कभी टीम इंडिया के इस क्रिकेटर को कहा गया था अगला 'सुनील गावस्कर', ऐसे खत्म हो गया करियर

Know Inresting Facsts About Sanjay Manjrekar On His Birthday  - Sakshi Samachar

बने बेहतरीन कमेंटेटर

सर रिचर्ड्स ने कहा था अगला सुनील गावस्कर

भारतीय क्रिकेट इतिहास में जब कभी भी बेहतरीन तकनीक और 'पर्फ़ेक्शन' के बात आएगी तो संजय मांजरेकर का नाम जरूर लिया जाएगा। भले ही संजय मांजरेकर का करियर ज्यादा लंबा नहीं रहा लेकिन अपनी बल्लेबाजी के दौरान जिस तकनीक के साथ बल्लेबाजी करते थे उसे आज भी याद किया जाता है। मांजरेकर को उनकी बल्लेबाजी तकनीक की वजह से भारत का दूसरा 'सुनील गावस्कर' कहा जाता था। संजय मांजरेकर आज अपना 55वां जन्मदिन मना रहे है। इस मौके पर जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें......... 

संजय ने भारतीय टीम में अपनी जगह बतौर विकेटकीपर/बल्लेबाज हासिल की थी। लेकिन वह एक बल्लेबाज के तौर पर खुद को स्थापित करने में सफल रहे। मांजरेकर ने अपना डेब्यू टेस्ट मैच 1987 में वेस्टइंडीज के खिलाफ दिल्ली टेस्ट में किया था। हालांकि पहले टेस्ट में मांजरेकर अपनी बल्लेबाजी से कोई कमाल नहीं कर पाए लेकिन अपनी तकनीक से हर किसी को जरूर हैरान कर दिया था। संजय मांजरेकर ने अपने टेस्ट करियर का पहला शतक 1989 में वेस्टइंडीज के खिलाफ ब्रिजटाउन  टेस्ट में जमाया था। हालांकि यह टेस्ट मैच वेस्टइंडीज की टीम 8 विकेट से जीतने में सफल रही थी लेकिन मांजरेकर की बल्लेबाजी ने उनकी प्रतिभा का परिचय दे दिया था।

सर विव रिचर्ड्स ने कहा था अगला सुनील गावस्कर

साल 1989 में मांजरेकर ने वेस्टइंडीज के दौरान पर शानदार बल्लेबाजी की थी, उस वक्त वेस्टइंडीज के महान सर विव रिचर्ड्स ने एक बार कहा था कि मांजरेकर के रूप में भारत को अगला गावस्कर मिला है। उन्होंने कहा था, 'संजय में, भारत ने एक और गावस्कर पाया है. उसके पास सब कुछ है- उत्कृष्ट तकनीक, हिम्मत और दृढ़ संकल्प।'

पाकिस्‍तान के खिलाफ शानदार रिकॉर्ड

1989 में भारतीय टीम के पाकिस्‍तान दौरे के दौरान संजय मांजरेकर स्‍टार बनकर उभरे। इस दौरे पर टेस्‍ट सीरीज के चार मैचों में मांजरेकर ने 98 से अधिक की औसत से 569 रन बनाए थे। सीरीज के सभी मैच ड्रॉ पर खत्‍म हुए, लेकिन ऐसी कई मुकाबले थे जहां हार के मुहाने पर खड़ी भारतीय टीम को इस दौरे के दौरान संजय मांजरेकर ने बाहर निकाला।

कराची में भारत को संकट से निकाला

कराची टेस्‍ट में भारत को 453 रनों का लक्ष्‍य मिला। पाकिस्‍तान बेहद मजबूत स्थिति में था। भारत की हार निश्चित नजर आ रही थी। मांजरेकर ने नवजोत सिंह सिद्धू के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 213 रन की साझेदारी बनाकर भारत को मुश्किल से निकाला। 

लाहौर में जड़ा दोहरा शतक

इसी तरह फैसलाबाद टेस्‍ट की दोनों पारियों में मांजरेकर के बल्‍ले से अर्धशतक निकाला। फिर लाहौर टेस्‍ट में उन्‍होंने दोहरा शतक जड़ा। पहले मोहम्‍मद अजहरुद्दीन के साथ मिलकर 149 और फिर रवि शास्‍त्री के साथ 186 रन की साझेदारी बनाकर मांजरेकर ने भारत को बड़े स्‍कोर तक पहुंचा। इस मैच में उन्‍होंने रन आउट होने तक 218 रन की पारी खेली। 

हालांकि उनके करियर का अंत उतना शानदार नहीं रहा। मांजरेकर ने अपना आखिरी अंतरराष्‍ट्रीय मुकाबला 1996 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेला। 37 टेस्‍ट में उनके नाम 37.14 की औसत से 74 रन रहे। वहीं, 74 वनडे में उन्‍होंने 1,194 रन बनाए। 

गांगुली-द्रविड़ के आगमन के कारण खत्म हुआ करियर

बताया जाता है कि 1996 में सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ जैसे टैलेंटेड क्रिकेटरों का आगमन भारतीय क्रिकेट में हुआ, जिससे मांजरेकर की जगह खतरे में पड़ गई। 1996 के दौरान गेम प्लान और बेंच स्ट्रेथ को लेकर भारतीय टीम की रणनीति अच्छी नहीं थी। इसलिए मांजरेकर को जल्द संन्यास का फैसला करना पड़ा था। वहीं, कई क्रिकेट पंडितों का मानना है कि मांजरेकर कम से कम और तीन साल तक क्रिकेट और खेल सकते थे। 

बने बेहतरीन कमेंटेटर

क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद संजय मांजरेकर ने अपना हाथ टीवी कमेंट्री में आजमाया। वर्तमान में मांजरेकर बेहतरीन क्रिकेट कमेंटेटेर हैं। मांजरेकर ने अपनी ऑटोबायोग्राफी भी लिखी है जिसका नाम इम्परफैक्ट' है। इस ऑटोबायोग्राफी में मांजरेकर ने सचिन के साथ अपने रिश्तें को लेकर भी बात की है और साथ ही 1996 वर्ल्डकप सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ मिली हार का भी जिक्र किया है। 

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