क्रिकेट के लिए इस खिलाड़ी ने बेच दी थी अपनी साइकिल, छोड़ दिया था दसवीं का एग्जाम

Know Interesting Facts of cricketer Praveen Kumar Journey on this Birthday - Sakshi Samachar

हैदराबाद : भारतीय क्रिकेट में क्रिकेटर प्रवीण कुमार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रवीण कुमार एक ऐसे गेंदबाज हैं जो किसी भी तरह के पिच पर गेंद को स्विंग करने में सक्षम हैं। साल 2007 में भारतीय क्रिकेट टीम में डेब्यू करने वाले प्रवीण कुमार को साल 2012 में चोट के कारण टीम से बाहर होना पड़ा था। प्रवीण कुमार आईसीसी क्रिकेट 2011 के विश्वकप के लिए भी चुने गए थे, लेकिन चोट की वजह से उन्हें टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा। चालिए उनके जन्मदिन पर उनके कुछ रोचक किस्सों पर एक नजर डालते हैं।

1. आर्थिक तंगी के बीच गुजरा बचपन
बचपन से क्रिकेट के शौकीन प्रवीण कुमार एक बहुत ही सामान्य किसान परिवार से आते हैं।  उनका बचपन आर्थिक तंगी के बीच गुजरा, यही वजह है कि वह हर दिन स्कूल को टिफिन में चपाती ले जाते थे और उनकी मां यह कहकर उन्हें चपाती दिया करती थीं कि जो वह देती हैं वो बहुत ही पौष्टिक और स्वस्थ होता है।

2. जूतों के लिए बेची साइकिल
 प्रवीण कुमार अंडर-19 में खेलना चाहते थे, लेकिन  इसके लिए उनके पास अच्छे जूते नहीं थे। उस वक्त अच्छे जूतों के लिए 3 हजार रुपए काफी अधिक थे। हालांकि उनकी मां ने उन्हें जूते दिलवाने का वादा तो किया था, लेकिन मां के पास इतने रुपए जमा होना मुश्किल मानते हुए प्रवीण कुमार ने स्थानीय एक मिठाई की दुकान पर 2 हजार रुपए में अपनी साइकिल बेच दी और बाकी रुपए उनकी मां ने जुटा दी।

3. क्रिकेट के लिए छोड़ दी परीक्षा

प्रवीण कुमार क्रिकेट के इतने दिवाने थे कि उन्होंने क्रिकेट खेलने के लिए अपनी दसवीं की अंतिम परीक्षा भी नहीं लिखी और सौभाग्यवश उनके भाई ने उन्हें किसी तरह बचा लिया। प्रवीण के मुताबिक वह परीक्षा केंद्र जाने की बजय क्रिकेट के मैदान में गए। शाम को जब घर लौटे तो उनके भाई ने पूछा कि परीक्षा कैसी थी तो उन्होंने कहा बहुत अच्छा। भाई ने जब उनसे प्रश्न पत्र पूछा तो प्रवीण कुमार फंस गए और भाई के सामने गिड़गिड़ाते दिखे कि इसके बारे में पिताजी को कुछ न बताए। हालांकि भाई ने बाद में उनकी मां को इस बारे में बताया।

4. पाकिस्तान के खिलाफ खेला पहला मैच
प्रवीण कुमार उस वक्त भारतीय क्रिकेट सेलेक्टरों की नजर में आए जब उन्होंने 2007 में खेले गए एनकेपी साल्वे चैलेंजर ट्राफी में पहले दो मैचों में 9 विकेट लेने के साथ 89 रन भी बनाए। बाद में वह भारतीय क्रिकेट टीम के लिए सेलेक्ट हुए और साल 2007 में ही पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू किया।

5. कॉमन वेल्थ ट्राई सीरीज में मिला मैन ऑफ द मैच
पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू करने के साथ ही प्रवीण कुमार ऑस्ट्रेलिया में खेले गए कॉमनवेल्थ बैंक त्रिकोणीय श्रृंखला का हिस्सा बने। इस टूर्नमेंट में प्रवीण ने कुल चार मैच खेले, जिनमें उन्होंने 10 विकेट झटके, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के साथ खेले गए दो फाइनल मैचों में कुल छह विकेट शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे फाइनल में प्रवीण कुमार को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द मैच से नवाजा गया। इस मैच में उन्होंने एडम गिलक्रिस्ट, रिकी पॉंटिंग और माइकल क्लार्क को आउट किया था।

6. मनोज प्रभाकर ने बताया मैजिशियन
वेटेरन क्रिकेट मनोज प्रभाकर ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ त्रिकोणीय श्रृंखला में प्रवीण कुमार की बाल स्विंग की कला से प्रभावित होकर उन्हें मैजिशियन करार दिया था।

7.  इस वजह से हुए सस्पेंड

प्रवीण कुमार को अपनी गालीगलौच वाले रवैये की वजह से मैच की 100 फीसदी फीस का जुर्माना लगाने के साथ-साथ उन्हें विजय हजारे ट्रॉफी के मैचों से निलंबित कर दिया गया था। यही नहीं, साल 2008 में भी प्रवीण कुमार मेरठ में एक डॉक्टर से उलझे थे। प्रवीण कुमार अकसर मैदान में और मैदान के बाहर अनुशासन को लेकर विवादों में रहे। 
2011 में इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज के दौरे के दौरान भी प्रवीण कुमार पर दर्शकों के साथ बदसलूकी के आरोप लगे। बाद में मैच के रेफरी धनंजय सिंह ने अपनी रिपोर्ट में प्रवीण कुमार को क्रिकेट खेलने के लिए मानसिक रूप से अनफिट करार दिया था। हालांकि मार्च 2013 में बीसीसीआई ने उनके निलंबन को हटाने के साथ ही घरेलू क्रिकेट में खेलने की अनुमति प्रदान की। 

8. मेरा भाई है रोहित शर्मा 

प्रवीण ने एक अंग्रेजी अखबर को दिए गए इंटरव्यू में बताया था कि अनुशासनिक कार्रवाई के बाद वह एक तरह से डिप्रेशन में चले गए थे, लेकिन लेकिन रोहित शर्मा ने उन्हें डिप्रेशन से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही नहीं, साल 2014 में उन्हें मुंबई इंडियंस टीम में शामिल करने के लिए बड़ी मेहनत की।  उन्होंने रोहित शर्मा को दोस्त, मेरा भाई बताते हुए कहा था कि वह तमाम जिन्दगी नहीं भूलेंगे।

9. वर्तमान में प्रवीण कुमार पत्नी सपना और बेटी साया के साथ एक खुशहाल जिन्दगी बिता रहे हैं और वह भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेलेने के अलावा गेंदबाजी के कोच बनना चाहते हैं।

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