जगमोहन डालमिया : वो नाम जिसने क्रिकेट को बदल दिया, जानें उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें

Special Story On Jagmohan Dalmiya Birth Anniversary - Sakshi Samachar

खिलाडि़यों के लिए हमेशा खड़े रहे

डालमिया पर लगे आरोप

डालमिया का बीसीसीआई से नाता

बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया को हमेशा ऐसे व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा, जिसने भारतीय क्रिकेट को आत्मनिर्भर संस्था बनाया और क्रिकेट की ताकत को इंग्लैंड के लॉर्डस से कोलकाता के ईडन गार्डन्स तक पहुंचाया । आज जगमोहन डालमिया का जन्मदिन है। इस मौके पर जानें उनसे जुड़ी बातें.....

डालमिया का जन्‍म 30 मई 1940 को कोलकाता के मारवाड़ी परिवार में हुआ था। उन्‍होंने कलकत्‍ता के स्‍कॉटिश चर्च कॉलेज में अपनी पढ़ाई पूरी की। क्रिकेट में डालमिया ने विकेटकीपर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्‍होंने एक बार दोहरा शतक भी जमाया था। इसके बाद डालमिया अपने पिता एमएल डालमिया के साथ जुड़ गए और उनकी कंपनी भारत की शीर्ष कंस्‍ट्रक्‍शन फर्म बन गई। 1963 में उनकी फर्म कलकत्‍ता के एमपी बिरला प्‍लेनेटेरियम निर्मित हुई।

कुशल रणनीतिकार थे डालमिया

डालमिया एक कुशल रणनीतिकार थे। भारतीय क्रिकेट को उनका सबसे बड़ा तोहफा 1990 के दशक की शुरुआत में वर्ल्ड टेल के साथ लाखों डालर का टेलीविजन करार था, जिसने बीसीसीआई को दुनिया में सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। 1987 में भारत की सह-मेज़बानी में रिलायंस विश्व कप और 1996 में विल्स विश्व कप में आयोजन में उनकी अहम भूमिका थी।

डालमिया का बीसीसीआई से नाता

डालमिया ने 35 साल के अपने प्रशासनिक करियर की शुरूआत राजस्थान क्लब से बंगाल क्रिकेट संघ की कार्यकारी समिति का सदस्य बनकर की। डालमिया 1979 में बीसीसीआई से जुड़े। 1983 में वो कोषाध्‍यक्ष बने। इसी साल भारत ने विश्‍व कप जीता। इसके बाद उन्‍होंने इंदरजीत सिंह बिंद्रा के साथ मिलकर 1987 और 1996 का विश्‍व कप दक्षिण एशिया में आयोजित कराने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई।

डालमिया को बीसीसीआई के अध्‍यक्ष पद पर कई बार चुना गया। 1996 में उन्‍होंने 23 वोट हासिल करते हुए ऑस्‍ट्रेलिया के माल्‍कोम ग्रे (13 वोट) को आईसीसी के चेयनमैन के पद के लिए मात दी। मगर आईसीसी के संविधान के मुताबिक डालमिया दो-तिहाई से ज्‍यादा वोट अपने पक्ष में नहीं कर सके। हालांकि 1997 में उन्‍हें निर्विवाद आईसीसी का अध्‍यक्ष चुना गया और उन्‍होंने तीन साल अपनी जगह बरकरार रखी। वर्ष 2001 में वह एसी मुथैया को हराकर बीसीसीआई अध्यक्ष बने।

खिलाडि़यों के लिए हमेशा खड़े रहे

डालमिया ने हमेशा अपने देश के खिलाडि़यों का समर्थन किया। आईसीसी पद पर रहते हुए डेनिस मामले ने काफी तूल पकड़ी थी। आईसीसी के रैफरी और पूर्व इंग्लिश कप्‍तान माइक डेनिस ने सचिन तेंडुलकर को तकनीकि नियमों का उल्‍लंघन करते हुए पाया था। भारतीय मीडिया ने इसे बॉल टेंपरिंग का आरोप बताया था। इसमें सचिन पर जुर्माना लगाया गया और निलंबन का संदेश भी दिया गया।

