रीयल लाइफ में भी सेंचुरी बना गए रघुनाथ चंदोरकर, आज मना रहे 100वां जन्मदिन

Oldest living Ranji player Raghunath Chandorkar celebrating his 100th birthday - Sakshi Samachar

ऑलराउंडर थे रघुनाथ चंदोरकर

चंदोरकर का क्रिकेट करियर

6 साल से बेड पर हैं चंदोरकर

हैदराबाद : क्रीज पर तो शतक कई क्रिकेटर्स ने जड़े हैं, पर जिंदगी की पिच पर बहुत कम ही लोग है जो इस मुकाम तक पहुंच सके हैं। जी हां, ऐसे ही एक भारतीय क्रिकेटर (Indian Cricketer) है जो आज अपना 100वां जन्मदिन मना रहे हैं। उस खिलाड़ी का नाम रघुनाथ चंदोरकर (Raghunath Chandorkar) है।  उनका जन्म 21 नवंबर 1920 को महाराष्‍ट्र (Maharashtra) में हुआ था।  

महाराष्ट्र के पूर्व और मुबई के फर्स्ट क्लास क्रिकेटर  रघुनाथ चंदोरकर 100वां जन्मदिन मनाने वाले सिर्फ तीसरे रणजी ट्रॉफी क्रिकेटर है। दिनकर बलवंत देवधर (1892-1993) और वसंत रायजी (1920-2020) के बाद जिंदगी में 100 साल पूरे करने वाले रघुनाथ चंदोरकर तीसरे क्रिकेटर हैं। इस लिहाज से वो भारत के जीवित क्रिकेटर्स में सबसे उम्रदराज हैं। वसंत रायजी ने इसी साल जून महीने में दुनिया को अलविदा कह दिया था। 

ऑलराउंडर थे रघुनाथ चंदोरकर

रघुनाथ चंदोरकर एक मिडिल ऑर्डर बल्‍लेबाज और लेग स्पिन गेंदबाज रहे हैं। चंदोरकर ने 1943 से 44 और 1946 से 47 में महाराष्‍ट्र की तरफ से पांच रणजी ट्रॉफी मैच खेल चुके हैं। 1950 -51 सीजन में वह मुंबई में चले गए थे। 

चंदोरकर का क्रिकेट करियर

चंदोरकर ने 7 फर्स्‍ट क्‍लास मैचों की 10 पारियों में 15.50 की औसत से 155 रन बनाए। जिसमें उनकी सर्वोच्‍च पारी 37 रन की रही। इसी के साथ उन्‍होंने 16 रन देकर दो विकेट भी लिए। चंदोरकर, देवधर के नेतृत्‍व में एसपी कॉलेज और पीवाइसी जिमखाना की तरफ से खेले।

6 साल से बेड पर हैं चंदोरकर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चंदोरकर अपनी मेमोरी खो चुके हैं। फिलहाल अब वह डोंबिवली में एक शांत जिंदगी जी रहे है। मगर वह आज भी टीवी पर क्रिकेट देखते हैं। उनकी बहू विनीता के अनुसार, हम नहीं जानते कि उनके दिमाग में क्‍या चल रहा है, मगर वह टीवी पर क्रिकेट देखते हैं। कोरोना के कारण उनकी सुरक्षा को देखते हुए उन्‍हें सितंबर में उम्रदराज सुविधा में शिफ्ट कर दिया गया था। 

फिटनेस के लिए चलाते थे साइकिल 

चंदोरकर अपनी फिटनेस और डाइट के संतुलन को बनाकर रखते थे। वह 80 की उम्र में भी साइकिल से अपने घर से क्रिकेट ग्राउंड जाते थे, जो करीब चार किलोमीटर दूर था। उनके परिवार के मुताबिक, 1958 तक चंदोरकर ने एक ग्‍लास वर्क का बिजनेस किया और इसके बंद होने के बाद वह ग्‍लास वर्कस की फैक्‍ट्री में काम करने लग गए थे।

 वहीं अगर रायजी की बात करें तो वह बड़ौदा और मुंबई दो टीमों से खेले थे। 9 फर्स्‍ट क्‍लास मैचों में उन्‍होंने 23.08 की औसत से 277 रन बनाए थे। जिसमें उनकी सर्वोच्‍च पारी 68 रन की रही थी। 

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