Birthday Special : बैडमिंटन के 'द्रोणाचार्य' पुलेला गोपीचंद की प्रेरणादायक कहानी

Noted Badminton Coach Pullela Gopichand Inspirational story - Sakshi Samachar

बचपन में क्रिकेट के शौकीन थे गोपीचंद

मां ने गहने बेचकर खरीदा था रैकेट

अर्जुन, पद्मश्री समेत मिल चुके हैं कई अवॉर्ड

नई दिल्ली : बैडमिंटन के द्रोणाचार्य और अपने शिष्यों को अर्जुन बनाने वाले पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी और कोच पुलेला गोपीचंद आज अपना 47 वां जन्मदिन मना रहे हैं। बैडमिंटन खिलाड़ी गोपीचंद का जन्म 16 नवंबर 1973 को आंध्र प्रदेश में हुआ था। आइये इस खास दिन के अवसर पर जानते हैं महान बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद की जीवन से जुड़ी कुछ अहम बातें... 

जब पुलेला गोपीचंद 10 साल के थे, तब वह क्रिकेट के बहुत शौकीन थे। एक बार गोपी धूप में खेल रहे थे तो लू लगने से वह बीमार हो गए थे, जिसके बाद उनके भाई ने उन्हें बैडमिंटन खेलने की सलाह दी थी। गोपीचंद जब 13 साल  के थे तब उनके लिगामेंट्स टूट गए थे, लेकिन एक ही साल में सर्जरी के बाद वह अपने इंटर कॉलेज प्रतियोगिता में एकल और युगल के दोनों खिताब जीत लिए थे।

कई बार टूटा सपना
गोपीचंद की मां उन्हें एक बेहतरीन खिलाड़ी बनाना चाहती थीं, जिसके लिए वह गोपी के लिए सबसे अच्छा रैकेट खरीदना चाहती थीं। रैकेट खरीदने के लिए उनकी मां के पास पैसे नहीं थे, तो उन्होंने अपने गहने बेच दिये थे। कई बार घायल होने की वजह से भी गोपीचंद का अच्छा बैडमिंटन खिलाड़ी बनने का सपना कई बार टूटा, लेकिन गोपीचंद ने अपने जिंदगी में कभी हार नहीं मानी। मेहनत और निष्ठा से हर समस्या को दरकिनार करते हुए आगे बढ़ते गये। 

1989 में मिली पहली सफलता
सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ते हुए सन् 1989 में गोपीचंद ने गोवा में राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में एक एकल खिताब जीता था और 1996 में उन्होंने विजयवाड़ा में सार्क के खेल में 1 अंतरराष्ट्रीय एकल खिताब जीता था। गोपीचंद ने लगातार 5 साल तक (2000 तक) लगातार यह जीत हासिल की। कॉमनवेल्थ गेम्स 1998 में गोपीचंद ने मेन्स टीम में सिल्वर मेडल जीता, जबकि मेन्स सिगल्स में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था। 2001 में गोपीचंद ऑल इंग्लैण्ड ओपन बैडमिंटन चैम्पियनशिप जीतकर प्रकाश पादुकोण के बाद दूसरे भारतीय बन गए। पुलेला गोपीचंद को राजीव गांधी खेल रत्न, अर्जुन, पद्मश्री, द्रोणाचार्य, पद्मभूषण जैसे पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। 

गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी की स्थापना
सन् 2003 में गोपीचंद ने हैदराबाद में गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी की स्थापना की। अपनी अकादमी खोलने के लिए गोपीचंद को काफी संघर्ष करना पड़ा। गोपीचंद को आंध्र प्रदेश सरकार ने अकादमी बनाने के लिए ज़मीन तो दे दी थी, लेकिन प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए गोपीचंद के पास पैसे नहीं थे, जिसकी वजह से उन्हें अपना घर भी गिरवी रखना पड़ा था। फिर एक व्यापारी की मदद से अपना प्रोजेक्ट पूरा किया था। 

साइना नेहवाल और पी.वी.सिंधु समेत कई बड़े खिलाड़ी 'गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी' का हिस्सा रहे हैं। इनमें ज्वाला गुट्टा, पी कश्यपस, श्रीकांत किदाम्बी, तरुण कोना आदि शामिल हैं। गोपीचंद ने अपने शिष्यों यह सिखाया कि संघर्ष करते हुए कैसे आगे बढ़ा जाता है। गोपीचंद ने हमेशा फिटनेस पर ध्यान दिया और अपने शिष्यों को शीर्ष पर पहुंचने के लिए फिट रहने की सलाह दी। एक कोच के रूप में पुलेला गोपीचंद की मेहनत तब रंग लाई, जब 2016 में पी.वी. सिंधु रियो ओलांपिक में रजत पदक जीतकर भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बन गईं।

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