इसके अलावा वीरेंद्र सहवाग पर टप्‍पा खा चुकी गेंद को कैच बताने के लिए एक मैच का प्रतिबंध लगाया गया था। भारत की संसद में इस पर काफी बहस हुई। डालमिया ने डेनिस को मैच रैफरी पद से हटाने के लिए कहा, नहीं तो टेस्‍ट मैच कैंसल करने की बात कही। आखिरकार, डेनिस को आखिरी मैच में रैफरी करने नहीं दी गई क्‍योंकि बीसीसीआई और यूसीबीएसए ने उन पर दबाव बनाया।

डालमिया पर लगे आरोप

2005 बीसीसीआई बोर्ड चुनाव में उनके सदस्‍य रणबीर सिंह महेंद्र को शरद पवार ने मात देकर अध्‍यक्ष पद हासिल किया। अगले साल फंड में घपलेबाजी के चलते और सही दस्‍तावेज नहीं पेश करने के कारण डालमिया को बीसीसीआई से हटा दिया गया। हालांकि 2007 में जब डालमिया ने बाम्‍बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी तो पाया कि बीसीसीआई उन्‍हें दोषी ठहराने के लिए उपयुक्‍त दस्‍तावेज पेश नहीं कर सकी। 2007 में ही कलकत्‍ता हाई कोर्ट ने उन पर से सभी जुर्माने हटाए और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के अध्‍यक्ष पद का चुनाव लड़ने की इजाजत दी जो वो जीत गए।

जून 2013 में डालमिया को बीसीसीआई का अंतरिम अध्‍यक्ष नियुक्‍त किया गया। ऐसा इसलिए किया गया क्‍योंकि श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्‍पन को आईपीएल स्‍पॉट फिक्सिंग का दोषी पाया गया। श्रीनिवासन ने अक्‍टूबर 2013 में अपना अध्‍यक्ष पद दोबारा संभाला। इसके बाद 2 मार्च 2015 को डालमिया पुन: बीसीसीआई अध्‍यक्ष पर लौटे। उन्‍होंने 10 साल के बाद यह गद्दी संभाली। चुनाव में डालमिया ने श्रीनिवासन को हराया था । 20 सितम्बर 2015 को कोलकाता के निजी अस्पताल में डालमिया ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।  

डालमिया को पुरस्‍कार

2005 में डालमिया को वैश्विक खेल में प्रशासनिक उत्‍कृष्‍टता के लिए इंटरनेशनल जर्नल ऑफ द हिस्‍ट्री ऑफ स्‍पोर्ट्स अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया।

1996 में बीबीसी ने डालमिया को शीर्ष छह स्‍पोर्ट्स अधिकारियों में से एक घोषित किया। जब ऑस्‍ट्रेलिया और वेस्‍टइंडीज ने आतंक के डर के चलते 1996 विश्‍व कप में श्रीलंका में खेलने से मना किया तो डालमिया ने भारत और पाकिस्‍तान को वहां दोस्‍ताना मैच खेलने के लिए प्रेरित किया।

1991 में जब दक्षिण अफ्रीका का बॉयकॉट खत्‍म हुआ तो डालमिया ने जल्‍द ही नस्‍लभेद खत्‍म करने के इरादे से उनका भारत दौरा आयोजित किया। ऑस्‍ट्रेलिया के महान क्रिकेटर और कमेंटेटर इयान चैपल ने डालमिया के बारे में कहा था- उनके पास खेल के विकास के लिए दृष्टि है। मैंने ऐसे आइडिया किसी अन्‍य अधिकारी से नहीं सुने।

Advertisement
Back to Top