सिंह फिल्मों में भी हाथ आजमा चुके हैं।  एक फिल्म में वह एक पुलिस ऑफिसर का भी रोल निभा चुके हैं। बता दें कि विजेंदर रियल लाइफ में भी एक पुलिस अफसर हैं। वे हरियाणा पुलिस में डीएसपी हैं। बॉलीवुड के 'खिलाड़ी' अक्षय कुमार की फिल्म 'फगल' में अपने रियल जिंदगी के लम्हों को किरदार के रूप में जिया। ओलिंपिक में मेडल जीत चुके विजेंदर को पुलिस ड्यूटी के लिए अधिक समय नहीं मिलता है। वे अधिकतर बॉक्सिंग में ही बिजी रहते हैं।

क्या सोचता है विजेंदर का बेटा
एक बार विजेंदर से पूछा गया कि जब वह रिंग में उतरते हैं तो उनके परिवार के सदस्य उनसे क्या कहते हैं। इसपर विजेंदर का कहना था कि वैसे तो मेरा परिवार मेरी फाइट ज्यादा देखता नहीं है, लेकिन हां उनका बेटा हमेशा ही उन्हें मोटिवेट करता है और कहता है कि जीत कर ही आना। हां मेरी मां जरूर उस दिन पूजा करती रहती है।


चुनावी पारी के दौरान विजेन्दर (फाइल फोटो)

राजनीति में विजेंदर सिंह

विजेंदर सिंह ने साल 2019 में कांग्रेस के टीकट पर दक्षिणी दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ा था,  लेकिन राजनीति की रिंग में नहीं वह चल नहीं पाए। विजेंदर सिंह का चुनावी पंच लोगों ने पसंद नहीं किया और वह चुनाव हार गए। इस चुनाव में उनकी जमानत भी जब्त हो गयी थी। इनके खिलाफ भाजपा नेता रमेश बिधूड़ी ने भारी मतों से जीत हासिल की थी। 

ये हैं इनकी खेल उपलब्धियां

विजेंदर ने 2001 में इटली में 54 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता जो इनका पहला अंतरराष्ट्रीय पदक था। 

- विजेंद्र सिंह ने सर्वप्रथम साल 2004 के एथेंस ओलंपिक में भाग लिया, लेकिन वह वेल्टर वेट वर्ग में तुर्की के मुस्तफ़ा कारागोलेयू से 20-25 से पराजित हो गए।

- 2006 के कॉमनवेल्थ गेम्स में इंग्लैंड के नील पिरकिंस को सेमीफ़ाइनल में पराजित कर फाइनल में प्रवेश किया, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के बोनगानी मविलासी से पराजित हो गए और कांस्य पदक ही जीत सके।

- 2006 में ही दोहा ओलंपिक खेलों में मुक्केबाज़ी मिडिल वेट वर्ग में कज़ाकिस्तान के बख़्तियार अरतायेव से सेमीफ़ाइनल में 24-29 से पराजित होकर कांस्य पदक जीता।

- 2008 के बीजिंग ओलंपिक में 75 किलोग्राम वर्ग में विजेंदर ने ईक्वाडोर के मुक्केबाज़ कार्लोस गोंगोरा को 9-4 से हराकर कांस्य पदक हासिल किया।

- विजेंदर सिंह को 2009 में राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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